हैदराबाद : तेलंगाना हाईकोर्ट ने आरटीसी कर्मचारियों की समस्याओं को दो सप्ताह के भीतर हल करने का श्रम विभाग आयुक्त को आदेश दिया। सोमवार को आरटीसी की हड़ताल को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

इस दौरान सरकार ने कोर्ट से कहा कि आरटीसी की हड़ताल को अवैध करार दिया जाये। कोर्ट ने इसके जवाब में कहा कि आरटीसी की हड़ताल को वैध या अवैध इस पर हम नहीं कह सकते है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हम सीमा से आगे नहीं जा सकते। कोर्ट की कुछ सीमाएं होती है। हम सरकार को किसी प्रकार का आदेश नहीं दे सकते हैं।

कोर्ट ने यही भी कहा कि आरटीसी की हड़ताल को लेबर कोर्ट को स्थानांतारित किया जाएगा। आरटीसी की हड़ताल को वैध या अवैध फैसला केवल लेबर कोर्ट ही दे सकती है। आरटीसी जेएसी ने कोर्ट से आग्रह किया सरकार से चर्चा के लिए कमेटी गठित किया जाये। जवाब में हाईकोर्ट ने कहा कि कमेटी गठित करने के लिए सरकार तैयार नहीं है।

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जेएसी ने कहा कि 45 दिनों से जारी हड़ताल जारी है। मगर सरकार की ओर से संतोष जनक जवाब नहीं मिला है। वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों का जीना मुश्किल होता जा रहा है। सरकार मात्र अस्थाई ड्राइवरों से बसें चला रही है। इसके चलते अनेक दुर्घटनाएं हो रही है। इसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि यह समस्याएं लेबर कोर्ट देख लेगी। हम सरकार को किसी प्रकार का आदेश नहीं दे सकते हैं।

सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ताओं की अपील के अनुसार...हमारे पास केवल दो मुद्दे हैं। पहला- हड़ताल को अवैध करार दिया जाये और दूसरा- सरकार को आदेश दें कि कर्मचारियों को चर्चा के लिए बुलाये। हड़ताल अवैध है करार देने का अधिकार लेबर कोर्ट को मात्र है। हम पहले से ही पूछ रहे है कि कर्मचारियों को चर्चा के लिए बुलाये या नहीं कहने का अधिकार कोर्ट को है या नहीं। हैदराबाद और सिकंदराबाद में बसें नहीं होने के कारण लोग मेट्रों में सफर कर रहे है। मगर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बसें नहीं चलने के कारण अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।"

आपको बता दें कि आरटीसी की हड़ताल आज 45वें दिन भी जारी है। इसके चलते लोगों को अनेक प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।