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`550 Prakash parva` से सम्बंधित परिणाम

550 वां प्रकाश पर्व: यूं पूरे पारंपरिक तरीके से मनाएं गुरु नानक देव का प्रकाश पर्व, मिलेगा शुभ फल 
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550 वां प्रकाश पर्व: यूं पूरे पारंपरिक तरीके से मनाएं गुरु नानक देव का प्रकाश पर्व, मिलेगा शुभ फल 

कार्तिक पूर्णिमा के पावन दिन का बड़ा महत्व है। इसी दिन गुरु नानक देव जी की जयंती मनाई जाती है जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं। इस बार गुरु नानक देव जी का 550 वां प्रकाश पर्व है और इसे धूमधाम से मनाने की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।इस बार 12 नवंबर 2019 मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन श्री गुरु नानक देव साहिब का प्रकाशोत्‍सव मनाया जाएगा। गुरु नानक देव का प्रकाशोत्‍सव पर्व पवित्र भावनाओं के साथ मनाया जाने वाला उत्‍सव है।

550 वां प्रकाश पर्व: गुरु नानकदेव ने मक्का-मदीना में किया था ये चमत्कार, यूं दिया एकता का संदेश 
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550 वां प्रकाश पर्व: गुरु नानकदेव ने मक्का-मदीना में किया था ये चमत्कार, यूं दिया एकता का संदेश 

कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती जिसे गुरु पर्व या प्रकाश पर्व भी कहा जाता है धूमधाम से मनाई जाएगी। इस बार गुरु नानक देव की 550 जयंती है जिसे 550 वां प्रकाश पर्व के तौर मनाई जाएगी।आइये गुरु नानक जयंती के अवसर पर गुरु नानक देव जी की कुछ खास कहानियों व चमत्कारों के बारे में जानते हैं जिनसे उन्होंने समाज से कुरीतियों को दूर करने की कोशिश के साथ ही एकता का संदेश दिया।

550 वां प्रकाश पर्व: जानें हजूर साहिब सचखंड गुरुद्वारा नांदेड़ का महत्व, गुरु गोविंदसिंह जी ने यहीं ली थी आखरी सांस   
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550 वां प्रकाश पर्व: जानें हजूर साहिब सचखंड गुरुद्वारा नांदेड़ का महत्व, गुरु गोविंदसिंह जी ने यहीं ली थी आखरी सांस   

गोदावरी नदी के किनारे बसा शहर नांदेड़ हजूर साहिब सचखंड गुरूद्वारे के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहां हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं और मत्था टेककर स्वयं को धन्य समझते हैं।यहीं पर सन 1708 में सिक्खों के दसवें तथा अंतिम गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने प्रिय घोड़े दिलबाग के साथ अंतिम सांस ली थी। सन 1708 से पहले गुरु गोविंद सिंह जी ने धर्म प्रचार के लिए कुछ वर्षों के लिए यहाँ अपने कुछ अनुयायियों के साथ अपना पड़ाव डाला था।यहीं पर कुछ धार्मिक तथा राजनैतिक कारणों से सरहिंद के नवाब वजीर शाह ने अपने दो आदमी भेजकर उनकी हत्या करवा दी थी।

550 वां प्रकाश पर्व: बड़ी महिमा है नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारे की, गुरु नानकदेवजी ने यहां किये थे कई चमत्कार    
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550 वां प्रकाश पर्व: बड़ी महिमा है नानकमत्ता साहिब गुरुद्वारे की, गुरु नानकदेवजी ने यहां किये थे कई चमत्कार   

नानकमत्ता गुरुद्वारा उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में है जो कि सिखों का पवित्र व ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यहाँ हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड में स्थित सिखों के तीन प्रमुख तीर्थ स्थानों में से एक है। इस गुरुद्वारे के अलावा हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा और श्री रीठा साहिब गुरुद्वारा भी सिखों के पवित्र तीर्थ स्थानों में हैं।नानकसागर बाँध गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब के पास ही है इसलिये इसे नानक सागर के नाम से भी जाना जाता है। गुरुद्वारा नानकमत्ता साहिब के नाम से ही इस जगह का नाम नानकमत्ता पड़ा।

550 वां प्रकाश पर्व: जहां कड़वे रीठे को गुरु नानकदेव ने बना दिया था मीठा, वहीं बना रीठा साहिब गुरुद्वारा 
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550 वां प्रकाश पर्व: जहां कड़वे रीठे को गुरु नानकदेव ने बना दिया था मीठा, वहीं बना रीठा साहिब गुरुद्वारा 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। इस बार 12 नवंबर मंगलवार को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां जोरों से चल रही है। गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व भी कहा जाता है और इस बार तो गुरु नानक जी का 550 वां प्रकाश पर्व है तो इसे विशेष रूप से मनाये जाने के लिए देश भर के गुरुद्वारों में खास तैयारियां चल रही है।प्रकाश पर्व के अवसर पर आइये जानते हैं गुरु नानकदेव से जुड़ी ऐसी कहानियां जो उनके चमत्कार को दर्शाती है।

550 वां प्रकाश पर्व: जानें कब, क्यों और कैसे मनाते हैं गुरु नानक जयंती, क्या कुछ होता है खास 
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550 वां प्रकाश पर्व: जानें कब, क्यों और कैसे मनाते हैं गुरु नानक जयंती, क्या कुछ होता है खास 

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी के जन्मदिन के दिन गुरु पर्व या प्रकाश पर्व मनाया जाता है। इस दिन सिख समुदाय के लोग वाहे गुरु, वाहे गुरु जपते हुए सुबह-सुबह प्रभात फेरी निकालते हैं। गुरुद्वारे में शबद-कीर्तन करते हैं, रुमाला चढ़ाते हैं, शाम के वक्त लोगों को लंगर खिलाते हैं। गुरु पर्व के दिन सिख धर्म के लोग अपनी श्रृद्धा के अनुसार सेवा करते हैं और गुरु नानक जी के उपदेशों यानी गुरुवाणी का पाठ करते हैं।बता दें गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व और प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है। यह कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।

 सिख धर्म का दूसरा प्रमुख तख्त है पटना साहिब, यहीं हुआ था गुरु गोविन्दसिंह का जन्म  
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सिख धर्म का दूसरा प्रमुख तख्त है पटना साहिब, यहीं हुआ था गुरु गोविन्दसिंह का जन्म  

सिख इतिहास में पटना साहिब का खास महत्व है। सिखों के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म यहीं 22 दिसंबर, 1666 को हुआ था। सिख धर्म के पांच प्रमुख तख्तों में दूसरा तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब हैं।सिखों के आखिरी गुरु का न केवल यहां जन्म हुआ था, बल्कि उनका बचपन भी यहीं गुजरा था।यही नहीं सिखों के तीन गुरुओं के चरण इस धरती पर पड़े हैं। इस कारण देश व दुनिया के सिख संप्रदाय के लिए पटना साहिब आस्था का केंद्र रहा है।

550वां प्रकाश पर्वः जानें कब है गुरु नानक जयंती, इसका महत्व व मुहूर्त 
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550वां प्रकाश पर्वः जानें कब है गुरु नानक जयंती, इसका महत्व व मुहूर्त 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी की जयंती मनाई जाती है जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं। इस बार प्रकाश पर्व 12 नवंबर मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा।गुरु नानक जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को पंजाब के तलवंडी जो कि अब पाकिस्तान में हैं और जिसे ननकाना साहिब के नाम से भी जाना जाता है, में माता तृप्ता व कृषक पिता कल्याणचंद के घर हुआ।गुरू नानक जी की जयंती गुरुपूरब या गुरु पर्व सिख समुदाय में मनाया जाने वाला सबसे सम्मानित और महत्त्वपूर्ण दिन है। गुरू नानक जयंती के अवसर पर गुरु नानक जी के जन्म को स्मरण किया जाता है।

550वां प्रकाश पर्व: ये है भारत के प्रसिद्ध गुरुद्वारे, जानें इनसे जुड़ी खास बातें  
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550वां प्रकाश पर्व: ये है भारत के प्रसिद्ध गुरुद्वारे, जानें इनसे जुड़ी खास बातें  

हम सब जानते ही हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गुरु नानक जी की जयंती मनाई जाती है जिसे प्रकाश पर्व भी कहते हैं। इस बार प्रकाश पर्व 12 नवंबर मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा।आइये इस अवसर पर यहां हम जानते हैं प्रसिद्ध गुरुद्वारों के बारे में जो भारत में स्थित है और जिनका अपना ही महत्व है। इन गुरुद्वारों की यात्रा हर कोई कम से कम एक बार तो करना चाहता ही है।