हैदराबाद : आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में इन स्थलों पर पर्यटक बड़े पैमाने पर आते हैं। तेलंगाना के हैदराबाद, यादगिरीगुट्टा, कुंटाला जलप्रपात व बासर जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटक खूब आते हैं। आंध्र प्रदेश में तिरुपति, विशाखापटनम और प्रकाशम बांध प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। यहां पर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। इन स्थलों पर सैरसपाटे के लिए बड़े पैमाने पर पर्यटक आते हैं।

यादगिरीगुट्टा

तेलंगाना के प्रमुख मन्दिरों में से एक है यादगिरी गुट्टा तेलुगु भाषा में पहाड़ी को गुट्टा कहते हैं। विष्णु के नरसिंह अवतार को दक्षिण में यादगिरी स्वामी कहते हैं। इसे तेलंगाना का तिरुपति तिरुमला देवस्थानम माना जाता है।

कंद पुराण के साथ कई पौराणिक ग्रंथों में भी इस मंदिर का उल्लेख किया गया है। मंदिर के इतिहास के अनुसार श्री विष्णु यदश्री नाम के एक संत के स्वप्न में पधारे और अपने 5 रूपों में दर्शन दिया- ज्वाला, योगानंद, गण्डभेरुण्ड, उग्र और लक्ष्मी नरसिंह। इन्हें पांच नरसिंह भी कहा जाता है। यदश्री भगवान को अकेले नहीं देखना चाहते थे इसीलिए नरसिंह को महालक्ष्मी के साथ लक्ष्मीनारसिंह के रूप में दर्शन दिया।

कहा जाता है कि यह मंदिर संतों एवं ऋषियों के लिए आराधना क्षेत्र है। ऋषि और संत प्रति वर्षा यहां ब्रह्मोत्सव मनाते हैं। तिरुपति मंदिर की तरह यहां भी भक्त अपने केश (बाल) अर्पण करते हैं। मान्यता है कि देव यहां कला जादू , वशीकरण एवं ग्रहों के प्रभाव हटा सकते हैं।

तेलंगाना में चारमीनार सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थान है। हैदराबाद में चारमीनार एक लैंडमार्क है। चारमीनार का निर्माण सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाहने करवाया था। इसे लगभग 450 साल पहले बनाया गया।

चारमीनार और गोलकोंडा
चारमीनार और गोलकोंडा

चारमीनार के निर्माण के लिए फारसी के प्रख्यात आर्किटेक्चर को बुलाया गया था। इसकी संरचना एक मस्जिद एवं मदरसा के रूप में की गई थी। चार मीनार की संरचना ग्रेनाइट, चूना पत्थर, मोर्टार और चूर्णित संगमरमर से हुई थी। चारमीनार को गोलकोंडा किले से जोड़ने के लिए भूमिगत सुरंग का भी निर्माण कराया गया था। इन सुरंगों के स्थान आज भी अज्ञात है। चारमीनार के प्रत्येक चाप का निर्माण वर्ष 1889 में हुआ। साजिया वास्तुकला से इसका निर्माण हुआ। बताया जाता है कि मोहम्मद कुली कुतुब के किसी गुप्त वादे की वजह से इसका निर्माण हुआ।

कुंटाला जलप्रपात

यह पर्यटन स्थल निर्मल जिले में स्थित है। यहां प्रकृति प्रेमी और प्राकृतिक परिवेश में छुट्टियां बिताने बड़े पैमाने पर आते हैं। यह आश्चर्यजनक प्राकृतिक परिदृश्य से भरा स्थान है। यह स्थान एडवेंचर गतिविधियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां ट्रेकिंग ट्रेल्स का आनंद ले सकते हैं। कुंटाला जलप्रपात राज्य का सबसे खूबसूरत और ऊंचा झरना है। यह सह्याद्री पर्वत श्रृंखला के मध्य स्थित है। इस झरने से एक पौराणिक किवंदती भी जुड़ी है। माना जाता है कि इस झरने पर राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला स्नान करने के लिए आया करती थी। यह वही स्थान है, जहां दोनों के बीच प्रेम हुआ था। घने जंगल के बीच कावल वन्यजीव अभयारण्य है। यह अभयारण्य अपनी अद्भुत जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां आप विभिन्न पौधों के साथ जीव-जन्तुओं को भी देख सकते हैं। वर्ष 1964 में स्थापित यह अभयारण्य राज्य के चुनिंदा सबसे खास आरक्षित जंगलों में से एक है। जंगली जीवों में आप यहां बाघ, तेंदुआ, बाइसन, भालू, मगरमच्छ, कोबरा, अजगर आदि को देख सकते हैं।

बासर

श्री माता ज्ञान सरस्वती तीर्थस्थल (बासर)
श्री माता ज्ञान सरस्वती तीर्थस्थल (बासर)

बासर तीर्थस्थल निर्मल जिले में स्थित है। यह दक्षिण की गंगा कही जानेवाली गोदावरी नदी के किनारे बसा है। हर रोज यहां पर सैंकडों की संख्या में पर्यटक आते हैं। इस शहर को अन्य तीर्थस्थलों से रेलमार्ग से जोड़ा गया है। श्री ज्ञान सरस्वती देवी यहां का प्रसिद्ध मंदिर है। भारत में कहीं अन्यत्र सरस्वती माता का मंदिर नहीं देखा जा सकता। पांच शक्तीपीठों में यह मंदिर एक शक्तीपीठ है। यहां हर बारा वर्ष बाद पुष्कर (पुण्य स्नान) उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर में बच्चों को अक्षराभ्यास कराने के लिए पर्यटक बड़े पैमाने पर आते हैं। किवदंती है कि वेद ऋषि व्यास ने इस मंदिर का निर्माण किया था। श्री सरस्वती माता को ज्ञान की देवी कहा जाता है। यह पर्यटन स्थल हैदराबाद से लगभग 200 किमी दूरी पर तेलंगाना-महाराष्ट्र की सीमावर्ती क्षेत्र में बसा है।

तिरुपति

आंध्र प्रदेश में तिरुपति एक तीर्थस्थल है। यहां पर श्री वेंकटेश्वर स्वामी का मंदिर है। तिरुपति भारत के सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। यह चित्तूर जिले में है। प्रतिवर्ष यहां पर लाखों की संख्या में लोग आते हैं। तिरुमला की पहाड़ियों पर बना श्री वेंकटेश्वर स्वामी का यह मंदिर बड़ा ही आकर्षणीय है। यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्प का अद्भूत उदाहरण है।

तिरुमला की पहाड़ी पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर
तिरुमला की पहाड़ी पर स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर

तिरुपति के इतिहास को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। यह स्पष्ट है कि 5वीं शताब्दी तक यह धार्मिक केंद्र स्थापित हो चुका था। बताया जाता है कि चोल, होयसल और विजयनगरम के राजाओं ने मंदिर के निर्माण में खास योगदान दिया था।

अरकू घाटी

विशाखापटनम जिले में अरकू घाटी एक पर्वतीय स्थान है। इस घाटी में कई जनजातियों का निवास स्थान रहा है। अरकू घाटी दक्षिण भारत में सबसे कम प्रदुषित क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र में वाणिज्यिक रूप से कम उपयोग किया हुआ पर्यटक स्थल है। अरकू घाटी कॉफी पौधारोपण के लिए प्रसिद्ध है। आदिवासियों द्वारा इसका उत्पादन लिया जाता है। भारत का प्रथम जैविक कॉफी ब्रांड सन 2007 में जारी किया गया। अरकू में उत्तम किस्म का कार्बनिक ब्रांड कॉफी अरकू एमराल्ड की बिक्री वैश्विक स्तर पर की जाती है। अरकू जनजातिय क्षेत्र के हजारों आदिवासी कॉफी उगाने वाले मजदूर व छोटे किसान हैं।

विशाखापटनम एक प्रसिद्ध बंदरगाह शहर है। इसे विज़ाग के नाम से भी जाना जाता है। भारत के दक्षिण-पूर्व समुद्र तट पर स्थित विज़ाग, आंध्रप्रदेश का दूसरा बड़ा शहर है। विशाखापटनम अपने समृद्ध इतिहास और संस्कृति, हरे भरे परिदृश्यों, सुंदर समुद्री किनारों और खूबसूरत पहाड़ियों के कारण यह एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल के रूप में उभर रहा है।

विशाखापटनम का विहंगम दृश्य
विशाखापटनम का विहंगम दृश्य

विशाखापटनम को इसका नाम, शौर्य (वीरता) की देवता विशाखा से मिला है। यह शहर पश्चिमी घाट की सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित है, जिसके पूर्वी ओर बंगाल की खाड़ी स्थित है। इस शहर को 'भाग्य का शहर' और पूर्वी समुद्री किनारे का 'गोवा' भी कहा जाता है। विशाखापटनम यात्रियों के लिए एक स्वर्ग की तरह उभर कर सामने आया है। सुंदर समुद्री किनारे, खूबसूरत पहाड़ियां, प्राकृतिक घाटियाँ और इसके अलावा आधुनिक शहर का बुनियादी ढांचा है।

विशाखापटनम चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। श्री वेंकटेश्वर कोंडा, रॉस हिल्स और दरगाह कोंडा। इन तीनों पहाड़ियों में से प्रत्येक पर तीन अलग अलग धर्मों के पवित्र स्थल मौजूद हैं। वेंकटेश्वर पहाडी पर भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है, रॉस हिल्स पर वर्जिन मैरी चर्च है और दरगाह कोंडा पर एक मुस्लिम संत बाबा इशाक मदीना का मकबरा है। समुद्र तट जैसे कि ऋषिकोंडा बीच, गंगावरम बीच, भिमली और यारदा बीच शहर के पूर्वी हिस्से की ओर स्थित हैं।

प्रकाशम बांध

यह बांध कृष्णा नदी पर बनाया गया है। यहां पर एक खूबसूरत झील का निर्माण हुआ है। इस झील का विहंगम नजारा देखने को मिलता है।

प्रकाशम बांध का निर्माण 1852 से 1855 के बीच किया गया था। यह बांध 1223.5 मीटर लंबा है और कृष्णा जिला को गुंटूर जिला से जोड़ता है। बांध की तीन जल धारा है जो शहर से होकर गुजरती है। इससे विजयवाड़ा वेनिस का प्रतीरूप मालूम पड़ता है।