विशाखापत्तनम / हैदराबाद: विशाखापत्तनम एयरपोर्ट पर आंध्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वाई एस जगन मोहन रेड्डी पर हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने में जुटी है। मामले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल औक आंध्र प्रदेश पुलिस आमने सामने है।

आंध्र प्रदेश डीजीपी आर.पी. ठाकुर ने बयान में कहा है कि विशाखापत्तनम एयरपोर्ट के अंदर सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह सीआईएसएफ की जिम्मेदारी होती है। लिहाजा राज्य पुलिस द्वारा किसी तरह की लापरवाही का सवाल ही नहीं उठता है।

वहीं सीआईएसएफ के महानिदेशक सीवी आनंद का कहाना है कि उनकी एजेंसी की जिम्मेदारी महज यात्रियों की उचित पहचान करना है। जबकि उनके सामानों की जांच CISF के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है।

साक्षी टीवी से बातचीत के क्रम में सीवी आनंद ने अपनी बात को दोहराया कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की जिम्मेदारी यात्रियों की पहचान तक ही सीमित है।

आरपी ठाकुर और सीवी आनंद के बयानों से ऐसा लगता है कि दोनों ही उच्चाधिकारी इस गंभीर घटना पर बेफिक्र हैं। दोंनों एजेंसियों ने पहले ही मन बना रखा है कि गेंद एक दूसरे के पाले में डालकर मामले को हल्का किया जाय। जबकि इस गंभीर घटना को आंध्र प्रदेश की जनता कतई हल्के में नहीं ले रही है।

YS जगन मोहन पर हमले को लेकर न्यायिक जांच की मांग की जाने लगी है। अगर सही तरीके से जांच हो तो इस घटना के पीछे सियासी रंजिश की बू आती है। आरोपी हमलावर जिस रेस्टोरेंट में कर्मचारी है, उसके मालिक का संबंध तेलुगू देशम पार्टी से रहा है। ऐसे में कड़ियों को जोड़ा जाय तो इस जानलेवा हमले के पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।

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घटना के बारे में बता दें जब विशाखापट्टनम एयरपोर्ट के वीआईपी लाउंज में वाई एस जगन मोहन रेड्डी बैठे थे। उसी वक्त एयरपोर्ट के ही रेस्टोरेंट में काम करने वाले वेटर श्रीनिवास ने वाई एस जगन के पास आकर उनके साथ सेल्फी लेने की गुजारिश की। वाई एस जगन मोहन अपनी कुर्सी से उठे ही थे की आरोपी श्रीनिवास ने हमला कर दिया। उसके पास से नुकीला हथियार बरामद हुआ है।

सवाल ये उठता है कि श्रीनिवास कैसे वीआईपी लाउंज के पास घातक नुकीली सामग्री लेकर घूम रहा था। क्या सुरक्षाकर्मियों ने उसकी अनदेखी की या फिर किसी साजिश के तहत श्रीनिवास को वीआईपी लाउंज तक पहुंच की छूट दिलाई गई। ये सब कुछ शीशे की तरह साफ होगा अगर निष्पक्ष जांच कराई जाय।