तेलंगाना में 'मिनी कश्मीर', जहां के सेब की कहानी है अनूठी

कोमरम भीम आसिफाबाद: माना जाता है कि सेब कश्मीर या फिर हमाचल प्रदेश से ही आते हैं। देश का बाकी हिस्सा जलवायु के लिहाज से सेब की उपज के लिए मुफीद नहीं मानी जाती है। इस मिथक को गलत साबित किया है तेलंगाना के आसिफाबाद के बालाजी ने। 37 साव के बालाजी पुश्तैनी किसान नहीं हैं। बावजूद इसके इनके दिमाग में खयाल आया कि जब हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य में 40 डिग्री तापमान में सेब उगाये जा सकते हैं तो फिर तेलंगाना में क्यों नहीं?

धनोरा गांव के बालाजी ने चार साल पहले सेब उगाने का विचार गांव के अपने दोस्तों से साझा किया तो सबने उनका मजाक उड़ाया। 37 साल के बालाजी इससे हतोत्साहित नहीं हुए और तीन एकड़ की जमीन में उन्होंने सेब उगाने का फैसला किया। सबसे पहले 50 पौधों का ऑर्डर किया और जतन के साथ उसकी सेवा करने लगे। आज चार साल बाद उनकी मेहनत रंग लाई है और साल 2020 में उन्हें सेब की पहली फसल मिली है। बालाजी बेहद उत्साहित हैं, उन्हीं की बदौलत आज उनके गांव को लोग मिनी कश्मीर तक कहने लगे हैं। यहां तक कि वन एवं पर्यावरण मंत्री इंद्रकरन रेड्डी ने बालाजी के गांव का दौरा किया और सेब की खेती के बारे में जानकारी ली। इस दौरान मंत्री ने बालाजी की भूरि भूरि प्रशंसा की।

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