काबुल। अफगानिस्तान की एक पूर्व महिला पत्रकार की काबुल के दक्षिण-पूर्व इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई। महिला का नाम मीना मंगल है। मंगल शिक्षा और कार्य के लिए महिलाओं के अधिकारों की पैरोकार थीं और हाल ही में अफगानिस्तान की संसद के निचले सदन में एक सांस्कृतिक सलाहकार बनी थीं।

गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि काबुल के पीडी 8 कार्ट-ए-नवा इलाके में शनिवार को दिनदहाड़े उन पर हमला किया गया। टोलो न्यूज ने मंत्रालय के प्रवक्ता नसरत रहीमी के हवाले से कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है

मीना मंगल। 
मीना मंगल। 

टीवी एंकर के रुप में मिली थी पहचान

मीना मंगल को अफगानिस्तान के सबसे बड़े निजी प्रसारक पश्तो भाषा के चैनल टोलो टीवी और बाद में स्थानीय टीवी नेटवर्क जैसे लेमार टीवी, शमशाद न्यूज और एरियाना टीवी पर एक एंकर के रूप में पहचान मिली थी।

मीना मंगल।
मीना मंगल।

फेसबुक पोस्ट में कही थी यह बात

3 मई को मीना मंगल ने फेसबुक पोस्ट में कहा था कि उनकी जान को खतरा है। उन्होंने कहा था कि उन्हें धमकी भरे संदेश मिल रहे हैं लेकिन उन्होंने कहा था कि 'मजबूत महिलाए मौत से नहीं डरतीं' और वह अपने देश से प्यार करतीं हैं।

मां ने रोते हुए ट्विटर पर पोस्ट किया वीडियो

ट्विटर पर मंगल की मां ने रोते हुए एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने पुरुषों के एक समूह को संदिग्ध हत्यारों के रूप में नामित किया है। उन्होंने दावा किया कि इसी समूह ने पहले भी उनकी बेटी का अपहरण किया था। समूह सदस्यों को उस अपहरण के लिए गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में रिश्वत देकर वे छूट गए।

महिला अधिकार के लिए काम करने वाले संगठनों ने जताई नाराजगी

महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने अधिकारियों के खिलाफ नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जान का खतरा होने के बाद भी मेना को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई?अफगान मानवाधिकार वकील और महिला अधिकार कार्यकर्ता वजहमा फरोग ने कहा, "महिला ने पहले ही अपनी जान को खतरा बताया था, कुछ क्यों नहीं किया गया? हमें जवाब चाहिए।" उन्होंने कहा, "पुरुष प्रधान इस समाज में यह इतना आसान क्यों है कि यदि कोई महिला आपसे सहमत नहीं है तो उसकी हत्या कर दो।"

इसे भी पढ़ें :

अफगानिस्तान में बाढ़ से 59 की मौत, भारी बारिश लेकर आई परेशानी का सबब

हत्या से कुछ दिन पहले इंटरनेशनल हेडक्वार्टर किया था हमला

मंगल की हत्या के कुछ दिन पहले तालिबान ने काबुल में एक अंतर्राष्ट्रीय सहायता समूह के मुख्यालय पर हमला किया था, जिसमें उन्होंने हमले के पीछे का कारण महिला अधिकारों के लिए वहां हो रहे कामों का बताया था।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहउल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि अफगानिस्तान में इस सहायता समूह ने 'हानिकारक पश्चिमी गतिविधियों' को बढ़ावा दिया है और 'पुरुषों और महिलाओं के बीच खुले अंतर-मिश्रण को बढ़ावा देने' का काम किया है।