नई दिल्ली : राजनीतिक दल, जन संगठनों के नेताओं से लेकर आम आदमी और सामाजिक कार्यकर्ता तक सभी हैदराबाद में दिशा की गैंगरेप के बाद निर्मम हत्या करने वालों को खुलेआम फांसी देने की मांग कर रहे हैं।

रेप के मामलों में विश्व के कितने देशों में कड़ी सजा अमल में है और क्या उसका फायदा मिल रहा है? आदि विषयों पर गौर करने की जरूरत है। विश्व में संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा चिन्हित 195 देशों में से केवल 10 देशों में रेप मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है। शरिया कानून अमल रहने वाले इस्लामिक देशों में कड़ी सजाओं का प्रावधान अधिक हैं।

सउदी अरब

एक समय था जब रेप के मामले में दोषियों को सार्वजनिक रूप से पत्थरों से मार दिया जाता था और इसे एक्जिक्यूशन त्रू स्टोन्स कहा जाता था। दोषी के मरने तक तकलीफ पहुंचाने के इस्लाम धर्म के अनुसार यह सजा दी जाती थी। उसके बाद खुलेआम दोषियों को गला रेत दिया जाता था। परंतु अब वहां भी इस तरह की क्रूर सजा नहीं दी जा रही है। सार्वजनिक रूप से 80 से एक हजार कोड़े और 10 साल के लिए जेल की सजा सुनाई जा रही है। अवैध संबंध के मामले में पुरुषों के साथ महिलाओं को भी सार्वजनिक रूप से कोड़े मारने का प्रावधान है।

इरान में फांसी

इस्लामिक देश इरान में कई अपराधों के साथ रेप मामले में फांसी दी जाती है। उस देश में फांसी की सजा सुनाए जाने वाले मामलों में 10 से 15 फीसदी रेप से जुड़े मामले होते हैं। रेप के मामले में पीड़िता मुआवजा लेकर अपराधियों को माफ कर सकती हैं। ऐसे मामले में 100 कोड़े और कुछ मौकों पर सामान्य जेल की सजा सुनाई जा रही है।

मिस्र, यूएई, अफगान में सजा-ए-मौत

मिस्र के साथ यूएई के देशों में रेप मामले में फांसी की सजा सुनाई जा रही है। दुबई में आपराधियों को पकड़ने के सात दिन के भीतर फांसी दी जाती है। अफगानिस्तान में रेप के मामले में अपराधियों के सिर में गोली मारी जाती है। आरोपी के पकड़े जाने के चार दिन के भीतर सजा अमल की जाती है।

इजराइल

कम से कम चार और अधिकतम 16 साल की कारावास की सजा सुनाई जाती है। अब तक पीड़िता से शादी करने का मौका दिया जाता था। अब अधिकांश को कारावास की सजा सुनाई जा रही है।

चीन

बड़े भ्रष्टाचार और रेप के कुछ मामलों में ही फांसी की सजा का प्रावधान है। इससे पहले एक गैंगरेप के मामले में चार लोगों को फांसी देने के बाद वे निर्देष पाए गए। तब से अपराध की तीव्रता के आधार पर सोच-समझकर फांसी की सजा सुनाई जा रही है।

रूस

रेप के मामले में तीन से छह साल की जेल सुनाई जा रही है। पीड़िता अगर 18 साल से कम आयु वाली हैं तो अपराधियों को चार से 10 साल तक सजा सुनाई जाती है। रेप की वजह से अगर पीड़िता की मृत्यु होती है तो 8 से 15 साल तक सजा बढ़ेगी। अगर मरने वाली पीड़िता 14 साल से कम यानि नाबालिग हैं तो सजा 12 से 15 साल तक बढ़ सकती है।

निदरलैंड

रेप के अलावा यौन उत्पीड़न का शिकार बनाने और बिना अनुमति के चुंबन लेने पर रेप ही माना जाता है। चार से 15 साल तक जेल की सजा सुनाई जाती है। पीड़िता की मृत्यु होने पर 15 साल की सजा सुनाई जाएगी। वेश्याओं को प्रताड़ित करने पर चार साल तक जेल हो सकती है।

फ्रांस

रेप के मामले में 15 साल तक कारावास की सजा का प्रावधान है। पीड़िता 15 साल से कम आयु वाली हैं तो 20 साल की सजा सुनाई जाती है। पीड़िता के गंभीर रूप से घायल होने या मरने पर 30 साल तक जेल की सजा सुनाई जाती है। कड़ी सजा देने से किसी भी देश में रेप के मामले नहीं घट रहे हैं।

सामाजिक संगठनों का आरोप है कि फांसी की सजा सुनाने से साक्ष्यों को मिटाने के तहत ही पीड़ितों की हत्या की जा रही है। दिशा की हत्या भी उसी के तहत हुई है। महिलाओं को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के साथ शरारती तत्वों के लिए काउंसलिंग करना, लोगों में सामाजिक जागरुकता लाने से ही रेप जैसी घटनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है।