हैदराबाद : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इन दिनों चमकी नामक बुखार कहर बरपा रही है। इस बुखार की चपेट में आने से करीब 100 से ज्यादा बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं। आखिर चमकी बुखार इतना खतरनाक क्यों है? क्या है इसके लक्षण? और कैसे इसकी चपेट में आने से बचा जा सकता है? आइए जानते हैं इसके बारे में।

चमकी बुखार वास्तव में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस ) है। इसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है। यह इतनी खतरनाक और रहस्यमयी बीमारी है कि अभी तक विशेषज्ञ भी इसकी सही वजह का पता नहीं लगा पाए हैं। चमकी बुखार में वास्तव में बच्चों के खून में सुगर और सोडियम की कमी हो जाती है। सही समय पर उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्मियों में तेज धूप और पसीना बहने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इस वजह से डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, थकान, लकवा, मिर्गी, भूख में कमी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। चमकी बुखार के लक्षण भी ऐसे ही हैं।

यह बीमारी शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है। बहुत ज्यादा गर्मी एवं नमी के मौसम में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के फैलने की रफ्तार बढ़ जाती है। इस मौसम में इसकी तीव्रता भी काफी बढ़ जाती है।

चमकी बुखार के लक्षण

1. लगातार तेज बुखार रहना

2. बदन में लगातार ऐंठन होना

3. दांत पर दांत दबाए रहना

4. सुस्ती चढ़ना

5. कमजोरी की वजह से बेहोशी आना

6. चिउंटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना

7. बुखार के साथ घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है।

बचाव के तरीके-

1. बच्चों को जूठे व सड़े हुए फल न खाने दें

2. बच्चों को उन जगहों पर न जाने दें, जहां सूअर रहते हैं

3. खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ जरूर धुलवाएं

4. पीने का पानी स्वच्छ रखें

5. बच्चों के नाखून न बढ़ने दें

6. गंदगीभरे इलाकों में न जाएं

7. बच्चों को सिर्फ हेल्दी खाना ही खिलाएं

8. रात के खाने के बाद हल्का- फुल्का मीठा खिलाएं

9. बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।

कैसे काम करते हैं चमकी बुखार के वायरस

इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है। हमारे मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है, तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है।

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चमकी बुखार के वायरस जब शरीर में पहुंचते हैं और खून में शामिल हो जाते हैं, तो इनका प्रजनन शुरू हो जाता है। इसके बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। खून के साथ बहकर ये वायरस मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन का कारण बनते हैं और शरीर के 'सेंट्रल नर्वस सिस्टम' को खराब कर देते हैं।

अगर आपके बच्चे में लक्षण दिखे तो क्या करें

1. अगर आपके बच्चे में चमकी बीमारी के लक्षण दिखें तो सबसे पहले बच्चे को धूप में जाने से रोकें।

2. बच्चा तेज धूप के संपर्क में आया तो उसे डिहाईड्रेशन की समस्या होगी, जिससे बीमारी की गंभीरता बढ़ती है।

3. बच्‍चों को दिन में दो बार स्‍नान कराएं।

4. गर्मी के समय बच्‍चों को ओआरएस अथवा नींबू-पानी-चीनी का घोल पिलाएं। रात में बच्‍चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं।

5. चीनी-नमक का घोल, छाछ, शिकंजी के अलावा तरबूज, खरबूज, खीरे जैसी चीजों का खूब सेवन करायें।

आपको बता दें कि इंसेफ्लाइटिस एक संक्रामक बीमारी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकती है। किसी व्यक्ति के इस बीमारी के संक्रमित हो जाने के बाद उसके मल-मूत्र, थूक, छींक आदि के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति में भी इंसेफ्लाइटिस के वायरस पहुंच सकते हैं।

इंसेफ्लाइटिस का ही एक रूप है जापानी बुखार, जो मच्छरों के कारण फैलता है। एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम से बचाव के लिए आपको अपने घर के आसपास सफाई रखनी चाहिए। साथ ही चमकी बुखार के लक्षण दिखने के बाद तुरंत उसकी पहचान करें। इसके अलावा घर पर सावधानी बरतने के साथ ही इस तरह का कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।