तेलंगाना में आरटीसी की हड़ताल ने रचा इतिहास, 51वें दिन भी जारी

सिर के बाल मुंडवाकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कर्मचारी - Sakshi Samachar

हैदराबाद : तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) कर्मचारियों की हड़ताल तेलंगाना में इतिहास रचा है। देश के इतिहास में लंबी हड़ताल होने का कीर्तिमान दर्ज किया है। तेलंगागा में आज 51वें दिन भी हड़ताल जारी है। इसके चलते लोगों को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

आरटीसी के 49,300 कर्मचारियों से जुड़ा होने के कारण संसद सत्र में भी टीएसआरटीसी हड़ताल की गूंज उठी है। इसके चलते आरटीसी की हड़ताल की ओर पूरे देश की नजर गई है। एक समय मेें ऐसे लगा कि आरटीसी की हड़ताल का समाप्त हो जाएगी, मगर राह भटक गयी या भटका दिया गया। सार्वजनिक हड़ताल (सकल जनुल सम्मे) के बाद तेलंगाना आरटीसी की हड़ताल मुख्य केंद्र बिंदु बन गई। आरटीसी की हड़ताल की गेंद अब मुख्यमंत्री केसीआर के पाले में हैं। केसीआर के फैसले ओर पूरे तेलंगाना की नजरें लगी हुई है।

इसी क्रम में वेतनमान की समय सीमा समाप्त होने के बाद कर्मचारी संगठनों ने सरकार नये वेतनमान को लागू करने का सरकार से आग्रह किया। साथ ही हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। ऐसा होना साधारण सी बात है। मगर इस बार हालत पूरी तरह से बिगड़ गई। इसके लिए दशहरा मूहर्त कारण बना। हर दिन कर्मचारियों की हड़ताल ने जोर पकड़ा मगर अचानक घटित घटनाक्रम के चलते आटीसी जेएसी ने अपने फैसले में नरमी दिखाई।

हड़ताल के कारण डिपो में बसें

पहले जेएसी ने घोषणा की कि सरकार के झूकने तक हड़ताल जारी रहेगी। इसके चलते कर्मचारी जेएसी के साथ हो गये। इसीलिए तीन बार सरकार ने ड्यूटी में लौट आने का आह्वान मगर कर्मचारी नहीं माने। इस दिशा में लिए हड़ताल की नई कार्यप्रणाली घोषित की। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अनेक बार सरकार को फटकार भी लगाया गया।

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साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार और कर्मचारियों को हर दिन लोगों को हो रही मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए हड़ताल पर पुनर्विचार करने की सलाह दी। मगर अचानक यह मामला लेबर कोर्ट को स्थानांतरित किये जाने के कारण जेएसी ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया। क्योंकि लेबर कोर्ट में ऐसे मामले की सुनवाई पूरी होने तक तीन महीने का समय लगने की संभावना है।

इसके चलते जेएसी के नेताओं पर कर्मचारियों का दबाव बढ़ता गया। इसके चलते जेएसी ने हड़ताल समाप्त करने और बिना शर्त ड्यूटी पर लेने की शर्त रखी। घोषणा के अगले दिन कर्मचारी ड्यूटी पर ज्वाइन होने के लिए गये। मगर अधिकारियों ने कर्मचारियों को ड्यूटी पर लेने से इंकार किया। साथ ही उनसे कहा गया है कि सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश आये तक ड्यूटी पर नहीं लिया जाएगा।

तेलंगाना में हड़ताल के दौरान 30 कर्मचारियों की विभिन्न कारणों से मौत हो गई। इनमें से चार कर्मचारियों ने सरकार के रवैये से नाराज होकर आत्महत्या कर ली। अन्य कर्मचारियों की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। हड़ताल के कारण लोगों को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी कर्मचारियों के आंदोलन को जन सामान्य की ओर से समर्थन मिलता जा रहा है। दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के परिवारों में चिंता देखी जा रही है। इसी चिंता में कर्मचारियों की मौत हो गई है। जेएसी ने भरोसा दिया कि मृतक परिजनों को आवश्यक मदद की जाएगी। इसी क्रम मे कुछ लोगों ने चंदा भी वसूल करना आरंभ कर दिया। कुछ कर्मचारी तो रोज-मजदूरी पर भी गये।

संयुक्त आंध्र प्रदेश में आरटीसी की खास पहचान थी। गिनिस रिकॉर्ड में भी एपीएसआरटीसी का नाम दर्ज हुआ। विभाजन के बाद अब टीएसआरटीसी में निजीकरण की प्रवेश कर रही है। होईकोर्ट ने लगभग 50 फीसदी रूटों के निजीकरण को हरी झंडी दिखाई है। जबकि आंध्र प्रदेश की वाईएस जगन की सरकार ने आटीसी को सरकार में विलय करने के लिए कमेटी गठित की है।

दूसरी ओर कर्मचारियों को ड्यूटी पर नहीं लेते देख जेएसी ने हड़ताल को जारी रखने की घोषणा की है। साथ ही जेएसी ने आज एमजीबीएस के सामने महिला कर्मचारियों के साथ विरोध करने का आह्वान किया। केसीआर के रवैये की सभी विपक्षी दलों ने निंदा की है।

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