वैसे तो ब्रेस्ट कैंसर बढ़ती उम्र के साथ-साथ महिलाओं में अधिक होता है, लेकिन पुरुषों में भी स्तन कैंसर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पुरुषों में एक प्रतिशत ही ब्रेस्ट कैंसर होता है और उसकी वजह से पुरुषों में स्तन का विकास होता नहीं है।

स्तन का मुख्य काम स्तन पान होता है जो कि पुरुषों में होता नहीं है। पुरुष और महिलाओं में स्तन के विकास के हार्मोन्स अलग-अलग होते हैं। पुरुषों में स्तन कैंसर बहुत ही एडवांस होता है ये बहुत तेजी से फैलता है। स्किन से तेजी से फैलकर छाती से चिपक जाता है, इसलिए पुरुषों को भी इसके लिए हमेशा सजग रहना चाहिए।"

पुरुष स्तन कैंसर एक दुर्लभ बीमारी है जो आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को होती है। दरअसल ब्रेस्ट कैंसर को लेकर पुरुषों में जागरुकता की कमी है। लोग अक्सर इसके लक्षणों को इग्नोर करते चलते हैं जिससे बाद में स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। आइए जानते हैं उन लक्षणों के बारे में जिन्हें नजरअंदाज करने से आपकी जान के लिए खतरा पैदा हो जाता है।

पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

छाती पर गांठ बनना

अगर आपकी छाती पर गांठ बन रही है तो उसे इग्नोर न करें। ये ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण हो सकता है। इन गांठों में दर्द नहीं होता है। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, इसकी सूजन गर्दन तक फैल जाती है।

यहां है कुछ और लक्षण

*ब्रेस्ट में सूजन

*ब्रेस्ट या निप्पल में दर्द

* निप्पल्स का अंदर की ओर धंसना

*निप्पल से डिसचार्ज (ब्रेस्ट मिल्क नहीं)

* ब्रेस्ट की स्किन या निप्पल में रेडनेस

* ब्रेस्ट में निप्पल के पास या कहीं भी लंप होना।

* आर्मपिट (बगल) में लंप होना।

* ब्रेस्ट के साइज में बदलाव।

* निप्पल्स की थिकनेस में बदलाव।

* निप्पल्स से खून आना।

* हड्डी में दर्द।

हालांकि युवा भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। ज्यादातर देशों में अब तक पुरुषों के लिए स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राम सर्विस जैसे कार्यक्रम नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए कैंसर पर यह रिपोर्ट तैयार करने वाले बर्नार्ड स्टीवर्ट का मानना है कि इसके लिए सरकारों को आगे आने की जरूरत है। सरकारों को चाहिए कि जांच के उच्च स्तरीय इंतजाम मुहैया कराएं, जो कि कीमत से ज्यादा निवेश है।

जर्मनी में हर साल करीब 600 पुरुष स्तन कैंसर के मरीज पाए जाते हैं जबकि महिला मरीजों की संख्या 74,500 है। जर्मन सोसाइटी ऑफ यूरोलॉजी की प्रोफेसर सबीने क्लीश कहती हैं कि हालांकि यह महिलाओं के मुकाबले बहुत छोटी संख्या है, लेकिन इसके बारे में जागरुकता से जानें बचाई जा सकती हैं। मर्दों को आम तौर पर लगता है कि उन्हें स्तन कैंसर नहीं हो सकता, इसलिए ऐसे लक्षण होने पर भी वे उसे गंभीरता से नहीं लेते और डॉक्टर तक आते आते बहुत देर कर देते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार अगर इसी रफ्तार से कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती रही तो 2030 तक दुनिया भर में पांच में से एक पुरुष 75 साल की आयु से पहले कैंसर का मरीज होगा। आठ में से एक की मौत कैंसर के कारण होगी।

पश्चिमी देशों में स्तन कैंसर तेजी से फैल रहा है। हर 8 में से 1 महिला को ब्रेस्ट कैंसर है। हालांकि भारत में अभी हर 22 में से एक महिला में ही यह पाया गया है, लेकिन आंकडें बढ़ रहे हैं।

जिन लोगों को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम की समस्या है वे स्तन कैंसर के खतरे में ज्यादा आते हैं। क्लाइनफेल्टर एक तरह की जीन संबंधित बीमारी है जिसमें पुरुष में एक्स क्रोमोजोम की संख्या ज्यादा होती है। इस तरह के पुरुषों में स्तन कैंसर की संभावना 15 से 50 फीसदी तक ज्यादा होती है।

खुद टेस्ट करें

अगर पुरुषों को लगता है कि उनके दोनों स्तनों के साइज में अंतर है या कोई सख्त गांठ जैसी है या निप्पल से किसी तरह का स्राव हो रहा है, तो उन्हें तुरंत ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए।" पुरुषों को किसी भी तरह का संदेह हो तो तुरंत ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

इस तरह के लक्षण होने का यह मतलब नहीं कि व्यक्ति को स्तन कैंसर ही है, लेकिन जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। महिलाओं की ही तरह जल्दी जांच हो जाने पर पुरुषों का भी बेहतर और समय रहते इलाज किया जा सकता है। स्तन निकाले जाने का ऑपरेशन पुरुषों के मामले में ज्यादा मुश्किल है।