नरेंद्र मोदी की सरकार भारतीय रेलवे को लेकर तमाम तरह के प्रयोग कर रही है। अच्छी सुविधा के नाम पर कहीं शानदार ट्रेनों की सौगात दे रही है तो कहीं पीपीपी मोड में रेल के फायदे का सपना दिखा रही है। इसको लेकर तमाम तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं और माना जा रहा है कि यह भारतीय रेल के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसी मामले पर लेकर साक्षी समाचार के असिस्टेंट न्यूज एडिटर विजय कुमार तिवारी ने रेल यूनियन के नेता के. सुवाकुमार से बातचीत की। बातचीत के पहले अंश में आप जानेंगे कि सरकार की क्या मंशा है और भारतीय रेल का भविष्य कैसा है...

भारतीय रेल की तमाम उपलब्धियां हैं, जिन्हें पहले नेता गिनाते हुए नहीं थकते थे। पर अब जब रेल को निजी हाथों में देने का मन बना लिया गया है तो अलग तरह के तर्क दिए जा रहे हैं...
रेल के धीरे धीरे बढ़ते निजीकरण से हवाई यात्रा की तरह अब रेल यात्रा भी केवल अमीरों के लिए रह जाएगी। यहां पर सुविधा के नाम पर मनमाना काम होगा और रेल का किराया भी मनमाने तरीके से बढ़ाया जाता रहेगा....