हैदराबाद : कादंबिनी क्लब हैदराबाद की 330वीं मासिक गोष्ठी का सफल आयोजन संपन्न हुआ। मदन देवी कीमती सभागार रामकोट में गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रेस विज्ञप्ति में डॉक्टर अहिल्या मिश्र क्लब अध्यक्षा एवं मीना मुथा कार्यकारी संयोजिका ने आगे बताया कि इस अवसर पर डॉ अहिल्या मिश्र ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

साहित्यकार डॉक्टर हरजिंदर सिंह मुख्य अतिथि, कहानीकार डॉक्टर संगीता झा विशेष अतिथि, अवधेश कुमार सिन्हा संगोष्ठी संयोजक मंचासीन हुए। मंचासीन अतिथियों के कर कमलों से मां शारदे की छवि के समक्ष दीप प्रज्वलित किया गया। ज्योति नारायण ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । तत्पश्चात डॉक्टर हरजिंदर सिंह, डॉक्टर संगीता झा का क्लब की ओर से अंग वस्त्र एवं माला से सम्मान किया गया।

डॉ अहिल्या मिश्र ने स्वागत वक्तव्य में संस्था की संक्षिप्त में जानकारी दी तथा नव वर्ष 2020 से 'सदन के समक्ष साहित्यकार’ इस नूतन सत्र की घोषणा की। साथ ही बताया कि इस सत्र का आरंभ साहित्यकार डॉ हरजिंदर सिंह के साथ साक्षात्कार से होगा।

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अवधेश कुमार सिन्हा ने सत्र का परिचय देते हुए कहा कि अब तक कादम्बिनी क्लब में साहित्यकार के जन्म जयंती पुण्यतिथि को ध्यान में रखते हुए उन पर चर्चा की जाती थी। अब हम सीधे साहित्यकार से आमने-सामने रुबरु होंगे और उन्हीं के मुख से उनकी रचना प्रक्रिया को सुनेंगे।

अवधेश ने डॉक्टर हरजिंदर सिंह का परिचय देते हुए कहा कि समकालीन कविता में वर्तमान समय के भारत के 5 शीर्ष कवियों में आपका नाम निस्संदेह शुमार हैं। न सिर्फ़ इनकी कविताएं बल्कि कहानी, बाल साहित्य, सैकड़ों आलेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। कई भाषाओं में रचनाएं अनूदित हुई हैं। इस सत्र में प्रश्न उत्तर के माध्यम से प्रवीण प्रणव ( सत्र संचालक ) डॉ हरजिंदर सिंह से सभा को रूबरू कराएंगे ।

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प्रवीण प्रणव ने बातचीत आरंभ करते हुए कहा कि दादा से हम उनके बचपन के बारे में, उन पर विभिन्न भाषाओं के प्रभाव के बारे में, लेखन की शुरुआत कब कैसे हुई, गद्य कविता की ओर से झुकाव कैसे हुआ और आज के संदर्भ में आपसे जानना चाहेंगे।

डॉक्टर हरजिंदर सिंह ने अपने मन की बात को साझा करते हुए पीछे बीते समय को टटोला। उन्होंने कहा कि पढ़ाई कोलकाता में हुई। पिता सरकारी वाहन चालक थे लेकिन संस्कार और संस्कृति से परिवार संपन्न था। बांग्ला में विपुल साहित्य लेखन हुआ है। वहाँ कोई भी ऐसा साहित्यकार नहीं है जिसने बच्चों के लिए ना लिखा हो। पठन-पाठन के साथ मेरी भी लेखन में रुचि आने लगी और बाल साहित्य लेखन से मुझे अपार संतुष्टि मिलती थी।

विज्ञान की दुनिया से जुड़ा हूँ पर सोचता हूं कि मुझे अपने अंदर समाज को ढूंढना चाहिए। मैं अपनी कविता में मेरी तकलीफ दर्शाता हूं। मैं स्वस्थ समाज चाहता हूं। प्रवीण के पूछने पर कि दादा आपकी कविता पढ़ने के बाद नींद उड़ जाती है... साहित्यिक गोष्ठियों से दूरी बनी रही… तथा मुक्त छंद ही आपने चुना इसकी कोई खास वजह रही इस पर उन्होंने कहा कि प्रेम कविताएं मैंने भी लिखी है पर कहीं ना कहीं मनुष्यता के प्रति गहरा लगाव और चिंताएँ भी हैं। हिंदी से औपचारिक रूप से नहीं जुड़ा हूं।

हैदराबाद में अवश्य गोष्ठियों में आमंत्रित होता रहा हूं। हिंदी की मुख्यधारा में लय की कमी मेरी कमजोरी रही है। मानता हूं कि कविता में बौद्धिक तत्व न हों तो वह किसी काम की नहीं। कहानी लेखन में समय देना पड़ता है इसलिए कहानी लेखन की ओर झुकाव कम है। आधुनिक होना भी अपने साथ सीमाओं को लेकर आता है।

डॉ अहिल्या मिश्र, सरिता सुराणा ने सभा की ओर से प्रश्न पूछे। दादा ने कहा कि तर्कशीलता कई तरह की होती है। हमें उसका सम्मान करना चाहिए। हम किसी को चोट नहीं पहुँचाए। विभा भारती ने कहा कि चर्चा बहुत अच्छी लगी। लेखक ने यादों को टटोलते हुए प्रश्नों का समाधान किया। जो भी वस्तुस्थिति रही जीवन में उसे बताया । मीना मुथा ने सत्र का आभार व्यक्त किया। डॉ आशा मिश्रा ‘मुक्ता’ का सहयोग संगोष्ठी में बना रहा। दादा ने चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया।

कवि गोष्ठी

दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी हुई। डॉक्टर संगीता झा, श्रुतिकांत भारती और सुरेश जैन मंचासीन हुए। भंवरलाल उपाध्याय ने संचालन किया। भावना पुरोहित, विजया स्याल, देवाप्रसाद मायला, शशि राय, सुनीता लुल्ला, गोविंद मिश्र, चंद्रप्रकाश दायमा, रवि वैद, सीताराम माने, कुंजबिहारी गुप्ता, ज्योति नारायण, दीपक दीक्षित, लक्ष्मीकांत जोशी, पुरषोत्तम कडेल, तनीषा सांखला, एल अंजना, सत्यनारायण काकड़ा, डॉ अर्चना झा, अवधेश कुमार सिन्हा, प्रवीण प्रणव, मिलिंद भारती, दर्शन सिंह, सुरेश जैन, डॉक्टर संगीता झा लाडली मोहन धानुका, सरिता सुराणा, संतोष रजा, डॉक्टर गीता जांगीड़, मीना मुथा ने अपनी रचनाएं पढ़ी। डॉ अहिल्या मिश्र ने अध्यक्षीय काव्य पाठ किया।

श्रीनिवास साबरीकर, मनोज कुमार मिश्र, भूपेंद्र मिश्रा, सुख मोहन अग्रवाल, दयाल चंद अग्रवाल, सुषमा बैद, ज़या तेजस्विनी सांखला, सरिता अग्रवाल की उपस्थिति रही । डॉक्टर संगीता ने संस्था को साधुवाद दिया। शशि राय को क्लब की ओर से सम्मान के रूप में भेंट वस्तु प्रदान की गई। डॉ अर्चना झा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। सभी ने एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दी।