हैदराबाद : दुनिया भर में कोरोना वायरस से पैदा भय के बीच सोमवार को उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने नए वायरसों का जल्द पता लगाने और महामारी के किसी प्रकोप को रोकने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल दियां नायडू यहां सीएसआईआर-कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र (सीसीएमबी) के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।

उपराष्ट्रपति ने कोरोना वायरस का जिक्र करते हुए कहा कि यह विभिन्न राष्ट्रों में फैल रहा है और स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि महामारियां और नए वायरसों से रोगों के प्रति हमारी संवेदनशीलता उजागर होती है।

स्थायी और समावेशी विकास की भारत की आकांक्षा के बीच राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी नवाचार प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र करते हुए नायडू ने निजी क्षेत्र से नवाचार वैज्ञानिक परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक कोष बनाने की अपील की जो सामाजिक चिंताओं को दूर करेगा।

वेंकैया नायडू ने कहा कि बुनियादी शोध के लिए भी वित्तपोषण बढ़ाया जाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर वैज्ञानिक प्रयास का परिणाम लोगों के जीवन में सुधार होना चाहिए। उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों और अन्य प्रयोगशालाओं से आग्रह किया कि वे गरीबी, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, प्रदूषण और पेयजल की कमी जैसी दुनिया के समक्ष विभिन्न चुनौतियों का हल खोजें।

नायडू ने भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान के सहयोग से सांबा महसूरी चावल की नयी किस्म विकसित करने के लिए संस्थान की सराहना की और वैज्ञानिकों से कृषि को व्यवहार्य बनाने के लिए अधिक संख्या में रोग और कीट-प्रतिरोधी फसलों को विकसित करने तथा उत्पादकता बढ़ाने के तरीके खोजने को कहा।

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ने सीसीएमबी जैसी संस्थाओं को सलाह दी कि वे बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर लोगों के बीच स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के संबंध में जागरूकता पैदा करें। नायडू ने कहा कि युवा वैज्ञानिकों को चुनौतीपूर्ण शोध कार्य करने और नए विचार पेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए।