हैदराबाद : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-हैदराबाद ने फंगस (कवक संक्रमण) के इलाज के लिए शरीर में दवा पहुंचाने की एक नयी प्रणाली विकसित की है। इसमें सुगंधित तेल के माध्यम से फंगस का उपचार किया जाता है। इतना ही नहीं यह प्रणाली ऐसे कवक संक्रमण का भी इलाज कर सकती है जिन्होंने पारंपरिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी क्षमता पैदा कर ली है।

आईआईटी- हैदराबाद ने एक विज्ञप्ति में बताया कि उसके पदार्थ विज्ञान और धातुकर्म अभियांत्रिकी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर मुद्रिका खंडेलवाल के नेतृत्व में किया गया यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘मटेरियलिया' में प्रकाशित हुआ है। इस शोध से प्राप्त परिणाम पर काम करते हुए शोधार्थी फंगस-रोधी स्वास्थ्य उत्पाद के नमूने विकसित कर रहे हैं। इसके लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गठित जैव प्रौद्योगिकी उद्योग शोध सहायक परिषद ने वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी है।

दवा पहुंचाने की वैकल्पिक विधि विकसित करने की जरूरत पर बल देते हुए खंडेलवाल ने कहा, ‘‘ कैनडिडा परिवार के फंगस की वजह से योनि, डायपर(सिंथेटिक लंगोटी), धावकों के पैर के अलावा नाखूनों में होने वाले फंगस संक्रमण को देखते हुए नयी प्रणाली की बहुत जरूरत है। इस फंगस की दवाओं के प्रति बनती प्रतिरोधी क्षमता धीरे-धीरे जीवन के लिए घातक हो सकती है।''

आईआईटी-हैदराबाद ने समस्या का समाधान ढूंढने के लिए प्राकृतिक उत्पादों का सहारा लिया है। शोधार्थियों ने सुगंधित तेलों को संपुटित करने के लिए पॉलीलैटिक एसिड माइक्रोकैपस्यूल का चुनाव किया। पॉलीलैटिक एसिड माइक्रोकैपस्यूल पूरी तरह जैविक अपशिष्ट हैं। चिकित्सा क्षेत्र में इनका बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।

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खंडेलवाल ने कहा कि आईआईटी-हैदराबाद एक फंगस-रोधी पैंटी लाइनर विकसित कर रहा है जो योनि के संक्रमण से बचाएगी। इसका उपयोग त्वचा पर फंगस के इलाज के लिए कच्चे पलस्तर के तौर पर भी किया जा सकता है।