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`Lord Shiva` से सम्बंधित परिणाम

बुध प्रदोष व्रत: शिव के साथ यूं करें गणेश की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि के साथ बुद्धि का वरदान  
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बुध प्रदोष व्रत: शिव के साथ यूं करें गणेश की पूजा, मिलेगा सुख-समृद्धि के साथ बुद्धि का वरदान  

साल का दूसरा प्रदोष व्रत 22 जनवरी, बुधवार को है। बुधवार को पड़ने से यह प्रदोष व्रत बुध प्रदोष कहलाता है। माना जाता है कि बुध प्रदोष व्रत करके कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों की बुद्धि और स्वास्थ्य को ठीक कर सकता है।

मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सोमवार को ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा, चढ़ाएं ये खास फूल   
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मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए सोमवार को ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा, चढ़ाएं ये खास फूल   

ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि अगर सोमवार के दिन भगवान शिव-शंकर की पूजा की जाए और कुछेक उपाय किये जाए तो मनचाहे साथी का वरदान मिल जाता है।

आज है साल का पहला प्रदोष व्रत, यूं पूजा करने से मिलेगा सुख-समृद्धि व सौभाग्य का वरदान  
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आज है साल का पहला प्रदोष व्रत, यूं पूजा करने से मिलेगा सुख-समृद्धि व सौभाग्य का वरदान  

पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि बुधवार 8 जनवरी को है तो यह साल का पहला प्रदोष व्रत होगा जो बुधवार को पड़ने से बुध प्रदोष कहलाता है।भगवान शिव और पार्वती की पूजा से जुड़े इस पावन व्रत का फल प्रत्येक वार के हिसाब से अलग-अलग मिलता है।

पुत्रदा एकादशी पर विष्णु के साथ ही यूं करें भोलेनाथ की पूजा, सारे कष्टों से मिलेगी मुक्ति  
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पुत्रदा एकादशी पर विष्णु के साथ ही यूं करें भोलेनाथ की पूजा, सारे कष्टों से मिलेगी मुक्ति  

पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी पुत्रदा एकादशी सोमवार को है जिससे इस दिन भगवान विष्णु के साथ ही शिव शंकर की पूजा करने से मनचाहा फल मिल सकता है। यह बेहद शुभ संयोग बन रहा है जब भक्त को दोनों देवों का एक दिन पूजन करने का अवसर मिल रहा है।

वर्ष के अंतिम सोम प्रदोष पर ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा, इन उपायों से मिलेगा किस्मत का साथ 
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वर्ष के अंतिम सोम प्रदोष पर ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा, इन उपायों से मिलेगा किस्मत का साथ 

सोमवार को प्रदोष होने पर उसे सोम प्रदोष कहा जाता है और इस दिन विशेष रूप से व्रत-पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्त को मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।आज सोम प्रदोष के अवसर पर जो भी भक्त भगवान शिव की पूजा करेगा और व्रत रखेगा उस पर भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहेगी। आज यानी 23 दिसंबर को सोमवार के साथ-साथ साल 2019 का अंतिम प्रदोष व्रत भी है।प्रदोष व्रत के दिन शिव जी के साथ माता पार्वती की भी पूजा होती है। इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होकर आपकी सारी इच्छाओं को पूरा करते हैं।

सोम प्रदोष व्रत: इस व्रत को करने से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ, जानें महत्व व पूजा विधि  
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सोम प्रदोष व्रत: इस व्रत को करने से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ, जानें महत्व व पूजा विधि  

हम सब जानते ही हैं कि हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बड़ा महत्व है। हर माह में दो प्रदोष व्रत आते हैं। प्रदोष व्रत हर मास के त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। इस बार सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा गया है।प्रदोष के दिन शाम के समय विधि-विधान से भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस बार सोम प्रदोष का व्रत 9 दिसंबर सोमवार को पड़ रहा है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पूजा के साथ ही व्रत भी किया जाता है।

काल भैरव अष्टमी 2019: ऐसे करें काल भैरव को प्रसन्न, इस दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां 
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काल भैरव अष्टमी 2019: ऐसे करें काल भैरव को प्रसन्न, इस दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां 

माना जाता है कि भैरव बाबा की पूजा से संकट व शत्रु ही नहीं बल्कि भूत-पिशाच से जुड़ी बाधा व काल भी दूर हो जाते हैं और भक्त को किसी से भय नहीं रहता।यूं तो भगवान भैरवनाथ को खुश करना बेहद आसान है लेकिन अगर वे रूठ जाएं तो मनाना बेहद मुश्किल। इसीलिए इस दिन कुछ खास उपाय कर लें जिससे कि भैरव बाबा प्रसन्न होकर आपके सारे दुख दूर कर दे। वहीं इनकी पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां । 

 आज भैरव बाबा के विशेष श्रृंगार और विभिन्न स्वरूपों की पूजा से मिलेगा शुभ फल  
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आज भैरव बाबा के विशेष श्रृंगार और विभिन्न स्वरूपों की पूजा से मिलेगा शुभ फल  

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव ने ही काल भैरव के रूप में इस दिन अवतार लिया था। इसीलिए काल भैरव अष्टमी पर भैरव बाबा की विशेष पूजा की जाती है।काल भैरव की पूजा में कई बातों पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी होता है वरना पूजा का फल नहीं मिलता। वहीं इस बार काल भैरव अष्टमी 19 नवंबर मंगलवार को है।

काल भैरव अष्टमी 2019: भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए इस चीज का भोग लगाएं और करें ये खास उपाय   
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काल भैरव अष्टमी 2019: भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए इस चीज का भोग लगाएं और करें ये खास उपाय   

काल भैरव को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है। काल भैरव अष्टमी जिसे कालाष्टमी भी कहते हैं इस दिन इनका प्राकट्य हुआ था इसीलिए इनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।माना जाता है कि काल भैरव अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं और इनकी पूजा करने से घर से नकारात्मक शक्तियां भी दूर हो जाती है। साथ ही काल भैरव की पूजा से शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त होती है।इस बार काल भैरव अष्टमी 19 नवंबर मंगलवार को है। कहते हैं कि इस दिन पूजा करने के साथ ही अगर भैरव बाबा की पसंद का भोग लगाया जाए और कुछ खास उपाय किये जाए तो भक्त के सभी संकट दूर हो जाते हैं और मनोवांछित फल मिलता है।

 हर संकट से मुक्ति दिलाते हैं भैरव बाबा, शुभ मुहूर्त में पूजा करें और मनोवांछित फल पाएं 
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हर संकट से मुक्ति दिलाते हैं भैरव बाबा, शुभ मुहूर्त में पूजा करें और मनोवांछित फल पाएं 

हमारे हिंदू धर्म में भैरव बाबा की पूजा का विशेष विधान है और माना जाता है कि काल भैरव भगवान शिव का ही एक रूप है। हर तरह के संकट को दूर करने के लिए काल भैरव को पूजा जाता है।वहीं काल भैरव अष्टमी के दिन तो पूरे विधि-विधान से काल भैरव की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय किये जाते हैं ताकि संकटों से मुक्ति मिल सके।इस बार 19 नवंबर मंगलवार को काल भैरव अष्टमी मनाई जाएगी। काल भैरव अष्टमी को कालाष्टमी भी कहा जाता है और इस दिन शुभ मुहूर्त में सही विधि से पूजा करने से मनोवंछित फल मिल सकता है।

कालभैरव अष्टमी 2019: जानें आखिर कैसे बनें भैरव बाबा काशी के कोतवाल, ये है कथा  
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कालभैरव अष्टमी 2019: जानें आखिर कैसे बनें भैरव बाबा काशी के कोतवाल, ये है कथा  

मार्गशीर्ष माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी को काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है। काल भैरव भगवान शिव के क्रोधाग्नि का ही विग्रह रूप है। भैरव अष्टमी पर मध्याह्न में भगवान शिव के अंश से भैरव की उत्पत्ति हुई थी। इस बार काल भैरव अष्टमी 19 नवंबर मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से भैरव बाबा की पूजा करनी चाहिए जिससे जीवन में किसी तरह का कोई भय नहीं रहता।काल भैरव को शिव का पांचवां अवतार माना जाता है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है तो वहीं काल भैरव आपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक है।

जानें कब है भैरव अष्टमी, कैसे करें पूजा और इनकी उपासना से होते हैं क्या लाभ  
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जानें कब है भैरव अष्टमी, कैसे करें पूजा और इनकी उपासना से होते हैं क्या लाभ  

भगवान शिव का ही एक रूप है काल भैरव। कहते हैं कि इनकी पूजा व उपासना से भक्त के सभी संकट दूर हो जाते हैं। काल भैरव की साधना को अत्यंत कठिन माना जाता है।शास्त्रों के आधार पर माना जाता है कि मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को ही भगवान शिव भैरव रूप में प्रकट हुए थे इसीलिए इस दिन काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन काल भैरव के व्रत व पूजा का विशेष विधान है।कहते हैं कि भैरवाष्टमी या कालाष्टमी के दिन जो भक्त पूजा उपासना करता है उसके सभी शत्रुओं और पापी शक्तियों का नाश होता है और सभी प्रकार के पाप, ताप एवं कष्ट दूर हो जाते हैं।

आज वैकुंठ चतुर्दशी पर करेंगे ये खास उपाय तो धन-धान्य से भरेंगे भंडार और खुल जाएंगे मोक्ष के द्वार 
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आज वैकुंठ चतुर्दशी पर करेंगे ये खास उपाय तो धन-धान्य से भरेंगे भंडार और खुल जाएंगे मोक्ष के द्वार 

आज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है जिसे वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ भोलेनाथ की पूजा भी की जाती है।माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और विष्णु का मिलन होता है और इसी दिन भोलेनाथ सृष्टि का भार विष्णु को सौंपते हैं और फिर कैलाश पर्वत पर चले जाते हैं। इसके साथ ही भगवान कार्तिकेय, राधा-दामोदर, तुलसी-शालिग्राम का पूजन भी किया जाता है।कार्तिक माह के दौरान जिन लोगों ने मासपर्यंत व्रत या संकल्प नहीं किया है, वह कार्तिक चतुर्दशी व पूर्णिमा के दिन तीर्थ स्थान पर जाकर राधा-दामोदर का विशेष पूजन कर सकते हैं। कार्तिक मास में राधा-दामोदर के साथ शालिग्राम तथा तुलसी के पूजन का विशेष महत्व है।

देव दीपावली 2019: जानें आखिर कार्तिक पूर्णिमा को क्यों मनाई जाती है देव दीपावली, ये है इससे जुड़ी कथा 
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देव दीपावली 2019: जानें आखिर कार्तिक पूर्णिमा को क्यों मनाई जाती है देव दीपावली, ये है इससे जुड़ी कथा 

कार्तिक पूर्णिमा को स्नान-दान का महत्व है और भक्तजन गंगा स्नान के लिए काशी पहुंचते हैं वहीं दूसरी ओर काशी में इस दिन धूमधाम से देव दीपावली मनाई जाती है। इस बार 12 नवंबर मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी और इसी दिन देव दीपावली भी मनेगी। इस तरह देखा जाए तो कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और बढ़ जाता है।देव दीपावली के दिन गंगा पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना करने का विधान है जिससे लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। देव दीपावली के दिन काशी में गंगा के सभी घाटों पर दीपक जलाए जाते हैं। पूरी काशी दीयों की रोशनी से इस दिन जगमगा जाती है।

11 नवंबर को है वैकुंठ चतुर्दशी, यूं शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव और विष्णु की पूजा, जानें महत्व व कथा  
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11 नवंबर को है वैकुंठ चतुर्दशी, यूं शुभ मुहूर्त में करें भगवान शिव और विष्णु की पूजा, जानें महत्व व कथा  

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने के साथ ही भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का विधान है।इस बार वैकुंठ चतुर्दशी 11 नवंबर सोमवार को है। मान्यता है कि जो भी मनुष्य वैकुंठ चतुर्दशी को शिव और नारायण की पूजा करता है उसके सारे पाप कट जाते हैं।

वैकुंठ चतुर्दशी पर होता है हरि और हर का मिलन, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपते हैं भोलेनाथ  
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वैकुंठ चतुर्दशी पर होता है हरि और हर का मिलन, भगवान विष्णु को सृष्टि का भार सौंपते हैं भोलेनाथ  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी होती है। इस बार यह 11 नवंबर सोमवार को है। इस दिन भगवान शिव के साथ विष्णु की विशेष रूप से पूजा करने का विधान है।मान्यता है कि देवशयनी एकादशी को यानी चातुर्मास की शुरुआत में भगवान विष्णु, शिवजी को सृष्टि का भार सौंपकर चार माह की योग निद्रा के लिए चले जाते हैं। इन चार महीनों में सृष्टि का संचालन शिवजी करते हैं।देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं और वैकुंठ चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिवजी सृष्टि का भार फिर से भगवान विष्णु को सौंप कैलाश की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इस दिन शिवजी और विष्णुजी की विशेष पूजा करनी चाहिए।

आज है साल का आखिरी शनि प्रदोष व्रत, शिव और शनि की पूजा से दूर होंगे संकट 
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आज है साल का आखिरी शनि प्रदोष व्रत, शिव और शनि की पूजा से दूर होंगे संकट 

शास्त्रों में बताया गया है कि वार के अनुसार प्रदोष व्रत का अलग-अलग फल मिलता है।शनिवार के दिन जब प्रदोष व्रत पड़ता है तब वह शनि प्रदोष व्रत कहलाता है। शनिवार और मंगलवार के प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। 9 नवंबर यानी आज शनिवार के दिन प्रदोष व्रत का अद्भुत संयोग बन रहा है।इस शुभ योग में भगवान शिव और शनि की पूजा एवं व्रत करने से हर इच्छा पूरी होती है साथ ही इस व्रत से हर तरह के पाप भी खत्म हो जाते हैं। बता दें कि ये साल का तीसरा और आखिरी शनि प्रदोष है। इसके बाद अब मार्च 2020 में ऐसा संयोग बनेगा। 2020 में 5 बार शनि प्रदोष का योग बनेगा।

Kartik Purnima 2019: इस दिन भोलेनाथ की पूजा का है विशेष महत्व, भूलकर भी न करें ये गलतियां 
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Kartik Purnima 2019: इस दिन भोलेनाथ की पूजा का है विशेष महत्व, भूलकर भी न करें ये गलतियां 

कार्तिक मास का हिंदू धर्म में खासा महत्व है। वहीं कार्तिक पूर्णिमा को तो विशेष रूप से स्नान-दान किया जाता है, साथ ही कार्तिक पूर्णिमा पर कई नियमों का पालन भी किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा को डुबकी पूनम भी कहते हैं क्योंकि इस दिन तीर्थ स्थान पर पवित्र नदियों में डुबकी लगाने का भी महत्व है।माना जाता है कि इस दिन अगर सभी नियमों का पालन किया जाए तो ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा और गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा इसलिए कहा जाता है कि इस दिन ही भगवान शिव ने त्रिपासुर नामक राक्षस का अंत किया था।

अक्षय नवमी 2019: पाना है सुख-समृद्धि का वरदान तो इस दिन विष्णु के साथ करें भोलेनाथ को प्रसन्न  
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अक्षय नवमी 2019: पाना है सुख-समृद्धि का वरदान तो इस दिन विष्णु के साथ करें भोलेनाथ को प्रसन्न  

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की विशेष रूप से पूजा करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और भोजन करने से रोगों का नाश होता है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान प्राप्ति और संतान की मंगलकामना के लिए आंवले के पेड़ की पूजा करती हैं। माना जाता है कि प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करने का पर्व है आंवला नवमी।

शुक्र प्रदोष पर यूं करेंगे भोलेनाथ की आराधना तो मिलेगा शुभ फल, जानें मुहूर्त व पूजा विधि  
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शुक्र प्रदोष पर यूं करेंगे भोलेनाथ की आराधना तो मिलेगा शुभ फल, जानें मुहूर्त व पूजा विधि  

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शुक्रवार 11 अक्टूबर को है और इसी दिन शुक्र प्रदोष व्रत है। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।कहते हैं प्रदोष व्रत के दिन जो व्यक्ति भगवान शंकर की पूजा करता है और प्रदोष व्रत करता है, वह सभी पापकर्मों से मुक्त होकर पुण्य को प्राप्त करता है और उसे उत्तम लोक की प्राप्ति होती है।

गुरु प्रदोष पर पूरे विधि-विधान से करें भोलेनाथ की पूजा, ये है महत्व व शुभ मुहूर्त   
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गुरु प्रदोष पर पूरे विधि-विधान से करें भोलेनाथ की पूजा, ये है महत्व व शुभ मुहूर्त   

हम सब जानते ही हैं कि हर महीने के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है। गुरुवार का दिन होने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है।इस बार प्रदोष व्रत 26 सितंबर गुरुवार को है। चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में, यानी रात्रि के पहले प्रहर में, यानी सूर्यास्त के तुरंत बाद के समय में की जाती है और 26 सितंबर के दिन प्रदोष काल के समय त्रयोदशी तिथि रहेगी।

कुछ ऐसा है भगवान गणेश का परिवार, भिन्नताओं के बावजूद आपस में है प्यार 
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कुछ ऐसा है भगवान गणेश का परिवार, भिन्नताओं के बावजूद आपस में है प्यार 

शिवपुत्र कार्तिकेय का वाहन मयूर है, मगर शिवजी के गले में सर्प लटके रहते हैं। वैसे स्वभाव से मयूर और सर्प दुश्मन हैं। इधर गणपति का वाहन चूहा है, जबकि सांप मूषकभक्षी जीव है। पार्वती स्वयं शक्ति हैं, जगदम्बा हैं जिनका वाहन शेर है।मगर शिवजी का वाहन तो नंदी बैल है। परंतु नहीं, इन भिन्नताओं, शत्रुताओं और ऊंचे-नीचे स्तरों के बावजूद शिव का परिवार शांति के साथ कैलाश पर्वत पर प्रसन्नतापूर्वक रहता है।

हरतालिका तीज 2019 : पहली बार रख रही हैं व्रत तो इन बातों पर ध्यान दें, राशि अनुसार ऐसे करें भोले शंकर की पूजा  
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हरतालिका तीज 2019 : पहली बार रख रही हैं व्रत तो इन बातों पर ध्यान दें, राशि अनुसार ऐसे करें भोले शंकर की पूजा  

भादो मास के शुक्लपक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज व्रत रखा जाता है। यह व्रत हस्त नक्षत्र में होता है और इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं।

हरतालिका तीज 2019 : अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है ये व्रत, जानें पूजा-विधि व शुभ मुहूर्त   
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हरतालिका तीज 2019 : अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है ये व्रत, जानें पूजा-विधि व शुभ मुहूर्त   

भादो मास के शुक्लपक्ष की तृतीया को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए इस दिन व्रत रखती है। इस साल हरतालिका तीज 1 सितंबर को मनाई जाएगी। हरतालिका तीज मुख्यत: उत्तर भारतीय मनाते हैं।

हरतालिका तीज 2019 : सौभाग्यवती महिलाओं का खास पर्व है हरतालिका तीज, जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा  
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हरतालिका तीज 2019 : सौभाग्यवती महिलाओं का खास पर्व है हरतालिका तीज, जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथा  

इस साल हरतालिका तीज 1 सितंबर को मनाई जाएगी। हरतालिका तीज मुख्यत: उत्तर भारतीय मनाते हैं। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हस्त नक्षत्र में सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए इस पर्व को मनाती हैं।

गणेश चतुर्थी 2019 : जानें आखिर क्यों माता पार्वती ने शिशु गणेश को छोड़ा था जंगल में, ये है पौराणिक कथा 
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गणेश चतुर्थी 2019 : जानें आखिर क्यों माता पार्वती ने शिशु गणेश को छोड़ा था जंगल में, ये है पौराणिक कथा 

एक घने जंगल में शिशु गणेश को माता पार्वती छोड़कर चली गई। उस जंगल में हिंसक जीव ही घूमते रहते थे। वहां कभी-कभार ऋषि मुनि भी उस जंगल से गुजरते थे। उस भयानक जंगल में एक सियार ने उस शिशु को देखा और वह उसके पास जाने लगा।तभी उसी समय ही वहां से ऋषि वेद व्यास के पिता पराशर मुनि गुजरे और उनकी दृष्टि उस अबोध बालक पर पड़ी

हरतालिका तीज 2019 : इस दिन व्रत के साथ आजमाएं ये खास उपाय, दांपत्य जीवन में आएगी खुशहाली   
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हरतालिका तीज 2019 : इस दिन व्रत के साथ आजमाएं ये खास उपाय, दांपत्य जीवन में आएगी खुशहाली   

महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती की बालू या मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजन करती हैं।आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जहां इस व्रत से पति की लंबी आयु की प्राप्ति हो सकती है वहीं इस दिन आप कुछ खास उपाय करके अपने दांपत्य जीवन में खुशहाली भी ला सकती हैं।

हरतालिका तीज 2019 : इस व्रत को करवाचौथ से भी कठिन माना जाता है, भूलकर भी न करें ये गलतियां 
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हरतालिका तीज 2019 : इस व्रत को करवाचौथ से भी कठिन माना जाता है, भूलकर भी न करें ये गलतियां 

इस व्रत को करवाचौथ से भी कठिन माना जाता है क्योंकि करवाचौथ में तो महिलाएं पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात में चांद देखकर खाना खा लेती है, वहीं तीज के व्रत में तो पानी तक नहीं पीया जाता। अगले दिन सुबह ही यह व्रत खोला जाता है।

हरतालिका तीज 2019 : जानें आखिर कब है हरतालिका तीज, ये है शुभ मुहूर्त 
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हरतालिका तीज 2019 : जानें आखिर कब है हरतालिका तीज, ये है शुभ मुहूर्त 

जन्माष्टमी के बाद महिलाओं को इंतजार होता है हरतालिका तीज का। हरतालिका तीज का व्रत महिलाओं पति की दीर्घायु के लिए रखती है। हरतालिका तीज का यह त्योहार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में मनाया जाता है।

अजा एकादशी पर बना है अद्भुत संयोग, विष्णु के साथ करें भोलेनाथ की पूजा 
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अजा एकादशी पर बना है अद्भुत संयोग, विष्णु के साथ करें भोलेनाथ की पूजा 

जन्माष्टमी के दो दिन बाद ही अजा एकादशी का व्रत आता है। भादो मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी को अजा एकादशी व्रत रखा जाता है जो इस बार 26 अगस्त यानी सोमवार को है।हम सब जानते ही हैं कि एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है पर यह एकादशी सोमवार को है इसलिए आप इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा भी कर सकते हैं।

सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, ‘बोल बम’ से गूंजे शिवालय
राष्ट्रीय

सावन के आखिरी सोमवार पर मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़, ‘बोल बम’ से गूंजे शिवालय

सावन के आखिरी सोमवार पर आज शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। सभी भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए सुबह से मंदिरों के बाहर कतार में खड़े हैं। सभी शिवालय बोल बम के जयकारों से गूंज रहा है। 

विशेष संयोग के साथ आया है सावन का अंतिम सोमवार, ऐसे पूजा करें और मनचाहा वरदान पाएं 
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विशेष संयोग के साथ आया है सावन का अंतिम सोमवार, ऐसे पूजा करें और मनचाहा वरदान पाएं 

वहीं सावन के चौथे सोमवार को त्रयोदशी तिथि है यानी इस दिन सोम प्रदोष व्रत भी है जिससे इसका महत्व बढ़ जाता है। भगवान शिव को प्रदोष व्रत अत्यंत प्रिय है तो आप सावन सोमवार की व्रत पूजा के साथ ही सोम प्रदोष का व्रत रखके उसकी पूजा भी कर सकते हैं।

सावन में करिए दक्षिण की काशी का दर्शन, ये है इस मंदिर की महत्ता
यात्रा

सावन में करिए दक्षिण की काशी का दर्शन, ये है इस मंदिर की महत्ता

सावन के महीने में देशभर के शिवमंदिरों में शिवभक्तों की भारी भीड़ होती है। बारह ज्योतिर्लिंगों के अलावा प्रमुख शैव मंदिरों में सावन का उत्सव देखने को मिलता है। तेलंगाना राज्य के करीमनगर जिले में स्थित वेमुलवाड़ा स्थित राज राजेश्वरी मंदिर दक्षिण भारत के काशी के नाम से प्रसिद्ध है।

जानें भगवान शिव क्यों कहलाते हैं पशुपतिनाथ, क्या है कारण  
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जानें भगवान शिव क्यों कहलाते हैं पशुपतिनाथ, क्या है कारण  

सावन माह में सूर्य का नक्षत्र भ्रमण पुर्नवसु नक्षत्र के अंतिम चरण से पुष्य और अश्लेषा में रहता है। ये तीनों नक्षत्र कर्क राशि में आते हैं। कर्क जल तत्व की राशि है और इसका स्वामी चंद्र है। शिवजी चंद्र को अपने मस्तक पर धारण करते हैं। इस वजह से उन्हें चंद्र विशेष प्रिय है।

खास योग के साथ आया है सावन का तीसरा सोमवार, विशेष पूजा से भोलेनाथ को करें प्रसन्न
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खास योग के साथ आया है सावन का तीसरा सोमवार, विशेष पूजा से भोलेनाथ को करें प्रसन्न

सावन का आधा महीना बीत चुका है और आप लगातार भगवान भोलेशंकर को पूजा-अर्चना से प्रसन्न कर ही रहे होंगे। पर आज यानी 5 अगस्त को सावन के तीसरे सोमवार पर बड़ा ही खास योग बन रहा है। जी हां, आज सावन सोमवार के साथ ही नाग पंचमी भी है।

हरियाली तीज 2019 : आज पूजा के साथ करें ये खास उपाय, होगी मनचाहे फल की प्राप्ति   
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सावन के महीने का बड़ा महत्व है। इस पावन महीने में भगवान शिव को पूजा जाता है और साथ ही माता पार्वती के लिए भी हर मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। वहीं हरियाली अमावस्या के बाद आती है हरियाली तीज।

जानें हरियाली तीज का महत्व, शुभ मुहूर्त व पूजा-विधि, ऐसे मिलेगा मनोवांछित फल 
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हम सब जानते हैं कि हिंदू धर्म में तृतीया यानी तीज तिथि का बड़ा महत्व है। वहीं हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। इस बार शनिवार 3 अगस्त को मनाई जाएगी।

हरियाली तीज 2019 : जानें महिलाएं क्यों रखती है ये व्रत, किसकी करती है पूजा
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हिंदू धर्म में हरियाली तीज का बड़ा महत्व है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 03 अगस्त शनिवार को पड़ रहा है।

श्रावण 2019 : सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर ऐसे करें पूजा, कष्ट काटेंगे भोलेनाथ 
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सावन महीने में आने वाली शिवरात्रि को फाल्गुन महीने में आने वाली महाशिवरात्रि के समान ही फलदायी माना जाता है। तो चलिये बात करते हैं मासिक शिवरात्रि की। इस दिन भी भोलेनाथ की विशेष पूजा होती है। आज यानि 30 जुलाई को मासिक शिवरात्रि है जो सावन में आई है इसीलिए इस दिन पूजा का महत्व बढ़ गया है।

 तेज प्रताप अब बने कांवड़िया, शिव के भेष में चले बाबा धाम, देखें वीडियो  
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तेज प्रताप अब बने कांवड़िया, शिव के भेष में चले बाबा धाम, देखें वीडियो  

राजद सु्प्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। इनका एकदम नया ताजा वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि भोले शंकर के लुक में कांवड़ियों वाला वेश धारण करके तेज प्रताप बाबा धाम की यात्रा के लिए निकल चुके हैं।