आज की भाग-दौड़ की जिन्दगी में लोग मुख्य रूप से कामकाजी लोग बाहरी भोजन के आदी बन जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों से लोग फास्ट फूड की तरफ आकर्षित हुए हैं और हो रहे हैं। फास्ट फूड का क्रेज इतना बढ़ गया है कि इन दिनों शहर और गांवों की हर गली और सड़क पर फास्ट फूड सेंटर देखने को मिलते हैं। इसका मतलब हर इलाके में चार से पांच फास्ट फूड सेंटर होते ही हैं।

युवाओं का झुकाव फास्ट फूड की तरफ अधिक देखा जा सकता है। स्कूली बच्चे, युवक-युवतियां सहित सभी आयु के लोग फास्ट फूड का सहारा ले रहे हैं। खास करके बैचलर्स फास्ट फूड्स के आदी बनने लगे हैं। शहरों में एमएनसी में काम करने वाले प्रोफेशनल्स फास्ट फूड के आदी बनने लगे हैं। धीरे-धीरे फास्ट फूड की संस्कृति अब गांवों में भी फैली गई है। जंक फूड बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालता है। फास्ट फूड खाने से स्वास्थ्य बिगड़ने का पता होने के बावजूद युवा जंक फूड खाने में रुचि दिखा रहे हैं।

कॉंसेप्ट फोटो 
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कई अध्ययन और शोध में यह बात सामने आई है कि फास्ट फूड के आदि बने लोगों में डायबेटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा, हॉर्ट अटैक, कैंसर जैसे बीमारियों के शिकार होने का खतरा अधिक होता है। हाल के अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि फास्ट फूड भावुक लोगों पर गंभीर प्रभाव डालता है।

बर्मिंगाम स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा के शोधकर्ताओं की मानें तो फास्ट फूड का अधिक सेवन करने वाले डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। शोधकर्ता कुछ स्कूली विद्यार्थियों के खान-पान की आदतों के गहन अध्ययन के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं की फास्टफूड के चलते लोग कई तरह की महामारियों के शिकार हो रहे हैं।

ऐसे किया गया अध्ययन

यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स के मुताबिक अध्ययन के लिए फास्ट फुड का अधिक सेवन करने वाले 84 स्कूली विद्यार्थियों की आयु वाले बाल-बालिकाओं को चुना गया। इनमें 95 फीसदी लोग कम आय वाले परिवारों से जुड़े अफ्रीकन अमेरिकी थे।

पौष्टिक भोजन के पदार्थ
पौष्टिक भोजन के पदार्थ

सोडियम, पोटाशियम की मात्रा का पता लगाने के लिए प्रति दिन रात के वक्त उनके पेशाब के नमूने एकत्रित किए गए। इस तरह डेढ़ साल तक अध्ययन के बाद इसके रिजल्ट घोषित किए गए। शोध के मुताबिक जंक फूड का सेवन करने वालों में सोडियम की मात्रा बढ़ती है और पोटाशियम की मात्रा घट जाती है।

सोडियम की मात्रा बढ़ने की वजह

यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा के मनोवैज्ञानिक प्रोफेसर सिल्वीम्रग का कहना है कि फास्ट फूड, प्रोसेज किया गया भोजन अधिक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ती है और इससे लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं। जंकफूड में अधिक चरवी, शुगर, नमक होता है। शरीर के लिए उपयोगी प्रोटीन्स, विटामिन्स सहित अन्य पौष्टिक पदार्थ नहीं होते। स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी फाइबर के पदार्थ इसमें नहीं मिलते। बीन्स, आलू, हरे पत्तों की सब्जी, टमाटर, केला, संतरा, धही, सब्जियों जैसे भोजन खाने से पोटाशियम की मात्रा घटती है। यह अध्ययन केवल सोडियम और डिप्रेशन पर हुआ है, लेकिन जंक फूड से क्यों डिप्रेशन के शिकार होते हैं, इसपर शोध जारी है।

ये लोग होते हैं डिप्रेशन के शिकार

डिप्रेशन के शिकार होने वालों में अधिकांश स्कूली बच्चों की आयु वाले होते हैं। राष्ट्रीय डाटा विश्लेषण में 12 से 17 वर्ष की आयु वाले बच्चों में अधिकांश डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। 2005-2017 के बीच 52 फीसदी बच्चे डिप्रेशन के शिकार हुए, जबकि अब यह बढ़कर 63 फासदी हो गया है। युवकों में डिप्रेशन और मानसिक तनाव का शिकार होने से आत्महत्या जैसी सोच बढ़ जाती है।

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कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि फास्ट फूड की वजह से युवा भी डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। स्पेन में प्रकाशित एक अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक प्रोसेज किया गया भोजन का अधिक सेवन करने वालों में 48 फीसदी लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। करीब 9000 लोगों को छह वर्षों तक जांचने के बाद इसकी घोषणा की गई है।

कई शोधों में यह बात उजागर हुई है कि हमारे भोजन और डिप्रेशन के बीच गहरा रिश्ता होता है। अमेरिका, स्पेन, फ्रान्स, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस और ईरान के एक शोध के मुताबिक प्रोसेजड् फूड खाने से लोग अस्वस्थ होने के अलावा डिप्रेशन के शिकार होते हैं। ताजे फल, सब्जियां और पत्तों की सज्बी खाने के साथ थोड़ी मात्रा में फास्ट फूड खाने से डिप्रेशन के खतरे से बचा जा सकता है।

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दबाव से बचने के तरीके

*. फास्ट फूड, प्रोसेजड् फूड, चीनी अधिक मात्रा में रहने वाले भोजन से बचना चाहिए। ये मस्तिष्क पर दबाव बढ़ाने वाले केमिकल्स पर किसी प्रकार का दबान नहीं डालते। इसी क्रम में सही विटामिन, मिनरल्स जैसे पौष्टिक भोजन प्रति दिन पर्याप्ता मात्रा में सही समय पर लेना चाहिए। ऐसा करने से डिप्रेशन से बच सकते हैं।

*. ताजे फल, सब्जियां और फाइबर युक्त भोजन करना चाहिए।

*. प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम और योग करना चाहिए। कठिण व्यायाम करने के बजाय कम से कम आधे घंटे वाकिंग करना चाहिए। इससे शरीर में रक्त चाप बेहतर होती है। यही नहीं, वजन घटाने और मानिसक उल्लास में यह काफी उपयोगी साबित होती है।

*. स्वस्थ व्यक्ति को प्रति दिन कम से कम 6 से 8 घंटे सोना चाहिए है। अन्यथा दबाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स शरीर में विभिन्न प्रकार के रासायन जरूरत से ज्यादा पैदा करते हैं, जिससे दबाव और चिंता बढ़ जाती है। ऐसे में उनसे बचने के लिए प्रति दिन पर्याप्त नींद लेना जरूरी है।

*. प्रति दिन काम के दबाव से व्यस्त होने के बावजूद थोड़ा सा वक्त मनोरंजन के लिए निकाल लेना चाहिए। इससे कुछ हद तक दबाव कम होने की संभावना होती है। सभी के साथ हंसते और मुस्कुराते बातें करने और जोक्स सुनने से भी दबाव कम होता है।

*. अगर आपको लगे कि दबाव अधिक है तो काम छोड़कर कुछ मिनटों के लिए आंखें मूंदकर जोर-जोर से सांसें लेनी चाहिए। शरीर में हवा लेते और छोड़ते वक्त अपका ध्यान सांस पर होना चाहिए। ऐसा करने से भी आप दबाव से मुक्ति पा सकते हैं।