सावन के महीने में देशभर के शिवमंदिरों में शिवभक्तों की भारी भीड़ होती है। बारह ज्योतिर्लिंगों के अलावा प्रमुख शैव मंदिरों में सावन का उत्सव देखने को मिलता है। तेलंगाना राज्य के करीमनगर जिले में स्थित वेमुलवाड़ा स्थित राज राजेश्वरी मंदिर दक्षिण भारत के काशी के नाम से प्रसिद्ध है।

इस मंदिर में शिवरात्रि और सावन के महीने में विशेष पूजा होती है। इस बार भी सावन के महीने में वेमुलवाड़ा के राजराजेश्वरी मंदिर को हजारों की संख्या में पहुंच रहे भक्त भगवान भोलेनाथ का दर्शन कर रहे हैं।

मंदिर में मौजूद धर्मकुंड
मंदिर में मौजूद धर्मकुंड

कहां स्थित है वेमुलवाड़ा

वेमुलवाड़ा तेलंगाना के प्रमुख तीर्थस्थानों में से एक है। राज्य की राजधानी हैदराबाद से करीब 160 किलो मीटर की दूरी पर स्थित करीमनगर जिले से 36 किलो मीटर की दूरी पर स्थित वेमुलवाड़ा राजराजेश्वर स्वामी पौराणिक और ऐतिहासिक दृष्टि से काफी खास है।

मंदिर की पौराणिक कथा

भास्कर क्षेत्र और हरिहरा क्षेत्र के नाम से प्रचलित इस क्षेत्र का जिक्र भविष्योत्तर पुराण के राजेश्वर खंड में आता है। अर्जुन के परपोते नरेंद्र एक ऋषि की हत्या करने के कारण लगे भगवान ब्रह्मा के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भटकते हुए यहां पहुंचे थे। यहां के धर्मकुंड में स्नान करने के बाद जाप कर रहे नरेंद्र को एक कुंड से शिवलिंग मिला। कुंड के पास शिवलिंग को स्थापित कर उसकी पूजा करने वाले नरेंद्र को भगवान शिव ने प्रत्यक्ष दर्शन देकर उसे श्राप मुक्त किया।

श्री राजराजेश्वर स्वामी मंदिर में शिवरात्रि पर तीन लाख से अधिक श्रद्धालु राजराजेश्वर स्वामी के दर्शन करते हैं। उस दिन विशेष पूजा होती है। 100 अर्चकों से महालिंगार्चन किया जाता है। देर रात शिव का एकादश रुद्राभिषेक किया जाता है।

धर्मकुंड में तीर्थस्नान करते शिवभक्त
धर्मकुंड में तीर्थस्नान करते शिवभक्त

भक्तों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थियों को मुफ्त आवास और भोजन की सुविधा होती है। राज्य में अत्यधिक आय वाले मंदिरों में से यह एक है।

ग्राम विकास के लिए यह मंदिर सालाना 8 लाख रुपए खर्च करता है। पुराण के मुताबिक काशी, चिदंबरम, श्रीशैलम, केदारेश्वर के बाद भगवान शिव वेमुलवाड़ा पहुंचे थे। श्री राजराजेश्वर स्वामी मंदिर में सीताराम चंद्रस्वामी, अनंत पद्मनाभास्वामी, केदार, बालाराजेश्वर स्वामी, दक्षिणामूर्ति, त्रिपुरासंदरी मंदिर भी है। साथ ही गंडदीपम, शीशों का महल, नागीरेड्डी मंडप, भोजनशाला और मंदिर के प्रशासनिक भवन मौजूद हैं।

कोड़ेमुक्कु पूजा के लिए गायों को ले जाते हुए भक्त
कोड़ेमुक्कु पूजा के लिए गायों को ले जाते हुए भक्त

यहां विराजमान भगवान शिव को श्री राजराजेश्वर स्वामी और राजन्ना के नाम से पूजा जाता है। मंदिर में भगवान शिव के दाहिने हिस्से में श्री राजराजेश्वर देवी और बाएं श्री लक्ष्मी सहित सिद्धि विनायक की प्रतिमाएं हैं।

धर्मकुंड के तट पर तीन मंडप बनाए गए हैं और बीच वाले मंडप पर ध्यान मुद्रा में भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है, जिसके चारों तरफ पांच शिवलिंग होते हैं। इस मंदिर में सबसे महत्वपूर्ण 'कोडे मुक्कु' पूजा होती है।

शिवभक्तों में ऐसी धारणा है कि कामधेनु गाय के साथ मंदिर की परिक्रमा करने के बाद उसे मंदिर में दान में दिया जाता है। इससे संतानप्राप्ति होती है। न केवल शिव भक्त बल्कि शैव, वैष्णव, जैन और बौद्ध भी इस मंदिर के दर्शन करते हैं। मंदिर की दीवारों पर जो शिल्पकला है वह बौद्ध और जैन संस्कृति को प्रतिबिंबित करती है मंदिर के प्रांगण में 400 साल पुरानी मस्जिद है।

श्री राजराजेश्वरी मंदिर के पास का एक दृश्य
श्री राजराजेश्वरी मंदिर के पास का एक दृश्य

इस्लाम धर्म के एक शिवभक्त इसी मंदिर में रहते हुए भगवान शिव की आराधना करते हुए यहां उसकी मौत हो गई थी और उसकी याद में मंदिर में एक मस्जिद बनाई गई है।

यहां प्रसादी के रूप में लड्डू और पुलिहारा मिलता है। 200 ग्राम का लड्डू 10 रुपए. अभिषेक का लड्डू 80 ग्राम 15 रुपए, सामान्य लड्डू 400 ग्राम का 50 रुपये तथा कल्याण लड्डू (800 ग्राम) 100 रुपये में बिकता है।

मंदिर परिसर में ध्यान मुद्रा में शिवजी की एक विशाल मूर्ति
मंदिर परिसर में ध्यान मुद्रा में शिवजी की एक विशाल मूर्ति

मंदिर में दर्शन का समय

प्रति दिन तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते हैं और रात्रि 10.20 बजे बंद होते हैं। भक्तों के लिए यहां एसी रूम और एसी कॉटेज और एसी सूट्स और नॉन एसी रूम भी किराए पर मिलते हैं।

कैसे पहुंचें वेमुलवाड़ा

हैदराबाद से प्रतिदिन निर्धारित समय में बसें उपलब्ध है। सरकारी बस में यात्रा 4 घंटे 3 मिनट की है और अगर कोई कम समय में पहुंचना चाहते हैं, तो उनके लिए कैब में दो घंटे 52 मिनट का समय लगेगा।

वेमुलवाड़ा में कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, लेकिन यहां से 67 किलो मीटर की दूरी पर कामारेड्डी रेलवे स्टेशन ही सबसे करीब का स्टेशन है। यह रेलवे स्टेशन मुख्य जंक्शन है। यहां से दिल्ली, मुंबई, पुणे और भोपाल जैसे शहरों के लिए रेल मिल सकती है।