हैदराबाद: 'सिक्कों के सम्राट' कहें या फिर शहंशाह, लोग मानते हैं मनीष धमेजा दुनिया के सबसे धनी आदमी है। जिनके पास वो दौलत है जिसे वो खर्च तो नहीं कर सकते। लेकिन उसकी बदौलत दुनिया को उनके अतीत से रूबरू करवा सकते हैं। जी हां, मनीष धमेजा के पास देश विदेश के एक लाख से अधिक पुराने सिक्के हैं, जिनका ऐतिहासिक महत्व है। मनीष के सबसे बड़े कलेक्शन को 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' ने भी मान्यता दी है।

मनीष को उनके काम के लिए 'मिलेनियर्स ऑफ क्वाइंस' का खिताब मिला है। मनीष के लिए पुराने सिक्कों का कलेक्शन इतना आसान नहीं था। पुश्तैनी तौर पर उनके हाथ घर में ही कुछ नायाब सिक्के मिले। जिसने उनके शौक को परवान दिया। फिर क्या था। मनीष ने देश दुनिया की खाक छानी और दुनियाभर के करीब पांच सौ जगहों से एक लाख के करीब सिक्के इकट्ठा किये। बातचीत के दौरान मनीष ने बताया कि उनके पास अकबर के समय का खास सोने का सिक्का मौजूद है। इसके अलावा ज्यादातर सिक्के 18वीं शताब्दी से 21वीं शताब्दी के बीच के हैं। मनीष के कलेक्शन में सबसे अधिक सिक्के भारत के हैं, जिन्हें देखने पर यहां कि सांस्कृतिक विविधता का पता चलता है।

मूल रूप से यूपी के बहराइच के रहने वाले मनीष फिलहाल केंद्र सरकार के टेली कम्यूनिकेशन्स डिपार्टमेंट में कार्यरत हैं और हैदराबाद में पदस्थापित हैं। दफ्तर के काम के बाद मनीष अपना ज्यादातर ध्यान सिक्कों के कलेक्शन और इससे जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने में देते हैं। सिक्कों के कलेक्शन में मनीष ने अपनी निजी आमदनी का करीब पचास लाख रुपया खर्च किया है। अब उनकी इच्छा है कि सरकार अगर सहयोग करे तो इसे 3D संग्रहालय का रूप दिया जा सके।

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अपने शौक से गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गए सुधाकर

बातचीत के दौरान मनीष ने उत्साह के साथ अपना अलबम दिखाया जिसमें उनके सामाजिक कार्यों के साथ ही उनकी प्रतिभा के कई आयाम का पता चलता है। मनीष के नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अलावा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में तीन कीर्तिमान दर्ज हैं। राजीव गांधी एक्सेलेंस अवॉर्ड सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति के करीब दो दर्जन सम्मान मनीष धमेजा के नाम है।

मनीष का इरादा अपने नायाब कलेक्शन के लिए भारत में एक थ्री डी संग्रहालय खोलने का है। जिसके लिए उन्होंने केंद्र सहित विभिन्न राज्य सरकारों से भी संपर्क किया है। मनीष की इच्छा है कि अगर राज्य सरकार सहयोग करती है तो वे हैदराबाद इस तरह का अनूठा संग्रहालय खोल सकते हैं।

मनीष को संग्रहालय के लिए अरब देशों से ऑफर मिल रहे हैं। हालांकि विदेशों से मिले ऑफर को मनीष ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका इरादा भारत में ही इस पूंजी को बनाए रखने का है। अब देखना है कि मनीष की मेहनत को सरकार किस हद तक प्रोत्साहन देती है।