Wed Jan 29, 2020 Telugu English E-Paper Education
ब्रेकिंग न्यूज़
शाहीन बाग में प्रदर्शन स्थल पर हथियार के साथ नजर आया व्यक्ति, आंदोलनकारियों को दी धमकी
देशद्रोहियों की सात पुश्तें भी असम को हिन्दुस्तान से अलग नहीं कर सकतीं : अमित शाह
निर्वाचन आयोग ने विवादित नारेबाजी पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को भेजा नोटिस
दिल्ली पुलिस ने बिहार के जहानाबाद से शरजील इमाम को गिरफ्तार किया
गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली के लोगों से नफरत करते हैं : सीएम अरविंद केजरीवाल

`Lord Vishnu` से सम्बंधित परिणाम

जानें क्यों मौनी अमावस्या पर होती है भगवान विष्णु के साथ पीपल की पूजा, ये है इससे जुड़ी कथा   
संपादक की पसंद

जानें क्यों मौनी अमावस्या पर होती है भगवान विष्णु के साथ पीपल की पूजा, ये है इससे जुड़ी कथा   

मौनी अमावस्या के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि पीपल की जड़ में श्रीहरि विष्णु, तने में भगवान शिव तथा अग्रभाग में ब्रह्माजी का निवास होता है।

सुख-समृद्धि के साथ ही मोक्ष देता है षटतिला एकादशी का व्रत, पूजा के बाद जरूर पढ़ें व्रत-कथा  
संपादक की पसंद

सुख-समृद्धि के साथ ही मोक्ष देता है षटतिला एकादशी का व्रत, पूजा के बाद जरूर पढ़ें व्रत-कथा  

षटतिला एकादशी के दिन काली गाय और तिल के दान का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन व्यक्ति अगर तिल का प्रयोग 6 प्रकार से करे तो पाप कर्मों से मुक्त होकर हजारों वर्षों तक परलोक में सुख भोग प्राप्त करता है।

षटतिला एकादशी पर ऐसे करेंगे पूजा तो होगी अक्षय पुण्य की प्राप्ति, जानें महत्व व शुभ मुहूर्त 
संपादक की पसंद

षटतिला एकादशी पर ऐसे करेंगे पूजा तो होगी अक्षय पुण्य की प्राप्ति, जानें महत्व व शुभ मुहूर्त 

माघ मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन तिल से पूजन किया जाता है, तिल का दान दिया जाता है साथ ही भगवान को तिल से बने व्यंजन का ही भोग भी लगाया जाता है।

षटतिला एकादशी 2020: एकादशी व्रत से मिलता है मोक्ष, इस दिन भूलकर भी न करें ये काम  
संपादक की पसंद

षटतिला एकादशी 2020: एकादशी व्रत से मिलता है मोक्ष, इस दिन भूलकर भी न करें ये काम  

एकादशी के कई नियम भी होते हैं जिसके अंतर्गत कई ऐसे काम भी है जिन्हें इस दिन करने की मनाही होती है। इस व्रत को रखने वाले व्यक्ति को भूलकर भी ये काम नहीं करने चाहिए। वरना उन्हें व्रत का फल नहीं मिलता साथ ही अनिष्ट होने का डर भी बना रहता है।

जानें आखिर क्यों मृत्यु के समय ही किया जाता है गरुड़ पुराण का पाठ, क्या है इसका महत्व  
संपादक की पसंद

जानें आखिर क्यों मृत्यु के समय ही किया जाता है गरुड़ पुराण का पाठ, क्या है इसका महत्व  

गरुड़ पुराण में व्यक्ति के कर्मों के आधार पर दंड स्वरुप मिलने वाले विभिन्न नरकों के बारे में बताया गया है। परन्तु ये प्रतीकात्मक हैं, वास्तविक नहीं। हालांकि ये बात जरूर है कि उसी तरह के परिणाम वास्तविक जीवन में भुगतने पड़ने हैं और ये परिणाम वास्तविक तथा मानसिक होते हैं।

षटतिला एकादशी पर करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु के साथ प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी  
संपादक की पसंद

षटतिला एकादशी पर करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु के साथ प्रसन्न होंगी मां लक्ष्मी  

षटतिला एकादशी को काले तिल से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन जो लोग पूरे विधि-विधान से व्रत करके भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उन्हें विष्णु के साथ मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

षटतिला एकादशी 2020: काले तिल से करेंगे पूजा तो प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु, तिल दान का भी है महत्व  
संपादक की पसंद

षटतिला एकादशी 2020: काले तिल से करेंगे पूजा तो प्रसन्न होंगे भगवान विष्णु, तिल दान का भी है महत्व  

षटतिला एकादशी को 20 जनवरी 2020, सोमवार को है। इसी दिन व्रत किया जाएगा साथ ही भगवान विष्णु की विशेष पूजा भी की जाएगी।षटतिला एकादशी के दिन तिलों का छ: प्रकार से उपयोग किया जाता है।

जानें आखिर कब है षटतिला एकादशी का व्रत, क्यों और कैसे पड़ा इसका ये नाम  
संपादक की पसंद

जानें आखिर कब है षटतिला एकादशी का व्रत, क्यों और कैसे पड़ा इसका ये नाम  

कुछ लोग षटतिला एकादशी का व्रत रखकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं साथ ही गरीबों को दान भी देते हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति षटतिला एकादशी का व्रत रखकर सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंगलकार्य में आ रही बाधा तो गुरुवार को करें ये खास उपाय, मिलेगा शुभ फल 
संपादक की पसंद

मंगलकार्य में आ रही बाधा तो गुरुवार को करें ये खास उपाय, मिलेगा शुभ फल 

कई लोगों की शादी जहां बिना किसी परेशानी के जल्द हो जाती है वहीं कई लोगों की शादी में कई तरह की रुकावटें आती है। कोशिशों के बाद भी उनका रिश्ता कहीं तय ही नहीं हो पाता।

पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान से होती है मोक्ष की प्राप्ति, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजा-विधि  
संपादक की पसंद

पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान से होती है मोक्ष की प्राप्ति, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व व पूजा-विधि  

पौष पूर्णिमा का महत्व किसी भी अन्य पूर्णिमा से अधिक बताया गया है और माना जाता है कि इस दिन स्नान-दान व सूर्य भगवान को अर्घ्य देने से व्यक्ति के सारे संकट दूर हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गुरुवार को ऐसे करेंगे भगवान विष्णु की पूजा तो मिलेगा शुभ फल 
संपादक की पसंद

गुरुवार को ऐसे करेंगे भगवान विष्णु की पूजा तो मिलेगा शुभ फल 

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। वैसे गुरुवार को बृहस्पति की पूजा का विधान भी है। माना जाता है कि अगर गुरुवार को कुछ खास उपाय किये जाए तो हर कष्ट से मुक्ति मिल सकती है।

आज पुत्रदा एकादशी पर सूर्यास्त के बाद करें ये खास उपाय, हर इच्छा होगी पूरी  
संपादक की पसंद

आज पुत्रदा एकादशी पर सूर्यास्त के बाद करें ये खास उपाय, हर इच्छा होगी पूरी  

एकादशी का व्रत करने के साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। वहीं यह तो हम जानते ही हैं कि भगवान विष्णु को तुलसी के बिना भोग नहीं लगता तो एकादशी की शाम को तुलसी से जुड़ा एक उपाय मात्र कर लेने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं।

पौष पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त व व्रत कथा 
संपादक की पसंद

पौष पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें महत्व, शुभ मुहूर्त व व्रत कथा 

मान्यता है कि पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान को सुखी जीवन और लंबी उम्र प्राप्त होती है। वहीं जिन लोगों के संतान नहीं होती उन्हें इस व्रत को करने व इस दिन विशेष पूजा करने से संतान प्राप्ति भी होती है।

पौष पुत्रदा एकादशी पर संतान प्राप्ति के लिए यूं करें पूजा, भूलकर भी न करें ये गलतियां  
संपादक की पसंद

पौष पुत्रदा एकादशी पर संतान प्राप्ति के लिए यूं करें पूजा, भूलकर भी न करें ये गलतियां  

माना जाता है कि पौष पुत्रदा एकादशी पर व्रत और पूजा करने पर संतान सुख की प्राप्ति होती है। यदि आपको पौष पुत्रदा एकादशी व्रत का सही और पूर्ण लाभ अर्जित करना है तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

पुत्रदा एकादशी पर विष्णु के साथ ही यूं करें भोलेनाथ की पूजा, सारे कष्टों से मिलेगी मुक्ति  
संपादक की पसंद

पुत्रदा एकादशी पर विष्णु के साथ ही यूं करें भोलेनाथ की पूजा, सारे कष्टों से मिलेगी मुक्ति  

पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी सोमवार को है जिससे इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही शिव शंकर की पूजा करने से मनचाहा फल मिल सकता है। यह बेहद शुभ संयोग बन रहा है जब भक्त को दोनों देवों का एक दिन पूजन करने का अवसर मिल रहा है।

वैकुंठ एकादशी पर भक्तों के लिए खुलते हैं वैकुंठ के द्वार, भगवान के दर्शन व व्रत से मिलता है मोक्ष  
संपादक की पसंद

वैकुंठ एकादशी पर भक्तों के लिए खुलते हैं वैकुंठ के द्वार, भगवान के दर्शन व व्रत से मिलता है मोक्ष  

वैकुंठ एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन बहुत ही धूमधाम के साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। वैकुंठ एकादशी को मुक्कोटी एकादशी भी कहा जाता है।

जानें पुत्रदा एकादशी का महत्व, संतान सुख के लिए राशि अनुसार करें ये खास उपाय  
संपादक की पसंद

जानें पुत्रदा एकादशी का महत्व, संतान सुख के लिए राशि अनुसार करें ये खास उपाय  

पौष के महीने का शास्त्रों में बड़ा महत्व है। इस महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस एकादशी को संतान प्राप्ति के लिए अमोघ माना जाता है वहीं यह भी कहते हैं कि इस एकादशी का व्रत करने से संतान की सारी समस्याओं का निवारण हो जाता है।

धनुर्मास विशेष: जानें आखिर क्यों मनाया जाता है धनुर्मास उत्सव, पूजा विधि, महत्व व कथा  
संपादक की पसंद

धनुर्मास विशेष: जानें आखिर क्यों मनाया जाता है धनुर्मास उत्सव, पूजा विधि, महत्व व कथा  

दक्षिण भारत में धनुर्मास का तीस दिवसीय उत्सव धूमधाम से मनाया जाता हैं। धनुर्मास तीस दिनों का उत्सव होता है, जिसमें खासतौर पर भगवान विष्णु की उपासना की जाती हैं। भक्ति के भाव को जगाने के लिए इस महीने में धार्मिक कर्म किये जाते हैं। 

पौष अमावस्या: आज शाम करें ये खास उपाय, नारायण के साथ लक्ष्मी आएगी आपके द्वार 
संपादक की पसंद

पौष अमावस्या: आज शाम करें ये खास उपाय, नारायण के साथ लक्ष्मी आएगी आपके द्वार 

आज पौष अमावस्या का पावन दिन है अमावस्या होने से कुछ खास उपाय संध्या के समय भी किये जा सकते हैं जिससे कि नारायण के साथ लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त हो सकती है। 

सफला एकादशी पर ऐसे करेंगे पूजा तो मिलेगा शुभ फल, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व कथा 
संपादक की पसंद

सफला एकादशी पर ऐसे करेंगे पूजा तो मिलेगा शुभ फल, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व कथा 

पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है और माना जाता है कि इस दिन व्रत-पूजा करने से भक्त को सारे कामों में सफलता मिलती है और उसका जीवन धन्य हो जाता है।सफला एकादशी पर श्री हरि विष्णु की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार जो कोई भक्‍त सच्‍चे मन और श्रद्धा से इस एकादशी का व्रत करता है उसके सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं और उसे जीवन के सभी कार्यों में सफलता मिलती है।

शुभ फलदायी होता है मोक्षदा एकादशी का व्रत, जानें इसका महत्व, पूजा-विधि व मुहूर्त  
संपादक की पसंद

शुभ फलदायी होता है मोक्षदा एकादशी का व्रत, जानें इसका महत्व, पूजा-विधि व मुहूर्त  

हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का बहुत महत्व होता है। वैसे तो सभी एकादशियां पुण्यदायी मानी जाती है लेकिन कुछ एकादशियां बहुत ही खास होती हैं। इन्हीं खास एकादशियों में से एक है मोक्षदा एकादशी।मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी का नाम मोक्षदा है। मोक्षदा एकादशी व्रत की खासियत यह है कि यही वो दिन है जब भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर मानव जीवन को नई दिशा देने वाली गीता का उपदेश दिया था। मोक्षदा एकादशी के दिन ही गीता जयंती का पर्व भी मनाया जाता है।

गुरुवार को ऐसे करेंगे व्रत-पूजा तो मिलेगा शुभ फल, गलती से भी न करें ये काम 
संपादक की पसंद

गुरुवार को ऐसे करेंगे व्रत-पूजा तो मिलेगा शुभ फल, गलती से भी न करें ये काम 

गुरुवार के व्रत से जहां आपका गुरु ग्रह मजबूत होता है वहीं आपके घर सुख-संपत्ति भी आती है। यह भी कहा जाता है कि 16 गुरुवार व्रत करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है और व्रत पूरे करके 17वें गुरुवार को इस व्रत का उद्द्यापन करना चाहिए।

उत्पन्ना एकादशी पर यूं विधि-विधान से करें व्रत-पूजा, ये है शुभ मुहूर्त, महत्व व कथा 
संपादक की पसंद

उत्पन्ना एकादशी पर यूं विधि-विधान से करें व्रत-पूजा, ये है शुभ मुहूर्त, महत्व व कथा 

हिंदू धर्म में एकादशी का बड़ा महत्व है और ये महीने में दो बार आती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा व व्रत किया जाता है। पर मार्गशीर्ष मास में आने वाली उत्पन्ना एकादशी का सबसे ज्यादा महत्व है क्योंकि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था। इसीलिए इस एकादशी का नाम उत्पन्ना पड़ा।एकादशी माता को भगवान विष्णु की शक्ति ही माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन मां एकादशी ने उत्‍पन्न होकर अतिबलशाली और अत्‍याचारी राक्षस मुर का वध किया था। मान्‍यता के अनुसार इस दिन स्‍वयं भगवान विष्‍णु ने माता एकादशी को आशीर्वाद देते हुए इस व्रत को पूज्‍यनीय बताया था।

गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम, वरना दुर्भाग्य कभी आपका पीछा नहीं छोड़ेगा  
संपादक की पसंद

गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम, वरना दुर्भाग्य कभी आपका पीछा नहीं छोड़ेगा  

हमारे हिंदू धर्म में वैसे तो सप्ताह के हर दिन का अपना महत्व है पर फिर भी गुरुवार के दिन का अधिक महत्व होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सभी देवी-देवताओं के गुरु ब्रहस्पति का दिन होता है साथ ही नौ ग्रहों में सबसे बड़े ग्रह का दिन भी होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का अधिक महत्व है। इतना ही नहीं इस दिन विधि-विधान के साथ पूजा करने से गुरु ग्रह भी शांत रहता है।वैसे देखा जाए तो हमारे धर्म में हर काम करने का एक दिन होता है कि इस दिन ये काम नहीं कर सकते या फिर इस दिन ऐसे काम करने से देवता खुश होते है। साथ ही शुभ और अशुभ के बारे में भी काफी सोचा-समझा जाता है।

उत्पन्ना एकादशी 2019: जानें क्यों और कैसे पड़ा इस एकादशी का नाम उत्पन्ना, क्या है इसका महत्व 
संपादक की पसंद

उत्पन्ना एकादशी 2019: जानें क्यों और कैसे पड़ा इस एकादशी का नाम उत्पन्ना, क्या है इसका महत्व 

मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं और माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस बार उत्पन्ना एकादशी 22 नवंबर 2019 को है। यह तो हम जानते ही हैं कि एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो गुरुवार को करें ये खास उपाय, मिलेगा मनोवांछित फल 
संपादक की पसंद

आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो गुरुवार को करें ये खास उपाय, मिलेगा मनोवांछित फल 

गुरुवार को भगवान विष्णु के साथ ही देव गुरु बृहस्पति की पूजा भी होती है। इस दिन भगवान विष्णु के निमित्त व्रत भी किया जाता है। माना जाता है कि गुरुवार को व्रत-पूजा करने से विष्णु के साथ बृहस्पति का वरदान भी मिलता है।अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान है और रुपए-पैसे की कमी को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं तो कुछ खास उपाय आप गुरुवार को कर सकते हैं जिससे न सिर्फ आपकी आर्थिक तंगी दूर होगी बल्कि आप पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा की बरसात भी होगी।

भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम, घर में रखने से पहले जान लें नियम वरना हो जाएंगे बर्बाद 
संपादक की पसंद

भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम, घर में रखने से पहले जान लें नियम वरना हो जाएंगे बर्बाद 

कार्तिक माह में स्नान-दान के साथ ही तुलसी पूजा का महत्व होता है। कई लोग कार्तिक का पूरा महीना स्नान करके अंत में एकादशी या फिर पूर्णिमा के दिन तुलसी विवाह करते हैं। तुलसी माता का विवाह शालिग्राम के साथ किया जाता है।भगवान विष्णु का ही विग्रह रूप है शालिग्राम जैसे कि भगवान शिवजी का शिवलिंग। शालिग्राम को बहुत जाग्रत माना जाता है। तुलसी के साथ तो शालिग्राम की पूजा होती ही है।यहां सवाल यह उठता है कि भगवान विष्णु शालिग्राम कैसे बन गए तो यहां वृंदा की कहानी कही व सुनी जाती है कि कैसे भगवान विष्णु ने वृंदा के पति जालंधर को मारने के लिए पतिव्रता वृंदा का शीलभंग किया और फिर कैसे वृंदा ने विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया।

आज वैकुंठ चतुर्दशी पर करेंगे ये खास उपाय तो धन-धान्य से भरेंगे भंडार और खुल जाएंगे मोक्ष के द्वार 
संपादक की पसंद

आज वैकुंठ चतुर्दशी पर करेंगे ये खास उपाय तो धन-धान्य से भरेंगे भंडार और खुल जाएंगे मोक्ष के द्वार 

आज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है जिसे वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ भोलेनाथ की पूजा भी की जाती है।माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और विष्णु का मिलन होता है और इसी दिन भोलेनाथ सृष्टि का भार विष्णु को सौंपते हैं और फिर कैलाश पर्वत पर चले जाते हैं। इसके साथ ही भगवान कार्तिकेय, राधा-दामोदर, तुलसी-शालिग्राम का पूजन भी किया जाता है।कार्तिक माह के दौरान जिन लोगों ने मासपर्यंत व्रत या संकल्प नहीं किया है, वह कार्तिक चतुर्दशी व पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान पर जाकर राधा-दामोदर का विशेष पूजन कर सकते हैं। कार्तिक मास में राधा-दामोदर के साथ शालिग्राम तथा तुलसी के पूजन का विशेष महत्व है।

11 नवंबर को है वैकुंठ चतुर्दशी, यूं शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव और विष्णु की पूजा, जानें महत्व व कथा  
संपादक की पसंद

11 नवंबर को है वैकुंठ चतुर्दशी, यूं शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव और विष्णु की पूजा, जानें महत्व व कथा  

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विधान है।इस बार वैकुंठ चतुर्दशी 11 नवंबर सोमवार को है। मान्यता है कि जो भी मनुष्य वैकुंठ चतुर्दशी को शिव और नारायण की पूजा करता है उसके सारे पाप कट जाते हैं।

वैकुंठ चतुर्दशी पर होता है हरि और हर का मिलन, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपते हैं भोलेनाथ  
संपादक की पसंद

वैकुंठ चतुर्दशी पर होता है हरि और हर का मिलन, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपते हैं भोलेनाथ  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी होती है। इस बार यह 11 नवंबर सोमवार को है। इस दिन भगवान शिव के साथ विष्णु की विशेष रूप से पूजा करने का विधान है।मान्यता है कि देवशयनी एकादशी को यानी चातुर्मास की शुरुआत में भगवान विष्णु, शिवजी को सृष्टि का भार सौंपकर चार माह की योग निद्रा के लिए चले जाते हैं। इन चार महीनों में सृष्टि का संचालन शिवजी करते हैं।देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं और वैकुंठ चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिवजी सृष्टि का भार फिर से भगवान विष्णु को सौंप कैलाश की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इस दिन शिवजी और विष्णुजी की विशेष पूजा करनी चाहिए।

Kartik Purnima 2019: मनोवांछित फल पाने के लिए इस दिन करें इन चीजों का दान, ऐसे करें पूजा  
संपादक की पसंद

Kartik Purnima 2019: मनोवांछित फल पाने के लिए इस दिन करें इन चीजों का दान, ऐसे करें पूजा  

हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव शंकर की पूजा की जाती है और माना जाता है कि इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने से व्यक्ति सात जन्म तक ज्ञानी और धनवान होता है।कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान-दान का भी विशेष महत्व है। कहते हैं कि इस दिन दान करने से उसका दुगुना फल मिलता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर मंगलवार को मनाई जाएगी।

Kartik Purnima 2019: भगवान विष्णु ने इसी दिन लिया था मत्स्य अवतार, ये है इससे जुड़ी कथा   
संपादक की पसंद

Kartik Purnima 2019: भगवान विष्णु ने इसी दिन लिया था मत्स्य अवतार, ये है इससे जुड़ी कथा   

इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 नवंबर मंगलवार को है।पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का अंत किया था और इसी खुशी में देवताओं ने दीप जलाए व दीप दान किया जिसकी वजह से इसे देव दीपावली कहते हैं और उत्तर भारत जैसे कि काशी में इसे धूमधाम से मनाया भी जाता है।दूसरी ओर कार्तिक पूर्णिमा को ही गुरु नानक जयंती यानी गुरु पर्व भी मनाया जाता है वहीं इस दिन भगवान विष्णु ने पहला अवतार, मत्स्य अवतार भी लिया था जिससे इस दिन का महत्व बढ़ जाता है।

Kartik Purnima 2019: इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी कार्तिक पूर्णिमा, जानें महत्व व मुहूर्त 
संपादक की पसंद

Kartik Purnima 2019: इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में मनेगी कार्तिक पूर्णिमा, जानें महत्व व मुहूर्त 

कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन बेहद खास होता है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। इस बार कार्तिक पूर्णिमा 12 मंगलवार को है।इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है जिसमें स्नान-दान का महत्व बढ़ जाएगा। वैसे भी कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व होता है और इस बार तो इसका महत्व ग्रह और नक्षत्र से बढ़ गया है।कार्तिक पूर्णिमा इस बार 12 नवंबर को मंगलवार के दिन भरणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रह-गोचरों के शुभ संयोग में मनाई जाएगी।

Devuthani Ekadashi 2019: चार माह की योग निद्रा से जागेंगे भगवान, ऐसे करें पूजा 
संपादक की पसंद

Devuthani Ekadashi 2019: चार माह की योग निद्रा से जागेंगे भगवान, ऐसे करें पूजा 

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि क्षीरसागर में चार माह की योगनिद्रा के बाद भगवान विष्णु इस दिन उठते हैं या जागते हैं। भगवान विष्णु के जागने से यह दिन खास हो जाता है और इस दिन इसीलिए उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है। कहते हैं कि पूजा से भगवान विष्णु बेहद प्रसन्न होते हैं।इस साल देवउठनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को है और इसी दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाएगी।

Devuthni Ekadashi 2019: इस दिन देवता मनाते हैं दीपोत्सव, भूलकर भी न करें ये गलतियां 
संपादक की पसंद

Devuthni Ekadashi 2019: इस दिन देवता मनाते हैं दीपोत्सव, भूलकर भी न करें ये गलतियां 

सबसे शुभ व मंगलकारी एकादशी देवउठनी एकादशी को ही माना जाता है। इस एकादशी का इतना महत्व इसलिए है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा के बाद जागते हैं और उनके जागने की खुशियां सब दीप जलाकर मनाते हैं।इस बार देवउठनी एकादशी 8 नवंबर शुक्रवार को है। माना जाता है कि सब एकादशियों में श्रेष्ठ इस एकादशी को व्रत करने वाले को वैकुंठ की प्राप्ति होती है।शास्त्रों में इस एकादशी के बारे में विस्तार से बताया गया है कि जिस तरह इस एकादशी पर व्रत व पूजा का करने का शुभ फल मिलता है ठीक उसी तरह इस दिन भूलकर भी कुछ गलतियां हो जाए तो दुर्भाग्य का सामना भी करना पड़ता है।

Tulsi Vivah 2019: इस दिन करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न और देंगे मनचाहा वरदान 
संपादक की पसंद

Tulsi Vivah 2019: इस दिन करेंगे ये खास उपाय तो भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न और देंगे मनचाहा वरदान 

दिवाली के बाद आने वाला बड़ा व महत्वपूर्ण पर्व है देवउठनी एकादशी। इस एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन चार माह की योग निद्रा के बाद भगवान विष्णु जागते हैं और उनके जागने के साथ ही शुभ कार्यों का शुभारंभ हो जाता है।वहीं इसी दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है जिसका बड़ा महत्व है। पूरे कार्तिक मास तुलसी की पूजा की जाती है, उसके पास दीपक जलाकर सुबह-सवेरे उसकी परिक्रमा की जाती है और फिर देवउठनी एकादशी पर शालिग्राम संग उसका विवाह कराया जाता है।

वृंदा ने दिया था भगवान विष्णु को श्राप, जानें फिर क्यों शालिग्राम स्वरूप से होता है उसका विवाह  
संपादक की पसंद

वृंदा ने दिया था भगवान विष्णु को श्राप, जानें फिर क्यों शालिग्राम स्वरूप से होता है उसका विवाह  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से तुलसी का विवाह धूमधाम से कराया जाता है। इस वर्ष तुलसी विवाह 8 नवंबर शुक्रवार को है।सभी तुलसी विवाह कराते हैं पर पहले यह जानना चाहिए कि तुलसी कौन है और क्यों उनका विवाह भगवान शालिग्राम से कराया जाता है साथ ही विष्णु को कैसे मिला शालिग्राम का स्वरूप।

अक्षय नवमी 2019: सौभाग्य प्राप्ति के लिए यूं पूरे विधि-विधान से करें आंवले के पेड़ की पूजा, जानें मुहूर्त व मंत्र  
संपादक की पसंद

अक्षय नवमी 2019: सौभाग्य प्राप्ति के लिए यूं पूरे विधि-विधान से करें आंवले के पेड़ की पूजा, जानें मुहूर्त व मंत्र  

कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की नवमी को अक्षय नवमी मनाई जाती है। अक्षय नवमी को ही आंवला नवमी भी कहते हैं। इस साल आंवला नवमी 5 नवंबर को है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु कार्तिक शुक्ल नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा की तिथि तक आंवले के पेड़ पर निवास करते हैं। इसीलिए इस दिन आंवले के पेड़ के अलावा भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है।

अक्षय नवमी 2019: पाना है सुख-समृद्धि का वरदान तो इस दिन विष्णु के साथ करें भोलेनाथ को प्रसन्न  
संपादक की पसंद

अक्षय नवमी 2019: पाना है सुख-समृद्धि का वरदान तो इस दिन विष्णु के साथ करें भोलेनाथ को प्रसन्न  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की विशेष रूप से पूजा करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करती हैं। माना जाता है कि प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का पर्व है आंवला नवमी।

गोवर्धन पूजा के दिन यहां होती है बलि की पूजा, जानें क्या कुछ होता है खास 
संपादक की पसंद

गोवर्धन पूजा के दिन यहां होती है बलि की पूजा, जानें क्या कुछ होता है खास 

माना जाता है कि इसी दिन भगवान वामन ने राजा बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दिवाली मनाई थी।विष्णु अवतार वामन ने तब बलि को अमर होने के वरदान देने के साथ ही कहा था कि जो भी इस दिन तुम्हारी पूजा करेगा वह हर तरह से सुखी होगा।