तेलुगू राज्यों में भोगी महोत्सव की परंपरा रही है। दरअसल भोगी मोहत्सव के दौरान पुराने सामानों को जलाने की परंपरा है। इसी परंपरा के अनुसार लोगों ने पुराने सामान जलाए.. मकर संक्रांति और पोंगल के एक दिन पहले भोगी मनाने की परंपरा है। घर में लोग नई चीजें लाते हैं। जबकि पुराने कबाड़ को भोगी की आग में झोंक दिया जाता है। ये त्यौहार जीवन में नयेपन की ओर इशारा करता है। लोग इस दौरान भोगी मंटलु के चारों तरफ घूम-घूमकर नाचते गाते हैं।