Interim Budget 2019: ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ लागू करने का रिस्क लेगी सरकार?

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नई दिल्ली : केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बजट में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की दिशा में पहल की उम्मीद की जा रही है। जिसके तहत देश के 25 फीसदी गरीब परिवारों के हर सदस्य को सरकार न्यूनतम आमदनी प्रदान कर सकती है।

इस महत्वाकांक्षी योजना को सरकार यदि लागू करती है तो खजाने पर लगभग 7 लाख करोड़ का बोझ बढ़ेगा। आर्थिक सर्वे पर सरकार ने न्यूनतम आय पर आंकड़े भी जारी कर चुकी है।

दरअसल यूनिवर्सल बेसिक इनकम आज के दिनों में हॉट विषयों में शुमार है। यहां तक मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी वादा किया है कि वो अगर सरकार में आएगी तो देश में यूनिवर्सल बेसिक इनकम को लागू किया जाएगा।

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क्या है यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI)

यूनिवर्सल बेसिक इनकम के तहत गरीब तबके के लोगों को सरकार की तरफ से निर्धारित धनराशि दी जाती है। बता दें कि सरकार सब्सिडी के नाम पर कई तरीके का व्यय करती है। ऐसे में न्यूनतम नकद धनराशि सरकार के खजाने में बड़ा बोझ साबित हो सकता है।

2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि देश की सबसे अधिक गरीब 25 फीसदी आबादी को सालाना 7,620 न्यूनतम धनराशि सरकार की तरफ से दी जा सकती है। नकद सहायता मुहैया कराने के साथ ही सरकार को कई अन्य सब्सिडी योजनाओं को रोलबैक करना होगा।

इस तरह होगी लाभार्थियों की पहचान

यूनिवर्सल बेसिक इनकम को लागू करने में सबसे बड़ी समस्या होगी लाभार्थियों की पहचान करने की। आर्थिक सर्वेक्षण में कई सारे सुझाव दिए गए हैं जिसके मुताबिक लाभार्थियों की डाटा लिस्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। ताकि इस योजना का गलत फायदा लोग न उठा सकें। यह भी सुझाव है कि खास स्तर के ऊपर एसी, कार या बैंक बैलेंस वालों को इस योजना के दायरे में नहीं रखना चाहिए।

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