अमरावती: आंध्र प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री राहत कोष में बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आ रही है। दरअसल मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत इलाज के लिए गरीबों को राशि मुहैया कराने का प्रावधान है। जिसके तहत इलाज के लिए करीब 100 अस्पताल नामित हैं। जबकि देखा जाय तो ये राशि महज पांच अस्पतालों को ही जारी की जाती है। इस बारे में सीधे तौर पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कार्यालय की संलिप्तता की बात कही जा रही है।

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ओवैसी के मुताबिक चंद्रबाबू नायडू की ये है औकात

विजयवाड़ा का आंध्रा अस्पताल , शाईन अस्पताल मणिपाल हॉस्पिटल....गुंटूर नरसारावपेट का जीवीआर...ओंगोल का संघमित्रा अस्पताल, हैदराबाद का मैक्सिकॉन अस्पताल और अपोलो हॉस्पिटल को गरीबों के इलाज के नाम पर लाखों की राशि हर माह आवंटित होती है। शासनादेश के तहत इन अस्पतालों को नाजायज फायदा दिलाया जा रहा है। अगस्त महीने में जीवीआर अस्पताल के लिए 31 लाख रुपए,,,दो आंध्रा अस्पतालों को 42 लाख रुपए.ओंगोल के संघमित्रा अस्पताल को 95 लाख रुपये मंजूर किये गये। जबकि बाकी के चिह्नित अस्पतालों में इलाज के लिए लोगों को रेफर ही नहीं किया जाता है।