वित्त मंत्री के हाथ में क्यों होता है यह ‘बैग’, जानिए बजट और ‘ब्रीफकेस’ की दिलचस्प कहानी

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नई दिल्ली : आम बजट 2019 शुक्रवार को पेश होने जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांच तारीख को भले ही पहली बार बजट पेश करेंगी, लेकिन उनके हाथों में वैसा ही 'ब्रीफकेस' होगा, जो अब तक तमाम वित्त मंत्री के हाथों में आपने देखा होगा। आखिर वित्त मंत्री बजट वाले दिन 'ब्रीफकेस' के साथ ही संसद भवन क्यों पहुंचते हैं। आइए जानते हैं बजट और 'ब्रीफकेस' की दिलचस्प कहानी।

वित्त मंत्री जब भी बजट पेश करने के लिए संसद भवन पहुंचते हैं तो उनके हाथ में 'ब्रीफकेस' होता है। लोगों में यह जानने की उत्सुकता बनी रहती है कि आखिर 'ब्रीफकेस' वित्त मंत्री ही क्यों साथ लाते हैं। दरअसल यह एक पुरानी परंपरा है, जो अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही है। आज भी उसका पालन किया जा रहा है।

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कैसे हुई शुरुआत?

भारत में संसदीय तौर पर कई ऐसी परंपरा चली आ रही है, जो अंग्रेजों की देन है या उनके समय से चली आ रही है। साल 1733 में जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री रॉबर्ट वॉलपोल संसद में साल का लेखाजोखा पेश करने आए, तो अपना भाषण और उससे संबद्ध दस्तावेज चमड़े के एक बैग (थैले) में रखकर लाए।

दरअसल बजट शब्द लैटिन शब्द बुल्गा से लिया गया है। बुल्गा का अर्थ है चमड़े का थैला। इसी से बाद में फ्रांसीसी शब्द बोऊगेट बना। इसके बाद अस्तित्व में आया अंग्रेजी शब्द बोगेट या बोजेट, फिर यही शब्द बजट बना। जिसे अब प्रयोग किया जा रहा है। इसलिए आज भी सांकेतिक तौर बजट को 'ब्रीफकेस' में लाया जाता है।

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'ब्रीफकेस' के अलग-अलग रंग

बजट के इतिहास में चमड़े के एक बैग से 'ब्रीफकेस' तक यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है। हालांकि इस दौरान 'ब्रीफकेस' के रंग में परिवर्तन जरूर हुआ है। कई बार 'ब्रीफकेस' का रंग बदला है। जवाहरलाल नेहरू, यशवंत सिन्हा और मनमोहन सिंह काले रंग का 'ब्रीफकेस' लेकर संसद पहुंचे थे। वहीं प्रणब मुखर्जी और अरुण जेटली के हाथों में भूरा और लाल रंग के 'ब्रीफकेस' नजर आए थे।

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