हैदराबाद : सैरा नरसिम्हा रेड्डी जैसे स्वतंत्रता सेनानी की भूमिका निभा चुके मेगा स्टार चिरंजीवी को आज भी उनकी एक ख्वाइश और सपना पूरा नहीं होने का मलाल है। उनका कहना है कि 25 साल पहले अगर उनसे कोई यह पूछता कि आप आगे कौन सा किरदार निभाना चाहते हैं तो हर वक्त उनका जवाब होता था 'एक स्वतंत्रता सेनानी' का किरदार जो लोगों के दिमाग में सदैव बना रहे।

चिरंजीवी की पहले से दिली ख्वाइश रही है कि वह भगत सिंह का किरदार निभाए जो फिल्म यादगार बनकर रह जाए। अभी तक एक भी पठकथा लेखक या निर्देशक या फिर निर्माता भगत सिंह की कहानी लेकर उनके पास नहीं आए, जिससे उनकी ख्वाइश और सपना अधूरा ही रह गया।

हैदराबाद के एलबी स्टेडियम में रविवार को आयोजित प्री रिलीज फंक्शन में चिरंजीवी ने कहा कि कहानी जो भी हो, उसे अच्छी तरह से बूनकर सेट्स पर ले जाते हैं, लेकिन सैरा नरसिम्हा रेड्डी ऐसी कहानी नहीं है। करीब डेढ दशक से मेरे दिल में यह इच्छा थी।

उन्होंने बताया कि पुष्कर से ठीक पहले परचूरी ब्रदर्स उय्यालवाड़ा नरसिम्हा रेड्डी के बारे में बताया था, लेकिन सैरा के बारे में कर्नूल के साथ पड़ोस जिले के कुछ लोगों को छोड़कर ज्यादा लोग नहीं जानते। ऐसे में मुझे भी ज्यादा पता नहीं था। मैं ने जानकारों से भी पूछा तो सभी इस नाम से अंजान दिखे।

सैरा नरसिम्हा रेड्डी के बारे में कुछ पृष्ठ, बुर्रा कथाओं, लघु कथाएं हैं। उनके बारे में किसी भी क्षेत्र मेंबड़ी पब्लिसिटी नहीं हुई। परंतु कहानी सुनी, तो उन्हें अच्छी लगी और एक महान स्वतंत्रता सेनानी की लगी। लापता हुए पहले स्वतंत्रता सेनानी नरसिम्हा रेड्डी की कहानी सभी तक ले जाने के लिए फिल्म बनाई है।

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1857 में सिपाहियों के बगावत पर मंगल पांडे, झांसी लक्ष्मी बाई के बारे में जानते हैं। उसके बाद आजाद भगत सिंह, नेताजी से लेकर महात्मा गांधी तक कई योद्धाओं व त्यागमूर्तियों के बारे में पुस्तकों में पढ़ा है।

हमारे तेलुगु भाषी नरसिम्हा रेड्डी की कहानी दबकर रह गई। ऐसी कहानी के लिए मैं लंबे समय से इंतजार कर रहा था। परचूरी ब्रदर्स से कहा कि हम फिल्म बना रहे हैं। इस कहानी को पर्दे पर लाकर न्याय करने के लिए बड़े बजट की जरूरत होता है। 10-15 साल पहले मुझ पर 30 से 40 करोड़ से फिल्म बनाने वाले दिनों में सैरा फिल्म पर 60 से 70 करोड़ रुपये खर्च हुए होते थे।