हैदराबाद : कादम्बिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार को हिंदी प्रचार सभा परिसर नामपल्ली में कादम्बिनी क्लब की 328वीं मासिक संगोष्ठी एवं दीपा कृष्णद्वीप की पुस्तक 'मेरी सखी मेरा कलम' का लोकार्पण संपन्न हुआ|

प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए क्लब अध्यक्षा डॉ अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजिका मीना मूथा ने आगे बताया कि इस अवसर पर प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ संगीता व्यास (हिंदी विभागाध्यक्ष, पीजी कॉलेज सिकंदराबाद) ने की| मुख्य अतिथि वीणा धगट, संगोष्ठी सत्र संयोजक अवधेश कुमार सिन्हा एवं डॉ अहिल्या मिश्र मंचासीन हुए| डॉ रमा द्विवेदी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा मंचासीन अतिथियों के करकमलों से दीप प्रज्ज्वलन किया गया|

डॉ अहिल्या मिश्र ने स्वागत भाषण में कहा कि क्लब की निरंतरता का श्रेय त्रयनगर के रचनाकारों की उपस्थिति को जाता है| युवा पीढ़ी साहित्य से जुड़े यही हमारा प्रयास है| संगोष्ठी सत्र में शीर्षर्थ लोगों को हम याद करते हैं, उनके व्यक्तित्व-कृतित्व से परिचय कराया जाता है| साथ ही नवांकुरों को प्रोत्साहित भी किया जाता है|

पुस्तक ‘मेरी सखी मेरा कलम’ का लोकार्पण करते हुए साहित्यकार 
पुस्तक ‘मेरी सखी मेरा कलम’ का लोकार्पण करते हुए साहित्यकार 

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संगोष्ठी सत्र का सञ्चालन करते हुए अवधेश कुमार सिन्हा ने सुदामा पांडेय 'धूमिल' का संक्षिप्त परिचय दिया| उन्होंने कहा कि कवि धूमिल का जन्म 9 नवम्बर 1936 को हुआ| छोटी उम्र में ही घर की ज़िम्मेदारियों का बोझ कन्धों पर आ गया| महज मैट्रिक पास धूमिल के लेखन में वे जिस परिवेश से आये उसी का चिंतन मंथन नज़र आता है| कुल तीन किताबें लिखी जिसमें 'सड़क से संसद तक' विशेष चर्चा में रही| शेष दो किताबें उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित हुई| किताबों की संख्या बढ़ाने से कुछ नहीं होता| गुणवत्ता चाहिए, शब्द चाहिए, शब्द के अर्थ चाहिए| शब्दों का प्रयोग साहित्य का शिल्य होता है| धूमिल मुलम्मा लगाना नहीं जानते थे| वे कहते कविता भाषा में आदमी होने की तमीज है| शब्द किस तरह कविता बनाते हैं यह धूमिल को पढ़ने के बाद पता चलता है| स्वतंत्रता पूर्व कई सपने देख, आज भी हालात वहीँ के वहीँ हैं|

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सहसंयोजक डॉ. आशा मुक्ता मिश्र ने कहा कि नियों के अंगों का उपमान दिया जाना क्या धूमिल के लिए शोभायमान है? इस समय की परिस्थितियां कुछ ऐसे शब्दों के उपयोग को बाध्य कर देती है| धूमिल स्त्री विरोधी थे यह बात नहीं हैं| उन्हीं के समकालीन सुदामा तिवारी नामक एक और रचनाकार थे| एक ही नाम के कारण फिर सुदामा पांडेय ने 'धूमिल' उपनाम को जोड़ा| जयशंकर प्रसाद से धूमिल प्रेरित थे|उस समय धूमिल, बाबा नागार्जुन को खूब पसंद किया गया| दुष्यंत कुमार त्यागी, अज्ञेय, गजानन माधव मुक्तिबोध भी लिख रहे थे|

डॉ रमा द्विवेदी ने 'मेरे घर में पांच जोड़ी आँखें है' गजानन-पाण्डे ने 'कवि 1970' मंजुलता जैन ने 'प्रौढ़शिक्षा' डॉ. गीता जांगीड ने 'किस्सा जनतंत्र का' डॉ सरिता गर्ग ने 'मोचिनामा' इन धूमिल की रचनाओं का पाठ किया गया| सुनीता लुल्ला ने कहा कि धूमिल ने अपने समय की स्थितियों को शिद्दत से कविताओं में चित्रित किया है| बेरोजगारी की बात हो, सामाजिक-राजनीतिक समस्याएं हो बेबाक ढंग से शब्दबहद किया है| कही कही शब्दचयन हमें आपत्तिजनक महसूस हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए वे परिस्थितियां कही कवि लेखक को विवश कर देती है|

डॉ अहिल्या मिश्र ने कहा कि कविता एक सार्थक व्यक्तव्य होती है, शब्दों को आग देने वाला वजनदार कवि था| डॉ संगीता व्यास ने कहा कि उन्होंने जो देखा समाज के सामने रखा| कहीं भी लीपापोती नहीं की| भावों सजाने संवारने के बजाय स्पष्ट शब्दों में हालात को रखते गए जो कि उनका स्वभाव था| ऐसे संगोष्ठी सत्र निश्चित ही सराहनीय प्रयास है| तत्पश्चात क्लब की ओर से डॉ व्यास का शौल माला व रजतजयंति पत्रिका प्रदान कर सम्मान किया गया |

दीपा कृष्णद्वीप की कृति 'मेरी सखी मेरा कलम' के लोकार्पण सत्र में लेखिका दीपा, पुस्तक प्रस्तुता डॉ. रमा द्विवेदी एवं लोकार्पण कर्त्ता डॉ अहिल्या मिश्र मंचासीन हुई| डॉ रमा द्विवेदी ने पुस्तक परिचय देते हुए कहा कि लेखिका दीपा की यह प्रथम कृति है जिसमें कहानी और कवितायें दोनों ही सामनीय है| स्पीच थेरेपिस्ट होते हुए साहित्य की ओर झुकाव प्रशंसनीय है|

पुस्तक समर्पित

दीपा ने अपने माता-पिता को पुस्तक समर्पित की और विशेष बात यह है कि इनके मित्रों ने इसे प्रकाशित किया है जो यह दर्शाता है कि लेखिका ने अपने प्रेम स्नेह व मिलनसार स्वभाव से सबसे अपनत्वपूर्ण सम्बन्ध निभाए हैं और निभाती रहेंगी| श्री वीणा धगट एवं पति हेमकांत व मित्रगण की प्रेरणा इस संग्रह को पाठकों तक पहुंचाने में सफल रही है|

डॉ अहिल्या मिश्र ने कहा कि दीपा आरम्भ से ही कादम्बिनी से जुडी है और कुछ न कुछ लिखने कि चाहत ही उसे यहां तक ले आई है| अनेक साधुवाद! वीणा धगट ने कहा कि बेटी दीपा को लिखने का शौख शुरू से रहा, आज उसका सपना पूर्ण हुआ| हेमकांत ने कहा कि दीपा जो करना चाहती है उसे स्वतंत्र माहौल मिला और स्वछन्द उड़ान की तरह वह लेखनकार्य में व्यस्त होने लगी| तत्पश्चात तालियों की गूँज में डॉ. मिश्र, डॉ रमा की करकमलों से पुस्तक लोकार्पण हुआ|

दीपा कृष्णदीप ने व्यक्तव्य में कहा कि वह अध्यात्म से जुडी हैं और प्रेम करना व सरल जीवन उनके गुरु रूपी पिता ने उन्हें सिखाया है| राधा-कृष्णा का प्रेम, प्रकृति प्रेम आदि का ज़िक्र उन्हें ऊर्जा प्रदानकर्त्ता है| कादम्बिनी क्लब के प्रति उन्होंने आभार व्यक्त किया| डॉ व्यास ने कहा कि दीपा ने संतुष्टि को ही सुखी माना है यही उनकी रचनाओं का आधार है| दीपा हेमकांत की ओर से क्लब पदाधिकारी एवं सहयोगियों का सम्मान किया गया| डॉ रमा ने दीपा का शॉव्ल माला से सम्मान किया| प्रदीप शर्मा ने अपने विचार रखें|

कविगोष्ठी का संचालन डॉ मदन देवी पोकरणा ने किया| मंच पर चंद्रप्रकाश दायमा, सौरभ शर्मा, डॉ मिश्र उपस्थित थे| इसमें भावना पुरोहित, शिवकुमार तिवारी कोहिर, लीला बजाज, सरिता सुराणा जैन, शिल्पी भटनागर, संतोष रजा, सदानंद लाल, सुषमा बैद, डॉ गीता जांगीड, डॉ रमा द्विवेदी, सुनीता लुल्ला, डॉ अहिल्या मिश्र, सौरभ शर्मा, मीना मूथा ने काव्य पाठ किया| चंद्रप्रकाश दायमा ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया| अवधेश कुमार सिन्हा ने प्रवीण प्रणव को युवारत्न सम्मान व डॉ रमा द्विवेदी को भाषा रत्न सम्मान कि उपलब्धि पर क्लब कि ओर से बधाई दी|

कु अक्षिति मिश्रा आल राउंड चैंपियन

इस अवसर पर भावना मयूर पुरोहित को गुजराती हिंदी भाषा सेवा के लिए प्राप्त सम्मान व कु अक्षिति मिश्रा को आल राउंड चैंपियन कि उपाधि के प्राप्त होने पर बधाई दी गयी सूचना दी गयी कि विगत दिनों "डॉ अहिल्या मिश्र की कहानियों में सामाजिक विमर्श" विषय पर वॉल्टेयर विश्वविद्यालय विशाखापटनम (आ. प्र.) के शोधार्थी रामु नायक ने शोधग्रंथ प्रस्तुत कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है| सभी सम्मानग्रहिताओं को तालियों की गूँज में बधाई दी गयी|

तेजराज जैन की पुण्यतिथि

साहित्य सेवा समिति की मंत्री सुनीता लुल्ला ने सूचित किया कि आगामी रविवार 24 नवम्बर को तेजराज जैन की प्रथम पुण्यतिथि पर उन्हें समर्पित कार्यक्रम में स्वर्गीय वेणुगोपाल अग्रवाल को क्लब की ओर से श्रद्धांजलि दी जाएगी |

कार्यक्रम में डॉ पंकज मेहता, प्रदीप शर्मा, अतुलीत ठाकुर, देवाप्रसाद मायला, सीमा सारस्वत, पी सूर्या, विजयबाला, प्रीती रेड्डी, अनुराधा, सी श्रीधर बाबू, शोभा महाबाल, सूरज प्रसाद सोनी आदि की उपस्थिति रही | कार्यक्रम संचालन व आभार मीना मूथा ने किया |