लेखक: रवि वल्लूरी

नई दिल्ली: अमेरिका का एक दल दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुबह सवेरे एयर फ्रांस विमान से पहुंचा। एयरपोर्ट पर जांच संबंधी औपचारिकताओं के बाद IRCTC के अधिकारियों ने उनकी अगवानी की।

विदेशी यात्रियों में से एक ने टिप्पणी की, “जब मैं बच्चा था, तो मैं किताबें जोर जोर से पढ़ता था। बड़े होने के बाद जब मैंने यात्रा शुरू की, तभी मुझे अहसास हुआ कि किसी चीज के बारे में कई बार सुनने से बेहतर है कि उसका प्रत्यक्ष साक्षात्कार किया जाय। जो यात्रा से ही संभव है।“

जिन आगंतुकों को रेलवे अधिकारियों ने रिसीव किया वे युगल थे, जिसमें दो जोड़े शामिल थे। इन्हीं में एक महिला ने कहा, "इंसान के लिए सबसे खुशी का मौका वो होता है जब वो किसी अनजानी सफर के लिए निकलता है।“ दरअसल महिला ने जो कुछ कहा कुछ ऐसे ही विचार प्रसिद्ध लेखक रिचर्ड बर्टन के भी हैं।

महिला को जवाब देते हुए IRCTC के एक अधिकारी ने कहा, "गोल्डन ट्रायंगल टूर का अहसास आपको ताउम्र रोमांचित करेगा।"

दरअसल ये विदेशी दंपत्ति भारतीय रेल की गोल्डन ट्रैंगल टूर के लिए आई थीं। पहले इन्हें दिल्ली के लुटियन्स इलाके में एक शानदार होटल में ठहराया गया। अगले ही दिन इन मेहमानों ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का भ्रमण किया।

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दिल्ली शहर का इतिहास महाभारत जितना ही पुराना है। कभी यह शहर इंद्रप्रस्थ के नाम से जाना जाता था। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपना राज्य यहीं स्थापित किया था।

महाभारत में इंद्रप्रस्थ से सटे आठ और शहर हैं, लाल कोट, सिरी, दीनपनाह, क्विला राय पिथौरा, फ़िरोज़ाबाद, जहाँपनाह, तुगलकाबाद और शाहजहानाबाद।

दिल्ली के पर्यटक स्थल 
दिल्ली के पर्यटक स्थल 

दिल्ली की नींव डालने वाले राजवंशों में तुगलक, खिलजी और मुगल थे, हरेक ने इसे अपने अपने मुताबिक सांस्कृतिक पहचान दी। दिल्ली वो शहर जो भारत के मुखौटे की तरह है। दिल्ली को समझने वाला पूरे देश के नब्ज को पहचान सकता है। दिल्ली से कई जादुई, रोमांचकारी और चमत्कारिक कहानियां जुड़ी हैं।

अमेरिकी मेहमानों ने लक्ष्मी नारायण मंदिर, प्रसिद्ध इंडिया गेट, संसद भवन, कुतुब मीनार पुराना किला के खंडहर, राजसी हुमायूं के मकबरे का दीदार किया। करीने से बने बगीचे, उसके बाद जंतर मंतर की वेधशाला ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया।

जंतर मंतर नई दिल्ली के आधुनिक होने की गवाही देता है। इसमें 13 वास्तु खगोलीय उपकरण शामिल हैं। यह जगह सन् 1723 में जयपुर के महाराजा जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित पांच वेधशालाओं में एक है।

दिल्ली के सैंकड़ों वर्षों के इतिहास से रूबरू होकर पर्यटक बेहद खुश थे। रात के खाने में दिल्ली की लज्जत का स्वाद उन्हें काफी भाया।

अगले दिन इनका दिल्ली की जामा मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध ‘मस्जिद-ए-जाहान-नुमा’ का दौरा था। यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। इसे मुगल सम्राट शाहजहाँ ने 1644 से 1656 के बीच 1 लाख रुपये की रियासत में बनवाया था और इसका उद्घाटन वर्तमान उजबेकिस्तान के इमाम बुखारा ने किया था।

इसके बाद पर्यटकों ने लाल किले का दौरा किया। मुगल वंश की सत्ता का केंद्र जहां आजाद हिंद फौज के सिपाहियों और ब्रिटिश सरकार को ललकारने वाले बहादुर जवानों के खिलाफ मुकदमा चला था। इसी लाल किले की प्राचीर से भारत के प्रधानमंत्री हर साल 15 अगस्त को राष्ट्र को संबोधित करते हैं। यह दिल्ली के केंद्र में स्थित है और इसमें कई संग्रहालय बने हैं। इसके बाद हमने महात्मा गांधी की समाधि की ओर प्रस्थान किया। अब तक मौसम ठंडा और अनुकूल हो चुका था।

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जयपुर का किला
जयपुर का किला

आगे राजस्थान का सफर

अगले दिन सुबह सवेरे आईआरसीटीसी अधिकारी मेहमानों को शताब्दी एक्सप्रेस से जयपुर के लिए रवाना करने पहुंचे। 309 किलोमीटर के इस सफर के लिए उन्हें पहले ही काफी सारी जानकारी दी गई। जयपुर भारत के बेहतर नियोजित शहरों में से एक है, जो राजस्थान के अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों में है। फिलहाल जयपुर राजस्थान की राजधानी है। जयपुर की बहुत सी इमारतें राजपूतों और शाही परिवारों की याद दिलाता है।

अंबर किला देखने के बाद जयपुर की यात्रा शुरू हुई। जयपुर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आमेर का किला अपने आप में किसी शहर से कम नहीं। आमेर किले का विस्तार चार किलोमीटर के दायरे में है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित आमेर का किला जयपुर का खास आकर्षण है।

राजस्थान की राजधानी जयपुर को गुलाबी नगरी कहा जाता है। इस रंग की कहानी एक राजकुमार से जुड़ी है। जिसे आज तक बरकरार रखा गया है। खगोलविद और महान शासक राजा जय सिंह ने जयपुर की नींव रखी थी। यह शहर करीब 260 साल पुराना है। पर्यटकों ने जंतर मंतर का दौरा किया (और दिल्ली में देखी वेधशाला की याद दिलाता है।) फिर हवा महल ने तो उन्हें अभिभूत ही कर लिया। सभी मेहमानों को जयपुर में एक भव्य होटल में ठहराया गया था।

जयपुर और आगरा किले के बीच 241 किलोमीटर की दूरी है। जिसके लिए रेलवे के कई विदेशी मेहमान सफर के लिए तैयार थे। भारतीय रेल की तरफ से ही इनके रहने सहने की व्यवस्था की गई थी। अब इनका अगला पड़ाव आगरा के गौरवशाली धरोहर की तरफ था।

इस शहर का नाम सीकरी वास्तव में एक गांव से लिया गया था। यह महान सूफी प्रचारक शेख सलीम की जगह थी। यहीं से वे सूफीवाद का प्रचार प्रसार किया करते थे। सम्राट अकबर के बेटे जहाँगीर का जन्म 1569 में सीकरी गाँव में हुआ था। इसी साल अकबर ने आगरा किले का निर्माण शुरू करवाया था। अकबर ने इसी दौर में दीन-ए-इलाही धर्म (जिसमें जैन धर्म, बौद्ध धर्म जैसे विभिन्न धर्मों के विचारों और विचारों को उधार लिया गया था) का प्रचार-प्रसार आरंभ किया।

जहाँगीर के दूसरे जन्मदिन के बाद अकबर ने एक चारदीवारी और यहाँ एक शाही महल का निर्माण शुरू कराया था। इस शहर को 1573 में `गुजरात 'की विजय के लिए फतेहपुर सीकरी या" “विजय का शहर" कहा जाने लगा।

आगरा का ताजमहल
आगरा का ताजमहल

विदेशी मेहमानों ने आगरा और ताजमहल का दीदार किया तो वे अभिभूत नजर आए। हमने उन्हें बताया कि आगरा का महाभारत में भी जिक्र है। उस काल में इस शहर को ‘अग्रवा’ नाम दिया गया था। जिसका मतलब होता है "द बॉर्डर ऑफ द फॉरेस्ट" यानी जंगल की सीमा।

आगरा की यादें शाहजहां की खूबसूरत पत्नी मुमताज महल और सात अजूबों में एक ताजमहल की कहानियों से जुड़ी है। यमुना नदी के दक्षिण में बना ताजमहल का मकबरा सफेद संगमरमर से बना है।

1632 में मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा यहां मकबरे का निर्माण कराया गया था। इसी मकबरे में इसके निर्माता शाहजहाँ का भी शरीर दफन है।

आगरा की यात्रा खत्म कर विदेशी मेहमानों ने दिल्ली का रुख किया। इस दौरान उन्होंने माना कि भारतीय रेल की अगवानी और यहां के ऐतिहासिक धरोहरों ने उन्हें काफी रोमांचित किया है।