करवा चौथ का पर्व आ गया है जिसका इंतजार सुहागिन महिलाएं बेसब्री से करती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ की शाम में चौथ माता और गणेशजी की पूजा करती हैं और फिर रात में चंद्रमा के दर्शन करके, अर्घ्य देकर पति के हाथों पानी पीकर व्रत तोड़ा जाता है।

करवा चौथ के व्रत में चौथ माता की पूजा का विशेष महत्व है। चौथ माता भगवान शिव की पत्नी पार्वती का ही रूप है जिसकी इस दिन पूजा की जाती है।

जब बात चौथ माता की पूजा का आता है तो जाहिर है कि इस दिन चौथ माता के मंदिर में दर्शन करने का भी विशेष महत्व होता है। यही वह दिन होता है जब चौथ माता के मंदिर में सुहागिनों का मेला सा लग जाता है और हर महिला चाहती है कि वह चौथ माता के दर्शन करके धन्य हो जाए।

जानकारी के लिए बता दें कि चौथ माता का मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर के पहाड़ की एक चोटी पर स्थित है जिसकी स्थापना 1451 ईसवी में राजा भीम ने की थी। चौथ माता मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है।

ऊंची पहाड़ी पर स्थित है चौथ माता का मंदिर 
ऊंची पहाड़ी पर स्थित है चौथ माता का मंदिर 

भक्तगण करवा चौथ के दिन 700 सीढ़ियां चढ़कर चौथ माता के इस मंदिर में उनके दर्शन के लिए आते हैं।1463 में मंदिर मार्ग पर बिजली की छतरी और तालाब का निर्माण कराया गया। इस मंदिर में दर्शन के लिए राजस्थान से ही नहीं अन्य राज्यों से भी लाखों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं।

नवरात्र के दौरान यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व है। करीब एक हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान चौथ माता जन-जन की आस्था का केन्द्र है।

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करवा चौथ पर लगता है मेला

चौथ माता के माधोपुर के मंदिर में करवा चौथ के दिन मेला लगता है जिसमें हर साल लाखों भक्तगण आते हैं। चौथ माता को करवा चौथ वाले दिन सुंदर दुल्हन की भांति तैयार किया जाता है।

कहा जाता है कि जो सुहागिन इस दिन माता के दर्शन कर लेती है उसे अपने वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए वरदान प्राप्त होता है। उसका दांपत्य जीवन बड़ी खुशहाली से बीतता है।

चौथ माता के किये जाते हैं दर्शन 
चौथ माता के किये जाते हैं दर्शन 

भगवान गणेश और भैरवनाथ का मंदिर

चौथ माता के मंदिर की ऊंचाई जमीन से 1100 फीट है और इस मंदिर में कुल 700 सीढ़ियां है जिनको पार करके भक्त माता चौथ के दर्शन कर पाते हैं। इस मंदिर में भगवान गणेश और भैरवनाथ की मूर्ति भी विद्यमान है।

राजपूतों की शैली और संगमरमर के पत्थर से बने चौथ माता के इस मंदिर को देखने के लिए यहां साल भर भीड़ बनी रहती है। करीब 566 साल पुराने इस मंदिर की वास्तुकला देखने वाले के मन को मोह लेती है।

यहां के स्थानीय लोगों की मानें तो उनके लिए किसी भी काम की शुरूआत चौथ माता की पूजा के बाद ही होती है। ऐसा करने से शुभ कार्यों में बाधाएं नहीं आती है ।

बूंदी राजघराने के लोग आज भी चौथ माता को कुलदेवी के रूप में पूजते हैं और देवी चौथ से अपने घरों की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

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वहां के स्थानीय लागों की मानें तो चौथ माता के मंदिर में सालों से एक अखंड ज्योत जल रही है और करवा चौथ वाले दिन इस ज्योति की चमक और भी बढ़ जाती है ।

माता को देते हैं शुभ काम का पहला निमंत्रण

हाड़ौती क्षेत्र के लोग हर शुभ कार्य से पहले चौथ माता को निमंत्रण देते हैं। प्रगाढ़ आस्था के कारण बूंदी राजघराने के समय से ही इसे कुल देवी के रूप में पूजा जाता है।

माता के नाम पर कोटा में चौथ माता बाजार भी है। कोई संतान प्राप्ति तो कोई सुख-समृद्धि की कामना लेकर चौथ माता के दर्शन को आता है। मान्यता है कि माता सभी की इच्छा पूरी करती हैं।

करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं चौथ माता से अपने सुहाग की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं। माना जाता है कि इनकी पूजा करने से अखंड सौभाग्य का वरदान तो मिलता ही है साथ ही दाम्पत्य जीवन में भी सुख बढ़ता है।