आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिला स्थित सुप्रसिद्ध अहोबिलम मंदिर नंद्याल से 66 KM, कर्नूल से 137 KM, कड़पा से 114 KM, विजयवाड़ा से 348 KM, हैदराबाद से 350 KM और बेंगलुरु से 407 KM की दूरी पर है। अहोबिलम भगवान नरिस्महा स्वामी का सुप्रसिद्ध मंदिर है और यहां भगवान विष्णु नर यानी मनुष्य और सिम्हा के रूप में स्थित हैं।

पुराणों के मुताबिक अहोबिलम वही स्थान है जहां भगवान नरसिम्हा ने हिरण्यकश्प का वध कर प्रह्लाद को बचाया था। हालांकि 8वीं शताब्दी में शुरूआती मंदिरों का निर्माण चालुक्याओं ने किया था और मौजूदा अधिकांश मंदिरों का पुननिर्माण 15वी शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने करवाया था।

एक लंबा पहाड़ (नीचे चित्र देखें) है जिसे माना जाता है की भगवान नरसिंह इसी से उभरे। यह पहाड़ रूपी स्तम्भ हिरण्यकशिपु के शाही महल का स्तंभ माना जाता है। इस मंदिर में भगवान को 9 अलग-अलग रूपों की पूजा जाता है वास्तविक रूप से मंदिर एक गुफा संरचना है। इसलिए, मंदिरों में से कुछ को एक चट्टानी इलाके के द्वारा पहुँचा जा सकता है।

पहाड़ पर गुफा के रूप में बना अहोबिलम मंदिर
पहाड़ पर गुफा के रूप में बना अहोबिलम मंदिर

नल्लामला के घने जंगलों में स्थित अहोबिलम 108 दिव्य देसमों से एक है। अहोबिलम मुख्य मंदिर के पांच किलो मीटर के दायरे में 9 अलग-अलग मुद्राओं में भगवान नरसिम्हा स्वामी पूजे जाने के कारण इस स्थल को नवा नरसिम्हा क्षेत्र भी जाता है। अहोबिलम स्थित मुख्य मंदिर के अलावा ज्वाला नरसिम्हा, अहोबिला नरसिम्हा, मलोला नरसिम्हा, क्रोधा नरसिम्हा, कारंजा नरसिम्हा, भार्गव नरसिम्हा, योगानंद नरसिम्हा, छत्रवाता नरसिम्हा और पावन नरसिम्हा के रूप में पूजा जाता है।

यहाँ भगवान उनकी सहचरी लक्ष्मी के साथ है जिन्हे संजुलक्ष्मी बुलाया जाता है इनमें से कुछ मंदिरों को आसानी से पहुंचा जा सकता है, जबकि कुछ तक पहुंचने में आपको कठिन जंगलों में पैदल या ट्रेकिंग करके जाना पड़ेगा।

पहाड़ों के बीच बने इस मंदिर के बगल में बहता झरना
पहाड़ों के बीच बने इस मंदिर के बगल में बहता झरना

अहोबिलम मुख्य रूप से दो हिस्सों में बंटा है। निचला अहोबिलम और ऊपरी अहोबिलम। मुख्य मंदिर के पांच किलो मीटर के दायरे में फैले अन्य नौ मंदिरों में योगानंद, छत्रवता और भार्गव नरसिम्हा स्वामी जहां निचले अहोबिलम में हैं, वहीं बाकी छह मंदिर ऊपरी अहोबिलम में है। निचले अहोबिलम में भगवान नरसिम्हा स्वामी का एक और मंदिर है और बताया जाता है कि यहां की मूर्ति की स्थापना तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने की थी।

अहोबिलम एक छोटा शहर है और यहां के छोटे होटल और कैंटीनों की व्यवस्था है। ऊपरी अहोबिलम में ब्राह्मण नित्या अन्नदान सत्रम हैं, जहां प्रति दिन करीब 400 भक्तों को अन्नदान किया जाता है। इसके अलावा यहां श्री अहोबिलम मठम ने एक ट्रस्ट बनाया है जिसका नाम अन्नमाचार्य नित्य अन्नदान ट्रस्ट है। यहां प्रतिवर्ष फरवरी से मार्च के मध्य तक ब्रह्मोत्सवम का आयोजन किया जाता है। गाइड की मदद से दो दिन में यहां के सभी 9 मंदिरों के दर्शन किया जा सकता है।

मंदिर के भीतर का दृश्य
मंदिर के भीतर का दृश्य

अहोबिलम से सबसे करीब हैदराबाद एयरपोर्ट है जो करीब 333 किलो मीटर की दूरी पर है। नंद्याल रेलवे स्टेशन सबसे करीब का रेलवे स्टेशन है जो यहां से 66 किलो मीटर की दूरी पर है। नंद्याल देश के बड़े शहरों हावड़ा, हैदराबाद, बेंगलुरु, गोवा, मछलीपटनम, विजयवाड़ा, हुबली, पुरी, विशाखापटनम, भुवनेश्वर आदि से कनेक्टेड है।

अहोबिलम के लिए वहां से 25 किलो मीटर की दूरी पर स्थित आल्लागड्डा टाउन से बस की सुविधा है। आल्लागड्डा से चित्तूर, नंद्याल, कडपा, हैदराबाद, तिरुपति, नेल्लोर, चेन्नई और कर्नूल से राज्य परिवहन की बसें चलती हैं।

योगानंद नरसिम्हा स्वामी मंदिर
योगानंद नरसिम्हा स्वामी मंदिर

अहोबिलम जाने के लिए अक्टूबर से मार्च तक बहुत अच्छा मौसम होता है और फरवरी से मई के बीच यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है। आमतौर पर अहोबिलम घूमने के लिए एक दिन का समय लगता है।

मंदिर का समय

निचला अहोबिलम सुबह-6 से दोपहर 2.30 बजे तक, शाम 5 से रात्रि 8 बजे तक

अन्य मंदिर : सुबह 6 से दोपहर 1 बजे तक, दोपहर 3 बजे से शाम 5.30 बजे तक