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`Lord Vishnu` से सम्बंधित परिणाम

आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो गुरुवार को करें ये खास उपाय, मिलेगा मनोवांछित फल 
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आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो गुरुवार को करें ये खास उपाय, मिलेगा मनोवांछित फल 

गुरुवार को भगवान विष्णु के साथ ही देव गुरु बृहस्पति की पूजा भी होती है। इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त व्रत भी किया जाता है। माना जाता है कि गुरुवार को व्रत-पूजा करने से विष्णु के साथ बृहस्पति का वरदान भी मिलता है।अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान है और रुपए-पैसे की कमी को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं तो कुछ खास उपाय आप गुरुवार को कर सकते हैं जिससे न सिर्फ आपकी आर्थिक तंगी दूर होगी बल्कि आप पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा की बरसात भी होगी।

भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम, घर में रखने से पहले जान लें नियम वरना हो जाएंगे बर्बाद 
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भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम, घर में रखने से पहले जान लें नियम वरना हो जाएंगे बर्बाद 

कार्तिक माह में स्नान-दान के साथ ही तुलसी पूजा का महत्व होता है। कई लोग कार्तिक का पूरा महीना स्नान करके अंत में एकादशी या फिर पूर्णिमा के दिन तुलसी विवाह करते हैं। तुलसी माता का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है।भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम जैसे कि भगवान शिवजी का शिवलिंग। शालिग्राम को बहुत जाग्रत माना जाता है। तुलसी के साथ तो शालिग्राम की पूजा होती ही है।यहां सवाल यह उठता है कि भगवान विष्णु शालिग्राम कैसे बन गए तो यहां वृंदा की कहानी कही व सुनी जाती है कि कैसे भगवान विष्णु ने वृंदा के पति जालंधर को मारने के लिए पतिव्रता वृंदा का शीलभंग किया और फिर कैसे वृंदा ने विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया।

आज वैकुंठ चतुर्दशी पर करेंगे ये खास उपाय तो धन-धान्य से भरेंगे भंडार और खुल जाएंगे मोक्ष के द्वार 
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आज वैकुंठ चतुर्दशी पर करेंगे ये खास उपाय तो धन-धान्य से भरेंगे भंडार और खुल जाएंगे मोक्ष के द्वार 

आज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है जिसे वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ भोलेनाथ की पूजा भी की जाती है।माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और विष्णु का मिलन होता है और इसी दिन भोलेनाथ सृष्टि का भार विष्णु को सौंपते हैं और फिर कैलाश पर्वत पर चले जाते हैं। इसके साथ ही भगवान कार्तिकेय, राधा-दामोदर, तुलसी-शालिग्राम का पूजन भी किया जाता है।कार्तिक माह के दौरान जिन लोगों ने मासपर्यंत व्रत या संकल्प नहीं किया है, वह कार्तिक चतुर्दशी व पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान पर जाकर राधा-दामोदर का विशेष पूजन कर सकते हैं। कार्तिक मास में राधा-दामोदर के साथ शालिग्राम तथा तुलसी के पूजन का विशेष महत्व है।

11 नवंबर को है वैकुंठ चतुर्दशी, यूं शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव और विष्णु की पूजा, जानें महत्व व कथा  
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11 नवंबर को है वैकुंठ चतुर्दशी, यूं शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव और विष्णु की पूजा, जानें महत्व व कथा  

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विधान है।इस बार वैकुंठ चतुर्दशी 11 नवंबर सोमवार को है। मान्यता है कि जो भी मनुष्य वैकुंठ चतुर्दशी को शिव और नारायण की पूजा करता है उसके सारे पाप कट जाते हैं।

वैकुंठ चतुर्दशी पर होता है हरि और हर का मिलन, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपते हैं भोलेनाथ  
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वैकुंठ चतुर्दशी पर होता है हरि और हर का मिलन, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपते हैं भोलेनाथ  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी होती है। इस बार यह 11 नवंबर सोमवार को है। इस दिन भगवान शिव के साथ विष्णु की विशेष रूप से पूजा करने का विधान है।मान्यता है कि देवशयनी एकादशी को यानी चातुर्मास की शुरुआत में भगवान विष्णु, शिवजी को सृष्टि का भार सौंपकर चार माह की योग निद्रा के लिए चले जाते हैं। इन चार महीनों में सृष्टि का संचालन शिवजी करते हैं।देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं और वैकुंठ चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिवजी सृष्टि का भार फिर से भगवान विष्णु को सौंप कैलाश की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इस दिन शिवजी और विष्णुजी की विशेष पूजा करनी चाहिए।

Kartik Purnima 2019: मनोवांछित फल पाने के लिए इस दिन करें इन चीजों का दान, ऐसे करें पूजा  
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Kartik Purnima 2019: मनोवांछित फल पाने के लिए इस दिन करें इन चीजों का दान, ऐसे करें पूजा  

हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव शंकर की पूजा की जाती है और माना जाता है कि इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने से व्यक्ति सात जन्म तक ज्ञानी और धनवान होता है।कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान का भी विशेष महत्व है। कहते हैं कि इस दिन दान करने से उसका दुगुना फल मिलता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर मंगलवार को मनाई जाएगी।

Kartik Purnima 2019: भगवान विष्णु ने इसी दिन लिया था मत्स्य अवतार, ये है इससे जुड़ी कथा   
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Kartik Purnima 2019: भगवान विष्णु ने इसी दिन लिया था मत्स्य अवतार, ये है इससे जुड़ी कथा   

इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर मंगलवार को है।पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का अंत किया था और इसी खुशी में देवताओं ने दीप जलाए व दीप दान किया जिसकी वजह से इसे देव दीपावली कहते हैं और उत्तर भारत जैसे कि काशी में इसे धूमधाम से मनाया भी जाता है।दूसरी ओर कार्तिक पूर्णिमा को ही गुरु नानक जयंती यानी गुरु पर्व भी मनाया जाता है वहीं इस दिन भगवान विष्णु ने पहला अवतार, मत्स्य अवतार भी लिया था जिससे इस दिन का महत्व बढ़ जाता है।

Kartik Purnima 2019: इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी कार्तिक पूर्णिमा, जानें महत्व व मुहूर्त 
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Kartik Purnima 2019: इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी कार्तिक पूर्णिमा, जानें महत्व व मुहूर्त 

कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन बेहद खास होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 मंगलवार को है।इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है जिसमें स्नान-दान का महत्व बढ़ जाएगा। वैसे भी कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व होता है और इस बार तो इसका महत्व ग्रह और नक्षत्र से बढ़ गया है।कार्तिक पूर्णिमा इस बार 12 नवंबर को मंगलवार के दिन भरणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग में मनाई जाएगी।

Devuthani Ekadashi 2019: चार माह की योग निद्रा से जागेंगे भगवान, ऐसे करें पूजा 
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Devuthani Ekadashi 2019: चार माह की योग निद्रा से जागेंगे भगवान, ऐसे करें पूजा 

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा के बाद भगवान विष्णु इस दिन उठते हैं या जागते हैं। भगवान विष्णु के जागने से यह दिन खास हो जाता है और इस दिन इसीलिए उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है। कहते हैं कि पूजा से भगवान विष्णु बेहद प्रसन्न होते हैं।इस साल देवउठनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को है और इसी दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाएगी।

Devuthni Ekadashi 2019: इस दिन देवता मनाते हैं दीपोत्सव, भूलकर भी न करें ये गलतियां 
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Devuthni Ekadashi 2019: इस दिन देवता मनाते हैं दीपोत्सव, भूलकर भी न करें ये गलतियां 

सबसे शुभ व मंगलकारी एकादशी देवउठनी एकादशी को ही माना जाता है। इस एकादशी का इतना महत्व इसलिए है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा के बाद जागते हैं और उनके जागने की खुशियां सब दीप जलाकर मनाते हैं।इस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को है। माना जाता है कि सब एकादशियों में श्रेष्ठ इस एकादशी को व्रत करने वाले को वैकुंठ की प्राप्ति होती है।शास्त्रों में इस एकादशी के बारे में विस्तार से बताया गया है कि जिस तरह इस एकादशी पर व्रत व पूजा का करने का शुभ फल मिलता है ठीक उसी तरह इस दिन भूलकर भी कुछ गलतियां हो जाए तो दुर्भाग्य का सामना भी करना पड़ता है।

Tulsi Vivah 2019: इस दिन करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न और देंगे मनचाहा वरदान 
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Tulsi Vivah 2019: इस दिन करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न और देंगे मनचाहा वरदान 

दिवाली के बाद आने वाला बड़ा व महत्वपूर्ण पर्व है देवउठनी एकादशी। इस एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन चार माह की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं और उनके जागने के साथ ही शुभ कार्यों का शुभारंभ हो जाता है।वहीं इसी दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है जिसका बड़ा महत्व है। पूरे कार्तिक मास तुलसी की पूजा की जाती है, उसके पास दीपक जलाकर सुबह-सवेरे उसकी परिक्रमा की जाती है और फिर देवउठनी एकादशी पर शालिग्राम संग उसका विवाह कराया जाता है।

वृंदा ने दिया था भगवान विष्णु को श्राप, जानें फिर क्यों शालिग्राम स्वरूप से होता है उसका विवाह  
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वृंदा ने दिया था भगवान विष्णु को श्राप, जानें फिर क्यों शालिग्राम स्वरूप से होता है उसका विवाह  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से तुलसी का विवाह धूमधाम से कराया जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 8 नवंबर शुक्रवार को है।सभी तुलसी विवाह कराते हैं पर पहले यह जानना चाहिए कि तुलसी कौन है और क्यों उनका विवाह भगवान शालिग्राम से कराया जाता है साथ ही विष्णु को कैसे मिला शालिग्राम का स्वरूप।

अक्षय नवमी 2019: सौभाग्य प्राप्ति के लिए यूं पूरे विधि-विधान से करें आंवले के पेड़ की पूजा, जानें मुहूर्त व मंत्र  
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अक्षय नवमी 2019: सौभाग्य प्राप्ति के लिए यूं पूरे विधि-विधान से करें आंवले के पेड़ की पूजा, जानें मुहूर्त व मंत्र  

कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की नवमी को अक्षय नवमी मनाई जाती है। अक्षय नवमी को ही आंवला नवमी भी कहते हैं। इस साल आंवला नवमी 5 नवंबर को है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा की तिथि तक आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। इसीलिए इस दिन आंवले के पेड़ के अलावा भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है।

अक्षय नवमी 2019: पाना है सुख-समृद्धि का वरदान तो इस दिन विष्णु के साथ करें भोलेनाथ को प्रसन्न  
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अक्षय नवमी 2019: पाना है सुख-समृद्धि का वरदान तो इस दिन विष्णु के साथ करें भोलेनाथ को प्रसन्न  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की विशेष रूप से पूजा करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करती हैं। माना जाता है कि प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का पर्व है आंवला नवमी।

गोवर्धन पूजा के दिन यहां होती है बलि की पूजा, जानें क्या कुछ होता है खास 
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गोवर्धन पूजा के दिन यहां होती है बलि की पूजा, जानें क्या कुछ होता है खास 

माना जाता है कि इसी दिन भगवान वामन ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दिवाली मनाई थी।विष्णु अवतार वामन ने तब बलि को अमर होने के वरदान देने के साथ ही कहा था कि जो भी इस दिन तुम्हारी पूजा करेगा वह हर तरह से सुखी होगा।

Diwali 2019: लक्ष्मी पूजा में 5 चीजें हैं वर्जित, वरना हो जाएंगे कंगाल
समाचार

Diwali 2019: लक्ष्मी पूजा में 5 चीजें हैं वर्जित, वरना हो जाएंगे कंगाल

हम आपको ऐसी पांच खास चीजें बता रहे हैं। जिन्हें लक्ष्मी पूजा में इस्तेमाल कतई न करें। पुरोहितों के मुताबिक लक्ष्मी पूजा का फल तभी मिलता है जब नियमों के मुताबिक ही पूजा की जाय। 

रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ करें मां लक्ष्मी की पूजा, मिलेगा मनोवांछित फल 
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रमा एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ करें मां लक्ष्मी की पूजा, मिलेगा मनोवांछित फल 

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार जो भक्‍त सच्‍चे मन और विधि विधान से रमा एकादशी का व्रत करता है, कथा पढ़ता है या सुनता है उसे सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है और मृत्‍यु उपरांत उसे विष्‍णु लोक की प्राप्‍ति होती है।रमा एकादशी दिवाली के चार दिन पहले आती है इसीलिए माता लक्ष्मी के नाम पर इसे रमा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु के साथ ही मां लक्ष्‍मी का पूजन करना भी बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है।

गुरुवार को करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु की बरसेगी कृपा, दूर होंगी समस्याएं 
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गुरुवार को करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु की बरसेगी कृपा, दूर होंगी समस्याएं 

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। वैसे गुरुवार को बृहस्पति की पूजा का विधान भी है। माना जाता है कि अगर गुरुवार को कुछ खास उपाय किये जाए तो हर कष्ट से मुक्ति मिल सकती है।वहीं गुरुवार को पीला रंग पहनने के लिए भी कहा जाता है क्योंकि बृहस्पति देव को पीले रंग से अधिक प्रेम बताया जाता है इसलिए गुरुवार के दिन ज्यादा से ज्यादा पीले रंग का इस्तेमाल करने के बारे में बताया जाता है।

पापांकुशा एकादशी पर ऐसे पूजा करें और मनोवांछित फल पाएं, जानें पूजा विधि, मुहूर्त व कथा  
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पापांकुशा एकादशी पर ऐसे पूजा करें और मनोवांछित फल पाएं, जानें पूजा विधि, मुहूर्त व कथा  

आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कहते हैं कि एकादशी तिथि का व्रत जीवों के परम लक्ष्य, भगवद भक्ति, को प्राप्त करने में सहायक होता है। यह दिन श्री हरि की पूर्ण श्रद्धा से सेवा करने के लिए अति शुभकारी एवं फलदायक माना गया है।पापांकुशा एकादशी के दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिये भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है।

अनंत चतुर्दशी को ऐसे  करें भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त व कथा 
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अनंत चतुर्दशी को ऐसे करें भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त व कथा 

भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है। भाद्र शुक्ल चतुर्दशी को अनन्त व्रत किया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार यह तिथि सूर्योदय काल में तीन मुहूर्त अर्थात 6 घडी़ ग्रह करनी चाहिए यह मुख्य पक्ष होता है।शास्त्रानुसार यह तिथि पूर्वाहरण व्याएवं मध्याह्न व्यापिनी लेनी चाहिए और यह गौण पक्ष होता है।

कष्टों से मुक्ति दिलाता है अनंत चतुर्दशी व्रत, जानें इसका महत्व व पूजा विधि 
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कष्टों से मुक्ति दिलाता है अनंत चतुर्दशी व्रत, जानें इसका महत्व व पूजा विधि 

सब जानते ही हैं कि अनंत चतुर्दशी का पर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान अनंत की पूजा की जाती है। इसमें व्रत का संकल्प लेकर अनंत सूत्र बांधा जाता है। माना जाता है कि इसको धारण करने से संकटों का नाश होता है।भगवान कृष्ण की सलाह से पांडवों ने इसका पालन किया और सभी संकटों से मुक्त हुए।

परिवर्तिनी एकादशी पर होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा, जानें  पूजा विधि एवं महत्व
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परिवर्तिनी एकादशी पर होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा, जानें पूजा विधि एवं महत्व

भादौ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इस एकादशी को पद्मा एकादशी, वामन एकादशी व जलझूलनी एकादशी के नामों से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है।

जानें कुशग्रहणी अमावस्या का महत्व, इस काम से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद 
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जानें कुशग्रहणी अमावस्या का महत्व, इस काम से मिलेगा पितरों का आशीर्वाद 

माना जाता है कि इस दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हाथों में कुश लेकर पितरों की पूजा और श्राद्ध एवं तर्पण करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पूजा व श्राद्ध करने से पितर को संतुष्टि होती है और उन्हें मुक्ति मिलती है। ऐसा करने से उनका आशीर्वाद भी बना रहता है।

आज एकादशी पर पूरे विधि-विधान से करें व्रत-पूजा, मिलेगा सुख-सौभाग्य का वरदान  
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आज एकादशी पर पूरे विधि-विधान से करें व्रत-पूजा, मिलेगा सुख-सौभाग्य का वरदान  

भाद्रपद यानी भादो मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे कामिका या अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है। वैसे तो एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा होती ही है पर इस अजा एकादशी को भगवान विष्णु के उपेन्द्र स्वरूप की पूजा की जाती है।

अजा एकादशी पर बना है अद्भुत संयोग, विष्णु के साथ करें भोलेनाथ की पूजा 
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अजा एकादशी पर बना है अद्भुत संयोग, विष्णु के साथ करें भोलेनाथ की पूजा 

जन्माष्टमी के दो दिन बाद ही अजा एकादशी का व्रत आता है। भादो मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को अजा एकादशी व्रत रखा जाता है जो इस बार 26 अगस्त यानी सोमवार को है।हम सब जानते ही हैं कि एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है पर यह एकादशी सोमवार को है इसलिए आप इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा भी कर सकते हैं।

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है कामिका एकादशी, व्रत-पूजा से मिलता है अक्षय पुण्य  
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श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में आती है कामिका एकादशी, व्रत-पूजा से मिलता है अक्षय पुण्य  

सावन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस साल 28 जुलाई को कामिका एकादशी व्रत रखा जाएगा।कहते हैं कि एकादशी के व्रत में नारायण के समान फल देने की शक्ति होती है। वहीं इस व्रत को करने के बाद और कोई पूजा करने की आवश्यकता नहीं होती।

शुभ योगों के साथ आई है देवशयनी एकादशी, ये खास उपाय करें और अपना भाग्य संवारें  
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शुभ योगों के साथ आई है देवशयनी एकादशी, ये खास उपाय करें और अपना भाग्य संवारें  

भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी को योग निद्रा में जाते हैं और इस दिन उनकी पूजा, व्रत का विशेष महत्व होता है।वहीं आप यह भी जान लें कि इस बार देवशयनी एकादशी कई शुभ व दुर्लभ योगों के साथ आई है। ऐसे में भगवान विष्णु की आराधना सवोत्तम फल देने वाली है।

देवशयनी एकादशी पर यूं विधि-विधान से व्रत-पूजा करें, मनोवांछित फल पाएं 
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देवशयनी एकादशी पर यूं विधि-विधान से व्रत-पूजा करें, मनोवांछित फल पाएं 

इस साल देवशयनी एकादशी शुक्रवार 12 जुलाई 2019 को है। देवशयनी एकादशी सूर्य की मिथुन राशि में आती है और इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत माना जाता है।

भगवान विष्णु 12 जुलाई को चले जाएंगे निद्रा में, देवशयनी एकादशी के बाद चार महीने नहीं होंगे विवाह 
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भगवान विष्णु 12 जुलाई को चले जाएंगे निद्रा में, देवशयनी एकादशी के बाद चार महीने नहीं होंगे विवाह 

इन चार महीनों में कुोई मांगलिक कार्य नहीं होते जैसे विवाह, उपनयन संस्कार, गृह प्रवेश, कर्ण भेदन आदि। वैसे इन दिनों में शुक्र और गुरु तारा भी अस्त होता है उस कारण भी मांगलिक कार्यक्रम नहीं होते।

पुण्यफल प्रदान करता है योगिनी एकादशी व्रत, ये है शुभ मुहूर्त 
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पुण्यफल प्रदान करता है योगिनी एकादशी व्रत, ये है शुभ मुहूर्त 

इस वर्ष 29 जून 2019 के दिन योगिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा उपासना की जाती है। इस एकादशी के दिन पीपल के पेड की पूजा करने का भी विशेष महत्व होता है।

मनोवांछित फल पाने के लिए गुरुवार को ऐसे करें व्रत-पूजा, गलती से भी न करें ये काम 
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मनोवांछित फल पाने के लिए गुरुवार को ऐसे करें व्रत-पूजा, गलती से भी न करें ये काम 

गुरुवार के व्रत से जहां आपका गुरु ग्रह मजबूत होता है वहीं आपके घर सुख-संपत्ति भी आती है। यह भी कहा जाता है कि 16 गुरुवार व्रत करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है और व्रत पूरे करके 17वें गुरुवार को इस व्रत का उद्द्यापन करना चाहिए।

 अक्षय फलदायी होता है निर्जला एकादशी का व्रत, ऐसे करें पूजा 
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अक्षय फलदायी होता है निर्जला एकादशी का व्रत, ऐसे करें पूजा 

इस एकादशी पर व्रत तो रखा ही जाता है साथ ही इस दिन जल भी ग्रहण नहीं किया जाता इसीलिए इस एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। व्रत रखने के साथ ही इस दिन पूरे विधि-विधान से शेषशायी भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है।

भाजपा प्रवक्ता ने पीएम मोदी को भगवान विष्णु का 11वां अवतार बताया
राष्ट्रीय राजनीति

भाजपा प्रवक्ता ने पीएम मोदी को भगवान विष्णु का 11वां अवतार बताया

महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता अवधूत वाघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार बताया है। अवधूत वाघ ने ट्वीट कर कहा, “सम्मानीय प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी भगवान विष्णु का ग्यारहवां अवतार हैं।”