लेखक: रवि वल्लूरी

अपने व्यस्त जीवनशैली से थोड़ा विराम लेकर दक्षिण भारत की सुखद यात्रा के लिए आप महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन चुन सकते हैं। जब भी कोई शख्स दक्षिण भारत की सैर के लिए सोचता है, तो एक संपन्न विरासत जिसमें विभिन्न सभ्यताएं समाहित हैं, उससे वो रूबरू होता है। अजंता और एलोरा की गुफाओं में पत्थरों पर बनी नक्काशियां, जिसे बुद्धिस्ट, हिंदुओं और जैनियों ने कड़ी मेहनत से उकेरे थे। दक्षिण भारत के वो महल, मकबरे और किले बरबस ही आपके जेहन में आ जाते हैं जिसे मुस्लिम शासकों की सत्ता का प्रतीक माना जा सकता है। तमिलनाडु में पल्लवकालीन भव्य मूर्तियां हमें प्रेरित करती हैं, तो चोलकालीन मंदिरों के सम्मोहन से हम बच नहीं सकते। विजयनगर साम्राज्य की तत्कालीन राजधानी हम्पी की अलौकिक विविधताएं हमें बहुत कुछ पाठ पढ़ा जाती है। दक्षिण भारत की अतुलनीय ऐतिहासिक संपदा हमें मोहित करती है।

महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 
महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 

कई हजार किलोमीटर लंबी, समुद्रतट से सटी उर्वरा भूमि, साथ ही पहाड़ की चोटियां, ऐसा ही कुछ दक्षिण भारत का परिदृश्य देख पाएंगे आप। यात्रा के दौरान आप को भौगोलिक विविधताएं भी देखने को मिलेगी। नारियलय के ऊंचे ऊंचे पेड़, दक्षिण पश्चिम के बगान, घने जंगल और सर्द हिल स्टेशन वेस्टर्न घाट की पहचान है। दक्षिण के पठार में एकरूपता तो नहीं मिलेगी, यहां की भूमि की विविधताएं आप यात्रा के दौरान देख सकेंगे। पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ जिसमें हाथी, बाघ, हिरण और बंदरों की बहुतायत है।

भारत की कुछ अहम पारंपरिक रवायतें देश के इसी हिस्से से शुरू हुई। दक्षिण भारत के स्वाद की बात करें तो यहां की इडली और डोसा ने दुनियाभर में अपनी धाक जमाई है। गोवा का तीखापन, पुर्तगालियों की याद दिलाती है। केरल का नारियल से भरा सुस्वादु खाना हर कोई पसंद करेगा। साथ ही दक्षिण भारत की जी को भाने वाली भारतीय कॉफी को भी आप भूल नहीं पाएंगे।

महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन एक शाही ट्रेन है जिसे इंडियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) संचालित करती है। ये शाही ट्रेन सात सर्किट्स में चलती है जो दर्जनभर से अधिक गंतव्य स्थानों को तय करती है। जिसमें उत्तर-पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिमी इलाका शामिल है।

महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 
महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 

महाराजा एक्सप्रेस में तमाम शाही सुविधाएं आपको मुहैया कराई जाती है। एक छत के नीचे न्यूमैटिक सस्पेंशन, टेलिविजन, वाईफाई, सह बाथरूम, डाइनिंग कार्स, बार, लाउंज और ट्रेन के भीतर ही प्रीमियम दुकानें। केबिन का आकार इतना बड़ा है कि आप सहजता से बैठ और वक्त गुजार सकते हैं।

ट्रेन में कुल 23 कोच और 43 केबिन होती हैं। जिसमें बैठने के अलावा, डाइनिंग, बार, लाउंज, जेनरेटर और स्टोरेज के लिए अलग से इंतजाम होता है। इस लक्सरी गाड़ी में 88 सवारियों के लिए उम्दा इंतजाम किए जाते हैं।

ये ट्रेन जिन स्थानों को कवर करती है उसमें सबसे पहले नाम आता है तिरुवनंतपुरम, केरल की राजधानी के बाद महाबलीपुरम, चेट्टीनाड / कराइकुडी, इसके बाद मैसूर. हम्पी, गोवा और रत्नागिरी और फिर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई इसका गंतव्य होता है।

महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 
महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 

मशहूर कोल्लम बीच और अनंत पद्मनाभा स्वामी मंदिर की सैर के बाद महाराजा ट्रेन में आपके सफर में सूर्यास्त अरब सागर के किनारे होता है। इसके बाद सफर में ही लज्जतदार डिनर आपको सुखद अहसास दिलाती है। इस दौरान महाबलीपुरम का जिक्र करना जरूरी है, जो अपने भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। ग्रेनाइट पत्थरों से बनी मंदिर की संरचना अद्भुत है। ईसा पूर्व आठवीं शताब्दी के ये मंदिर अनूठी विरासत के गौरव का अहसास दिलाती है। इन मंदिरों के बनने से पहले यहां पल्लव वंश के नरसिंहवर्मन II शासन के दौरान पत्तन हुआ करता था।

इसके बाद ये ट्रेन आपको चेट्टीनाड / कराइकुडी की सैर कराती है, जो तमिलनाडु के मध्य में स्थित है। इस वक्त तक ट्रेन में आप सुबह का नाश्ता कर रहे होते हैं। नाश्ते के बाद गाइड आपको चेट्टिनाड के भव्य महलों की सैर कराता है। चेट्टिनाड के हेरिटेज होटल में लज्जत की तारीफ किए बिना आप नहीं रह सकते।

इसके बाद मैसूर की बात करते हैं। जो अपने मैसूर पैलेस के लिए प्रसिद्ध है। मैसूर की सैर के दौरान दिन में आपका खाना बाहर ही होता है। टीपू सुल्तान के किले में ही रंगनाथ स्वामी मंदिर की सैर का मौका इस दौरान आपको मिलता है। फिर हम्पी की तरफ जाते हुए रात का खाना आप ट्रेन में ही खाते हैँ।

हम्पी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शुमार है। हम्पी दरअसल विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी जिससे जुड़ा है महान शासक कृष्णदेव राय का नाम। साथ में हरिहरा व बुक्का की यादें भी यहां से जुड़ी हैं। इस दौरान आपको अनेगुंडी गांव जाने का मौका मिलता है, जो अपने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।

महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 
महाराजा एक्सप्रेस में सवारी का आनंद 

यात्रा की अगली सुबह गोवा का समुद्री किनारा बाहें फैलाए आपका स्वागत करता है। नाश्ते के बाद उत्तरी गोवा के भव्य चर्चों का आप दीदार कर सकेंगे। यहां पहुंचने के लिए पुराने पणजी घरों से होकर गुजरना होता है। जो अपने आप में एक सुखद अहसास है। गोवा में बीच पर आप नहाने का आनंद जरूर उठा सकेंगे। गोवा चित्र म्यूजियम की भव्यता भी आपको मोहित करती है। रात में ट्रेन में खाने के दौरान आपकी महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन तेजी से रत्नागिरी की तरफ रुख करती है।

रत्नागिरी पहुंचने पर सुबह सवेरे ट्रेन में ही नाश्ते का इंतजाम होता है। यहां का रत्नदुर्ग किला, सरकारी एक्वेरियम और थिबा (बर्मा से संबद्ध) महल आपको इस इलाके से परिचित कराता है। आखिरकार लौटते हुए मुंबई में आपके सफर का सुखद अंत होता है।

वास्तव में महाराजा एक्सप्रेस ट्रेन में किसी फाइव स्टार होटल से कम सुविधाएं आपको नहीं मिलती है। यह शाही सवारी 'महाराजा एक्सप्रेस' ट्रेन, एक नए सर्किट में 'सदर्न जूल्स' के नाम से पटरियों पर दौड़ती है। पूरी यात्रा आठ दिनों की होती है।

इस ट्रेन में 23 कोच और 43 कैबिन हैं। इसमें एक बार में कुल 88 यात्री यात्रा कर सकते हैं। कई आरामदायक सुविधाओं से लैस इस ट्रेन में दो रेस्टोरेंट, कैबिन के आकर के दो बार लाउन्ज बने हैं।