तेलंगाना में फूलों के त्यौहार बतुकम्मा का हुआ आगाज, ऐसे होता है आयोजन

बतुकम्मा की सजावट - Sakshi Samachar

हैदराबाद : तेलंगाना में फूलों का त्यौहार बतुकम्मा का आगाज हुआ है। सरकार ने बतुकम्मा उत्सव को मनाने के लिए व्यापक इंतजाम किया है। तेलंगाना भर में बतुकम्मा साड़ियों का वितरण जारी है। इस कार्य में मंत्री से लेकर स्थानीय नेता भी भाग ले रहे हैं।

तेलंगाना के राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने बतुकम्मा त्यौहार की बधाई दी है। राज्यपाल ने बधाई संदेश में कहा कि बतुकम्मा त्यौहार तेलंगाना सांस्कृतिक का प्रतीक है। बतुकम्मा त्यौहार में आनंद और स्वास्थ्य मिला हुआ है।

गौरतलब है कि कल, शनिवार 28 सितंबर से येंगली बतुकम्मा से उत्सव आरंभ होगा और 6 अक्टूबर को सद्दुला बतुकम्मा के साथ समाप्त होगा। बतुकम्मा पर्व तेलंगाना राज्य में महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक क्षेत्रीय पर्व है। पूरे तेलंगाना क्षेत्र में बतुकम्मा पर्व शालिवाहन संवत के अमावस्या तिथि से शुरू हो कर नौ दिनों तक मनाया जाता है।

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गांव में बतुकम्मा खेलते बच्चे और महिलाएँ

संसार में फूलों से मूर्तियों की पूजा की जाती है। तेलंगाना ही एक ऐसा राज्य है जहां फूलों से फूलों की पूजा होती है। बतुकम्मा फूलों का त्यौहार है। बतुकम्मा उत्सव के दौरान महिलाएं 'एमेमी पुव्वोप्पुने गौरम्मा...एमेमी कायोप्पुने गौरम्मा...' गीत गाती हैं। यह पर्व 9 दिन तक चलता है।

बतुकम्मा को फूलों से सात परतों से गोपुरम (शिखर) मंदिर की आकृति बनाई जाती है। तेलुगु में बतुकम्मा का मतलब होता है, देवी माँ जिन्दा है। इस दिन बतुकम्मा को महागौरी के रूप में पूजा जाता है। यह त्यौहार स्त्री के सम्मान में मनाया जाता है।

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बतुकम्मा के साथ विदेशी महिलाएँ

तेलंगाना में बतुकम्मा से मिलता जुलता बोड़ेम्मा पर्व भी मनाया जाता है, जो सात दिनों तक चलता है और इस दौरान गौरी पूजा की जाती है और इसमें कुंवारी लड़कियां अधिक हिस्सा लेती हैं।

तेलंगना सरकार ने इस बार भी हैदराबाद में बतुकम्मा उत्सव की व्यापक तैयारी की है। गांवों भी बतुकम्मा उत्सव के भव्य आयोजन के लिए आदेश दिए गये हैं। सरकार ने बतुकम्मा उत्सव के आयोजन के लिए हर जिला केंद्र को राशि भी जारी की है।

बतुकम्मा खेलती महिलाएं

तेलंगाना के बतुकम्मा त्योहार की एक खास विशिष्टता है। इस त्योहार में गीतों की प्रमुखता होती है। ये गीत पूरी तरह से लोकगीत, आत्मीय मिलन और लोगों की जीवनशैली से जुड़े गीत होते है। वर्षाकाल के समाप्ति और ठंडकाल के शुरू में बतुकम्मा त्यौहार आता है।

सद्दुला बतुकम्मा के दिन विदेशी महिलाएं इस उत्सव में भाग लेती हैं। पिछले साल 21 देशों की महिलाओं ने भाग लिया था। इसके अलावा तेलंगाना के सभी जिलों और दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन में बतुकम्मा त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा।

बतुकम्मा को सजाती महिलाएं

बतुकम्मा की खासियत यह है फूलों से सजाना, मिट्टी में खेलना और पानी में मिलना होता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ी होती है। इसके अलावा बतुकम्मा को सजाये जाने वाले हर एक फूल में रोग निरोधक शक्ति होती है। इस त्यौहार के लिए बनाये जाने वाली प्रसादी में भी एक विशेषता होती है। वर्षाकाल में आने वाले आहार पदार्थों से ही बतुकम्मा की प्रसादी बनाई जाती है।

बतुकम्मा उत्सव को हैदराबाद में टैंकबंड, पीपुल्स प्लाजा, रवींद्र भारती, बायसनपोलो, परेड ग्राउंड्स, तेलंगना कला भारती, एलबी स्टेडियम सहित अन्य जगहों पर आयोजित किया जाता है।

-के राजन्ना की कलम से...

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