हैदराबाद: बेटी के वर्ल्ड चैम्पियन बनने पर पीवी सिंधु के पिता पीवी रमना के चहरे का तेज देखते बन रहा था। हैदराबाद स्थित उनके घर पर जब 'साक्षी समाचार' की टीम पहुंची। तो वहां बधाई देने वालों का वहां तांता लगा था।

पीवी सिंधु ने खुले मन से बताया कि विश्व विजेता बनने में जितनी मेहनत उन्होंने की, उससे कमतर उनके पिता और परिवार का योगदान नहीं है। आप समझ सकते हैं कि पीवी रमना का सीना उस वक्त गर्व से चौड़ा हो गया होगा। सरताज बनने पर बेटी को देशभर से बधाइयां मिल रही थी। वो मौका एक पिता के लिए कितना सुखद होगा, इसका अंदाजा कोई भी लगा सकता है।

पीवी रमना से हमने कुछ वक्त निकालने का आग्रह किया, तो वे सहज ही मान गए। हमने सबसे पहले उनसे सामान्य प्रतिक्रिया पूछी, जिसका उन्होंने रुटीन उत्तर दिया कि बेटी की सफलता पर बहुत खुश हैं।

बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए जब हमने एक जिम्मेदार पिता और सफल बेटी का जिक्र किया तो उनके चेहरे पर चमक देखने को मिली। उन्होंने बड़ी सहजता से कहा कि बेटी को बुलंदियों पर पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी का काम है। शारीरिक, आर्थिक के साथ ही भावनात्मक तौर पर भी लाडली का पूरा खयाल रखना पड़ता है। खुद का अनुभव उन्होंने साझा करते हुए बताया कि जब सिंधु छोटी थीं तो वे सुबह सवेरे तीन बजे ही उठ जाया करते थे। फिर तकरीबन 60 किलोमीटर गाड़ी खुद ड्राइव करके बेटी को बैडमिंटन एकेडमी में प्रैक्टिस के लिए ले जाया करते थे।़

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हमने सीधा सपाट सवाल किया कि आज हर पिता अपनी बेटी को पीवी सिंधु बनाना चाहता है। ऐसे लोगों को क्या सलाह देंगे आप। इस पर पीवी रमना ने बड़ी जिम्मेदारी से कहा कि अपनी बेटियों पर दबाव कतई न डालें। अगर वाकई उसमें स्पोर्ट्समैन का दम है तो जरूर सपोर्ट करें, लेकिन जबरन सिंधु बनाने की कोशिश कतई न करें।

बातचीत के दौरान साफ लगा कि सिंधु का समर्पण और उनकी सफलता पीवी रमना को उत्साहित करता है। कड़े अभ्यास के साथ ही सुदृढ़ दिनचर्या पर कभी कभी सख्त पिता बनकर उन्हें नजर भी रखनी होती थी। हालांकि पीवी रमना मानते हैं कि अब बेटी सयानी हो चुकी है। अपार सफलताओं के साथ पीवी सिंधु को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास है। अब पिता के नाते उन्हें बेटी को टोकाटाकी नहीं करनी पड़ती है।

सिंधु की दिनचर्या जानकर कई लोग तो दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। कई महीनों तक मोबाइल फोन को हाथ न लगाना। चटपटा स्वाद तो सिंधु लगभग भूल ही चुकी हैं। घंटों जिम में वर्कआउट करते समय भी खुद को संयमित रखना। बेटी के साथ ही पूरा परिवार अनुशासन में नजर आता है। खुद स्पोर्ट्समैन रह चुके पीवी रमना के लिए बेटी का वर्ल्ड चैम्पियन बनना जग जीतने के बराबर है।