पटना : बिहार की राजधानी पटना का इतिहास और परंपरा सभ्यता की शुरुआत से ही आरम्भ होती है। पटना का नाम समय के साथ परिवर्तित होकर पाटलिग्राम, कुसुमपुर, अजीमाबाद और आधुनिक दौर में पटना नाम से जाना जाता है। लेकिन आज हम पटना जंक्शन के निकट स्थित महावीर मंदिर का बात कर रहे हैं। यह पटना में हिन्दुओं का आस्था का सबसे बडा केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु हुमानजी की पूजा-अर्चना करने आते है। महावीर मंदीर उत्तर भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।

महावीर मंदिर का इतिहास :

इस मंदिर का इतिहास बहुत पुरानी है। 1948 में पटना हाईकोर्ट के निर्णय के मुताबिक ये मंदिर प्राचीन काल से यहां मौजूद है। परन्तु मंदिर के ऐतिहासिक तथ्यों और परंपरा की जांच से पता चला है की इस मंदिर को स्वामी बालानंद ने स्थापित किया था। बालानंद 1730 ई. के दौरान रामानंदी संप्रदाय के एक तपस्वी थे।

सन 1948 ईसवी में पटना उच्च न्यायालय ने इसे सार्वजानिक मंदिर घोषित कर दिया। नए भव्य मंदिर का विनिर्माण 1983 से 1985 के बीच किशोर कुणाल और उनके भक्तो के योगदान से किया गया था और वर्तमान में ये देश के सबसे शानदार मंदिरों में से एक है।

मंदिर में हनुमान जी की दो मुर्तिया है, पहली परित्राणाय साधूनाम् जिसका अर्थ है अच्छे व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए और दूसरी विनाशाय च दुष्कृताम् जिसका अर्थ है दुष्ट व्यक्तियों को समाप्त करने के लिए। ये मंदिर 1900 ई. से रामानंद संप्रदाय के अंतर्गत आता है जबकि 1948 ई. तक गोसाईं सन्यासियों के कब्जे में था।

मंदिर का निर्माण :

वर्तमान मंदिर का जीर्णोद्धार 30 नवंबर से 4 मार्च 1985 के बीच हुआ है। मंदिर का क्षेत्रफल 10 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैला हुआ है। मंदिर परिसर में आगंतुकों और भक्तों की सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। मंदिर परिसर में प्रवेश करने के पश्चात बायीं तरफ एक चबूतरे पर सीढ़ियों की श्रृंखला है जो मंदिर के मुख्य क्षेत्र जिसे गर्भगृह कहा जाता है की ओर जाती है, जहां भगवान हनुमान का गर्भ गृह है। इसके चारों ओर एक गलियारा है जिसमें भगवान शिव जी है।

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मंदिर की पहली मंजिल में देवताओं की चार गर्भगृह है। इनमें से एक भगवन राम का मंदिर है जहां से इसका प्रारंभ होता है। राम मंदिर के पास भगवान कृष्ण का चित्रण किया गया है जिसमें वे अर्जुन को धर्मोपदेश दे रहे है। इससे अगला देवी दुर्गा का मंदिर है। इसके बाद भगवान शिव, ध्यान करती माँ पार्वती और नंदी-पवित्र बैल की मुर्तिया हैं जो लकड़ी के कटघरे में रखी गयी हैं। लकड़ी के कटघरे में शिव जी के ज्योतिर्लिंग को स्थापित किया गया है।

इस मंजिल पर एक अस्थायी राम सेतु है। इस सेतु को कांच के एक पात्र में रख गया है। इस पत्थर की मात्र 13,000 एमएम है जबकि इसका वजन लगभग 15 किलो है और पानी में तैर रही है।

मंदिर की दूसरी मंजिल का प्रयोग अनुष्ठान प्रयोजन के लिए किया जाता है। संस्कार मंडप इसी मंजिल पर मौजूद है। यहाँ मंत्रो का उच्चारण, जप, पवित्र ग्रंथो का गायन, सत्यनारायण कथा और अन्य धर्मिक अनुष्ठान किये जाते है। इस मंजिल पर रामायण की विभिन्न दृश्यों का चित्र प्रदर्शन भी किया गया है।

पहली मंजिल पर ध्यान मंडप को पार करने के पश्चात, बायीं ओर मौजूद भगवान गणेश, भगवान बुद्ध, भगवान सत्यनारायण, भगवान राम और सीता और देवी सरस्वती की प्रतिमाएं भक्तो को अपना आशीर्वाद देकर कृतार्थ करते है। इन देवताओं के सामने, पीपल के वृक्ष के नीचे शनि महाराज का मंदिर है जिसे एक गुफा के आकार का बनाया गया है जी दिखने में बहुत आकर्षक लगता है।

मंदिर के मुख्य परिसर में एक कार्यालय, धर्मिक वस्तुयों की एक दूकान और किताबो की दुकान है जहां धार्मिक शैली की किताबें मिलती है। इस परिसर में एक ज्योतिषी और हस्तकला केंद्र और मणि पत्थरो का भी केंद्र है जो भक्तो की आवश्कताओं को सही मार्गदर्शन से पूर्ण करता है।

मंदिर का प्रसाद :

मंदिर को एक और विशेषता इसके प्रसाद की है, जो पीठासीन देवताओ को अर्पित किया जाता है। प्रसाद के रूप में “नैवेद्यम” दिया जाता है जिसे तिरुपति और आंध्र प्रदेश के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है।

महावीर मंदिर का नैवेद्यम लडडुओं का पर्याय है जिसे हनुमान जी को अर्पित किया जाता है। संस्कृत भाषा में नैवेद्यम का अर्थ है देवता के समक्ष खाद्य सामग्री अर्पित करना। इस प्रसाद को तिरुपति के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है। इस प्रसाद में बेसन का आटा, चीनी, काजू, किशमिश, हरी इलायची, कश्मीरी केसर और अन्य फलेवर डालकर घी में पकाया जाता है और गेंद के आकार में बनाया जाता है।

नैवेद्यम बनाने में प्रयोग की जाने वाली केसर कश्मीर के पंपोर जिले के उत्पादकों से सीधे मंगाई जाती है जिसे कश्मीर में सोने (केसर) की भूमि के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर से होनेवाली आय से जनहित में महावीर कैंसर संस्थान, महावीर आरोग्य संस्थान, महावीर नेत्रालय, महावीर वात्सल्य अस्पताल संचालित है जहां न्यूनतम शुल्कों पर लोगों का इलाज किया जाता है।

महावीर मंदिर और जामा मस्जिद :

पटना का महावीर मंदिर और ऐतिहासिक जामा मस्जिद हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल बनकर साथ खड़े हैं।

मंदिर में कोई आयोजन हो तो मस्जिद की इंतेजामिया कमिटी भक्तों का ख्याल रखती है और मस्जिद में कोई आयोजन हो तो नमाज़ियों की ख़िदमत में मंदिर की प्रबंध समिति हाज़िर हो जाती है।

रामभक्तों की सुविधा के ख्याल से मस्जिद से ऐलान किया जाता है कि मस्जिद में उतने ही नमाजी आएं जितने मस्ज़िद में आ सकें बाकी दूसरी मस्जिदों का रूख करें। मंदिर की घोषणा के अनुसार श्रद्धालु भी नमाज के दौरान न तो मस्जिद से आगे बढ़ते हैं और न उस दौरान जयकारे लगाते हैं।