पाकिस्तान के इस मंदिर में भव्य रूप से मनती है महाशिवरात्रि, शिव के आंसू से बना है कुंड

डिजाइन फोटो  - Sakshi Samachar

महाशिवरात्रि के पर्व की धूमधाम साफ देखी जा सकती है। मंदिरों को जहां भव्य रूप से सजाया गया है वहीं भक्तजन भी पूजा से जुड़ी तैयारियों को निपटाने में लगे हैं जिससे कि पूजा के समय कोई कमी न रह जाए।

इस बार महाशिवरात्रि का पर्व 21 फरवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन न सिर्फ भोलेनाथ की विशेष पूजा होती है बल्कि व्रत रखकर रात्रि भी किया जाता है। जहां भारत भर में महाशिवरात्रि की धूम है वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी भगवान शिव के कई प्रसिद्ध मंदिरों को पर्व के लिए खोला गया है।

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कटासराज मंदिर में महाशिवरात्रि की धूम

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चकवाल जिले में स्थित भगवान शिव के कटासराज मंदिर में भी शिवरात्रि पर्व के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत से भी बड़ी संख्या में भक्तजन इस मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

करीब 900 साल पुराना भगवान शिव का कटासराज मंदिर लाहौर से 280 किमी दूर पहाड़ी पर बना है। ये मंदिर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चकवाल जिले में है। ये चकवाल से लगभग 40 कि.मी. की दूरी पर कटस नामक स्थान में एक पहाड़ी पर है। इस स्थान से जुड़ी कई मान्यताएं हैं, इसलिए ये हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

एक मान्यता के अनुसार देवी जब सती हुईं थी तब भगवान शिव की आंखों से आंसू निकले थे। उनसे ही यहां पर कुंड का निर्माण हुआ। ये कुंड 150 फीट लंबा और 90 फीट चौड़ा है।

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कटासराज मंदिर का पौराणिक महत्व

पाकिस्तान के प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक है कटासराज मंदिर जो एक पौराणिक और ऐतिहासिक जगह है। कहते हैं कि यहीं यक्ष-युद्धिष्ठिर संवाद हुआ था, यहीं देवी सती की अग्नि समाधि के बाद भगवान शिव के आंसू गिरे थे।

कहते हैं कि यहां पर सिखों के गुरु नानकदेव और नाथ सम्प्रदाय के संस्थापक गोरखनाथ भी आए थे। मान्यता हैं कि पौराणिक काल में भगवान शिव जब सती की अग्नि-समाधि से काफी दुखी हुए थे तो उनके आंसू दो जगह गिरे थे। एक से कटासराज सरोवर का निर्माण हुआ तो दूसरे से पुष्कर का।

कटासराज शब्द की उत्पत्ति 'कटाक्ष' से मानी जाती है जो सती के पिता दक्ष प्रजापति ने शिव को लेकर किए थे। इस वजह से हिंदुओं में इस जगह की खासी प्रतिष्ठा है।

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ऐसी मान्यता है महाभारत काल में प्रसिद्ध यक्ष-युधिष्ठिर संवाद भी यहीं हुआ था और युधिष्ठिर ने यहां की सुंदरता की काफी तारीफ की थी।

महाभारत में इसे द्वैतवन कहा गया है जो सरस्वती नदी के तट पर स्थित था। उस हिसाब से सरस्वती नदी पर शोध करनेवालों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण जगह है।

कटासराज पाकिस्तान के जिस साल्ट रेंज पहाडियों के पास है वहां का सेंधा नमक आज भी हिंदुओं के लिए पवित्र है।

पाकिस्तान सरकार ने हाल में कटासराज मंदिर के जीर्णोद्धार और उसे यूनेस्को विरासत सूची में लाने के प्रयास किए। भारत से शिवरात्रि के मौके पर जानेवाले शिवभक्तों की संख्या भी बढ़ी है लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और अतिक्रमण हटाने का काम धीमा है।

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वहीं एक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड के एडिशनल सेक्रेटरी फराज अब्बास ने बताया कि हिंदुस्तान से आने वाले हिंदू भाईचारे के लिए हर तरह की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत सरोवर इसके व आसपास साफ-सफाई का काम शुरू किया गया है। उनका कहना है कि दूसरी जगहों के मंदिरों के लिए भी उनकी सरकार खास बंदोबस्त कर रही है।

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