कैदियों के कल्याण दिवस पर विशेष : तेलंगाना, एपी व केंद्र सरकार कैदियों को क्षमादान करें

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आज महान युगपुरुष राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। ऐसे महान व्यक्ति के जन्मदिन पर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के विभिन्न जेलों में कैदियों का कल्याण दिवस भव्य रूप से मनाया जाता है। महात्मा गांधी के जन्मदिन पर कैदियों का कल्याण दिवस मनाने का तात्पर्य है कि उनके उज्जवल भविष्य के प्रति आवश्यक कदम उठाना और इसके लिए संकल्प लेना।

जेलों में महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर कैदियों का कल्याण मनाने के पीछे अनेक कारण है। इन में मुख्य है यह है कि महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक बार जेल गए थे। जेल की हालात और कैदियों के सुख-दुख गांधीजी ने नजदीक से देखें थे।

इसीलिए आजादी मिलते ही भारत सरकार ने जेलों में सुधारों के अनेक निर्णय लिए। मुख्य रूप से कैदियों को पेरोल और फरलों (छुट्टी) मंजूर करना, पत्र पत्रिकाएं पढ़ने की व्यवस्था करना, सप्ताह में एक बार कैदियों की समस्या सुनकर उनका समाधान करना आदि शामिल है।

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ब्रिटिश काल के नियम

यह खेद की बात है कि आजादी के इतने साल बीत जाने पर भी हमारे जेल नियम ब्रिटिश काल के ही है। आज हमने इतना बड़ा संविधान बनाया है। मगर जेल नियम को नहीं बदला है। हां कुछ सुधार मात्र मात्र हुआ है। हमें तुरंत ब्रिटिश काल के जेल नियम को समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाना है। जेल को एक सुधार गृह में बदलना चाहिए।

मुल्ला समिति

इसी बात को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी के शासनकाल (1981) में श्री मुल्ला समिति की अध्यक्षता में एक जेल सुधार समिति गठित की गई थी। इस समिति में एक महिला सदस्य भी थी ताकि वह महिला कैदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं से अवगत हो सके। इस समिति ने देश के विभिन्न जिला और जेल केंद्रीय कारागार का दौरा किया था। जेल अधिकारी और कैदियों से बातचीत करके समिति ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी। इसके कई साल बीत चुके हैं। यह विडंबना है कि केंद्र सरकार ने उस समिति की रिपोर्ट पर किसी प्रकार का निर्णय नहीं लिया।

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सिफारिशें

मुल्ला समिति ने मुख्य रूप से उम्रकैद की सजा 10 साल, हर कैदी को साल में 1 महीने का पैरोल, सौ-सौ कैदियोंके लिए एक रसोईघर, अस्पतालों में कैदियों के लिेए आधुनिकीकरण सुविधा उपलब्ध कराने, अपने सुख दुख तो बताने के लिए ग्रिवांस बॉक्स (एक प्रकार का पोस्ट बॉक्स। जिसकी चाबी उच्च अधिकारी पास रहें और वही आकर खोलें। समाचार पत्र और निजी पत्रों पर सेंसरशिप हटाना आदि प्रमुख सुधार संबंधी सिफारिश की थी।

मानव अधिकार आयोग

इसी दौरान मानव अधिकार आयोग उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति न्यायधीश रंगनाथ मिश्र की अध्यक्षता में मानव अधिकार ने भी विभिन्न जेलों का दौरा किया था। इस समिति ने भी अपनी रिपोर्ट केद्र को सौंपी। समिति ने वर्तमान जिलों में अस्वच्छता पर गहरा दुख व्यक्त किया। कैदियों की मामलों की सुनवाई में हो रहे विलंब के लिए खेद प्रकट किया।यह भी पढ़ें :

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अटल बिहारी बाजपेयी

दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी एक बार चंचलगुड़ा जेल का दौरा किया था। तब उन्होंने कैदियों को आश्वासन दिया था कि जब भी हमारी सरकार बनेगी तब कैदियों के कल्याण के बारे में अवश्य फैसला लिया जाएगा। मुख्य रूप से दस साल की सजा काट चुके कैदियों को रिहा किया जाएगा। मगर आज वो हमारे बीच नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अटल बिहार वाजपेयी के आश्वासन की अमलावरी के लिए आवश्यक कदम उठाना चाहिए। मुख्य रूप से दस साल की सजा काट चुके सभी कैदियों को बिना की किसी सेक्शन को रोड़ा बनाये रिहा किया जाना चाहिए।

वीके सिंह

तेलंगाना में जेल सुधार में पूर्व महानिदेशक वीके सिंह का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उनके काल में जो जेल सुधार लाये गये वो काबिलें तारीफ है। उनकी पहचान एक जेल सुधारक अधिकारी रूप में याद किया जाता है। मुख्य रूप से कैदियों के जरिए पेट्रोल बंक चलना, रोजगार के अवसर पर उपलब्ध करवाना, सड़कों पर भीख मांगने पर रोक लगाना जैसे अनेक कार्य उनके दौर में हुए।

तेलंगाना

तेलंगाना राज्य का गठन होने के बाद कैदियों में उनकी रिहाई को लेकर बहुत सी उम्मीदें थी और आज भी है। तेलंगाना बना तो उनकी रिहाई में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। मगर यह अत्यंत खेद की बात है कि तेलंगाना सरकार ने कैदियों की रिहाई के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हम जब भी पेट्रोल बंकों पर कैदियों से मिलते हैं तो वह कहते हैं की सर हमारे रिहाई के बारे में कुछ लिखिए। वो यह भी कहते हैं तेलंगाना सरकार से हमें बहुत सी उम्मीदें है। इन कैदियों को देखकर लगता है कि वे कोई बड़े अपराध नहीं है। इसके चलते वो सालों साल जेल में ही रह जाये।

आंध्र प्रदेश

इसी तरह आंध्र प्रदेश में भी नवगठित वाईएस जगन रेड्डी की सरकार को भी चाहिए कि कैदियों की रिहाई के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। क्योंकि आंध्र प्रदेश में भी अनेक कैदियों ने वाईएस जगनमोहन रेड्डी के समर्थन में अपने परिवार को वोट डालने का आग्रह किया है। सामूहिक क्षमादान विश्वास है तेलंगाना में केसीआर की सरकार और आंध्र प्रदेश में वाईएस जगन की सरकार महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर कैदियों को क्षमादान प्रदान करेगी।

संविधान में राज्य और केंद्र सरकारों को कैदियों को क्षमादान प्रदान करने का पूरा अधिकारी दिया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की और अनुच्छेद 161 के अंतर्गत राज्यपाल की न्यायिक शक्ति अर्थात क्षमादान आदि शक्तियों की पूर्ण व्याख्या प्रस्तुत की गई है।विश्वास है तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारें अपने अधिकार का उपयोग करते हुए कैदियों को सामूहिक क्षमादान प्रदान करेगी। कैदियों के जीवन में खुशियों से भर देगी।

-के राजन्ना की कलम से...

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