वीडियो सौजन्य: दूरदर्शन

लखनऊ: आपको जानकर हैरानी होगी कि हर दिन हमारे मन में 50 से 60 हजार नकारात्मक खयाल आते हैं। बन कभी आपकी पिछली जंदगी में भटकता है। तो कभी आने वाले भविष्य को लेकर खयाली पुलाव बनाता है। जबकि वर्तमान में उसे बांधे रखना बेहद मुश्किल होता है।

भारतीय रेलवे में उच्चाधिकारी रवि वल्लूरी की बातचीत में आपको कई टिप्स मिलेंगे। इस वीडियो के जरिए आप मन को बांधने या फिर इसे नियंत्रित रखने के गुर से परिचित होंगे।

रवि वल्लूरी बताते हैं कि भारतीय योग क्रिया के जरिए मन पर हम काबू पा सकते हैं। योग, ध्यान, प्रणायाम के जरिए मन को साधा जा सकता है। चंचल मन को बस में करने का ये तरीका काफी पुराना है। जिस पर पौराणिक महर्षियों में शुमार पतंजलि के अलावा गौतम बुद्ध और आधुनिक काल के संत आदि शंकराचार्य ने काफी शोध किया था।

वर्तमान में आध्यात्म गुरु श्रीश्री रविशंकर सुदर्शन क्रिया के जरिए हजारों लोगों को नई राह दिखा चुके हैं। योग और सुदर्शन क्रिया के जरिए व्यसनों से भी मुक्ति मिल सकती है। बुरी लत का मतलब महज शराब और सिगरेट का ही आदी होना नहीं है। बल्कि अपने जीवन में किसी भी चीज के लिए आसक्ति व्यसन ही है।

रवि वल्लूरी बताते हैं कि आज की जेनरेशन SMAC है? मतलब युवा पीढ़ी पूरी तरह सॉफ्टवेयर, मोबाइल, एप्स और क्लाउड के चक्कर में फंसी हुई है। इससे भी बाहर निकलने में यौगिक क्रिया मददगार साबित हो सकती है।

साभार: दूरदर्शन

रवि वल्लूरी के मुताबिक हमारा मन आम जीवन में तनावों से घिरा हुआ है। जिससे निजात पाने के लिए योग का सहारा लिया जा सकता है।

वल्लूरी खुद के अनुभवों से बताते हैं कि युवावस्था में वे भी नशे की गिरफ्त में आ गए थे। करीब 15 सालों के व्यसन और उस तनाव के अनुभवों को रवि वल्लूरी ने साझा किया। रवि वल्लूरी बेबाकी से बताते हैं कि किस तरह उन्होंने अपना जीवन परिवर्तित किया। उनके सुझावों से जुड़कर कोई भी अपने जीवन में आमूल चूल परिवर्तन ला सकता है।