हैदराबाद : इन दिनों ग्रेटर हैदराबाद में कैब कंपनियों ने लूट मचा रखी है। उबेर, ओला जैसी कई कैब कंपनियां आरटीसी हड़ताल का जमकर फायदा उठाने में लगी हैं।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि हड़ताल के मद्देनजर सरचार्ज नहीं लगाना चाहिए और पीक आवर्स में भी किराए में वृद्धि न की जाए, पर कैब संचालक इन बातों की परवाह किए बगैर यात्रियों को लूट रहे हैं।

आरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल के मद्देनजर यात्रियों को जितनी बसें चाहिए उतनी बसें नहीं चल रही है, वहीं शाम में 6 से 7 बजे के बीच ही ज्यादातर बसें डिपो पहुंच जा रही है। ऐसे में शाम में आफिस से घर जाने वाले यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरी ओर आरटीसी की हड़ताल को देखते हुए रात में बसें नहीं चलाई जा रही और यही वह समय होता है जब कैब व आटो यात्रियों को मनचाहा किराया मांगकर लूट रहे हैं।

कैब वाले तो पीक आवर्स में कैब बुक करने पर ज्यादा किराया ही ले रहे हैं और यात्रियों की कोई सुनने वाला तक नहीं है। वहीं यात्री जिस स्थान से कैब बुक कर रहे हैं वहां से कैब सेवा न होने की बात कहकर भी सरचार्ज किराया वसूला जा रहा है।

इस तरह देखा जाए तो कैब का किराया डबल हो गया है। वहीं यात्रियों को बाहर निकलना और गंतव्य तक पहुंचना भी भारी पड़ने लगा है।

आटो वाले तो वैसे भी समय देखकर ज्यादा किराया लेते ही है वहीं अब तो हड़ताल के नाम पर भी उनकी मनमानी चल रही है। शाम में बसें न होने से तो इनकी मर्जी जमकर चल रही है और ये मनमाना किराया वसूलकर लूट रहे हैं।

अब तक परिवहन मंत्रालय ने कैब और ऑटो वालों पर किसी तरह का कोई नियंत्रण नहीं किया है। ग्रेटर हैदराबाद में जहां 1.4 लाख आटो चल रहे हैं वहीं 85 प्रतिशत में तो मीटर भी नहीं लगा है और कोई उनसे पूछने वाला तक नहीं है।

जितना आटो वाले मांगते हैं उतना यात्रियों को देना ही पड़ रहा है अगर उनका जाना जरूरी है। कैब में तो बुक करते समय ही पता चल रहा है कि कितना अतिरिक्त देना होगा। पीक आवर्स में तो किराया अपने आप बढ़ ही रहा है। यात्रियों को जरूरत की वजह से कैब बुक करना ही पड़ रहा है और अतिरिक्त किराया भी देना पड़ रहा है।

दिलसुखनगर से सिकंदराबाद का कैब का किराया साधारण दिनों में 225 रु लगता था वहीं जबसे हड़ताल शुरू हुई है तबसे 300 से 350 तक बढ़ गया है। तारनाका से लालापेट का किराया साधारण दिनों में 350 तक लगता था जो अब बढ़कर 650 लगने की बात यात्री बता रहे हैं और इस बात को लेकर उनमें गुस्सा भी साफ देखा जा सकता है।

वर्तमान में हैदराबाद शहर में ओला और उबेर कैब ही ज्यादा है। कुछ नई कैब कंपनियां शुरू तो हुई है पर अभी उनकी सर्विस हर जगह से उपलब्ध न होने के कारण यात्रियों को इन्हीं का सहारा लेना पड़ रहा है जिसका ये जमकर फायदा उठा रही है।

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आरटीसी हड़ताल का सबसे ज्यादा असर लाखों नौकरीपेशा लोगों पर पड़ा है जिन्हें अपनी आफिस के लिए हर दिन हाईटेक सिटी, कोंडापुर, माधापुर, फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट जाना पड़ता है।

साधारण दिनों में कम से कम 1500 बसें होती है और पीक आवर्स के साथ ही रात को भी बस की सेवा इन्हें आसानी से प्राप्त होती है वहीं हड़ताल की वजह से इन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और जेब पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

वहीं सोमवार को आरटीसी हड़ताल का दसवां दिन था और इस दिन भी हर डिपो में कर्मचारियों ने धरना व प्रदर्शन करके सरकार के प्रति विरोध जताया।

अब देखना यह है कि आखिर कब तक आरटीसी हड़ताल चलेगी और कब तक इन कैब कंपनियों की लूट जारी रहेगी या फिर इन पर कोई कार्रवाई भी होगी या नहीं।