हैदराबाद : आरटीसी रूटों के निजीकरण करने के तेलंगाना कैबिनेट फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती याचिका दायर करने वाले प्रो पी विश्वेश्वर राव ने हाईकोर्ट के फैसले पर असंतोष व्यक्त किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर वेहिकल कानून के अनुसार परिवहन व्यवस्था पर सरकार को रूटों को निजीकरण करने के फैसला लेने का अधिकार है। फसले के बाद याचिकाकर्ता विश्वेश्वर राव ने कहा कि तेलंगाना में टीएसआरटीसी नहीं है। ऐसे समय में रूटों को निजीकरण कैसे किया जा सकता है? हाईकोर्ट का फैसला असैवंधानिक है। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

उन्होंने शुक्रवार को मीडिया से कहा कि हर दिन कोर्ट में अनेक प्रकार की याचिका दायर किये जाने पर चेतावनी देने वाले मुख्य न्यायमूर्ति न्यायाधीश अब यह फैसला कैसे देते हैं? इस फैसले को कैसे देखा जाये? ऐसे लगता है कि हाईकोर्ट सेक्रसी के साथ काम कर रही है।

याचिकाकर्ता ने सवाल किया कि मुख्य सचिव के खिलाफ कोर्ट का अवमानना है। मंत्रिमंडल का प्रस्ताव अलग है। आज फिर एक और शपत्र पथ दिये तो कैसे लेत है? प्रधान न्यायमूर्ति ने सवाल किया है कि गोपनीय नोट दिये है। इसे मुझे पढ़ना है या नहीं, कहते हुए ही बिना कुछ पढ़े ही फैसला दिया गया है।

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विश्वेश्वर राव ने कहा कि प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार चाहे कैसा भी फैसला ले, उसे सवाल करने का हर नागरिक को अधिकार है। उसकी समीक्षा करने का अधिकार कोर्ट को है। ऐसे 27 फैसलों की प्रतिलिपी मैंने कोर्ट को दी है। मगर कोर्ट ने समीक्षा करने की जरूरत नहीं कहते हुए फैसला दिया है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि तेलंगाना में टीएसआरटीसी ही नहीं है। इस दौरान आरटीसी में 33 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार का है। यदि 5,100 रूटों का निजीकरण किया गया तो हजारों कर्मचारियों का भविष्य का क्या होगा? अब तक तेलंगाना में 28 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।

इस फैसले को देखने पर लगता है कि हाईकोर्ट को मानवीय दृष्टिकोण से देखना चाहिए था। कर्मचारी और आरटीसी के बारे में बिना विचार किये रूटों को निजीकरण करने का मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है। मंत्रिमंडल का असैवंधानिक है। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।