संसार में फूलों से मूर्तियों की पूजा की जाती है। तेलंगाना एक ऐसा प्रांत है जहां फूलों से फूलों की पूजा होती है। बतुकम्मा फूलों का त्यौहार है। बतुकम्मा उत्सव के दौरान महिलाएं 'एमेमी पुव्वोप्पुने गौरम्मा...एमेमी कायोप्पुने गौरम्मा...' गीत गाती हैं और यह पर्व 9 दिन तक चलता है।

बतुकम्मा पर्व तेलंगाना राज्य में महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक क्षेत्रीय पर्व है। पूरे तेलंगाना क्षेत्र में बतुकम्म पर्व शालिवाहन संवत के अमावस्या तिथि से शुरू हो कर नौ दिनों तक मनाया जाता है। इस साल तेलंगाना में 28 सितंबर 2019 से येंगली बतुकम्मा से आरंभ होगा और 6 अक्टूबर को सद्दुला बतुकम्मा के साथ समाप्त होगा।

बतुकम्मा को ले जाती कविता
बतुकम्मा को ले जाती कविता

बतुकम्मा को फूलों से सात परतों से गोपुरम (शिखर) मंदिर की आकृति बनाई जाती है। तेलुगु में बतुकम्मा का मतलब होता है, देवी माँ जिन्दा है। इस दिन बतुकम्मा को महागौरी के रूप में पूजा जाता है। यह त्यौहार स्त्री के सम्मान में मनाया जाता है।

फूलों से सजी बतुकम्मा
फूलों से सजी बतुकम्मा

तेलंगाना में बतुकम्मा से मिलता जुलता बोड़ेम्मा पर्व भी मनाया जाता है, जो सात दिनों तक चलता है और इस दौरान गौरी पूजा की जाती है और इसमें कुंवारी लड़कियां अधिक हिस्सा लेती हैं।

तेलंगना सरकार ने इस बार भी बतुकम्मा उत्सव की व्यापक तैयारी की है। गांवों भी बतुकम्मा उत्सव के भव्य आयोजन के लिए आदेश दिए गये हैं। सरकार ने बतुकम्मा उत्सव के आयोजन के लिए हर जिला केंद्र को राशि जारी की गई है।

बतुकम्मा को सजाती के कविता और अन्य
बतुकम्मा को सजाती के कविता और अन्य

विशिष्टता

तेलंगाना के बतुकम्मा त्योहार की एक खास विशिष्टता है। इस त्योहार में गीतों की प्रमुखता होती है। ये गीत पूरी तरह से लोकगीत, आत्मीय मिलन और लोगों की जीवनशैली से जुड़े गीत होते है। बतुकम्मा की प्रमुखता तब बड़ गई जब तेलंगाना आंदोलन अपनी चरम पर था। वर्षाकाल के समाप्ति और ठंडकाल के शुरू में बतुकम्मा त्यौहार आता है।

बतुकम्मा के सामने गीत गाती  महिलाएं
बतुकम्मा के सामने गीत गाती महिलाएं

विदेशी महिलाएं

सद्दुला बतुकम्मा के दिन विदेशी महिलाएं इस उत्सव में भाग लेती हैं। पिछले साल 21 देशों की महिलाओं ने भाग लिया था। इसके अलावा तेलंगाना के सभी जिलों और दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन में बतुकम्मा त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा।

कॉंसेप्ट फोटो 
कॉंसेप्ट फोटो 

प्रकृति

अश्वयुज माह और अमावस्या के पहले दिन (एंगिलिपूला) से बतुकम्मा की शुरूआत होती है। नौवें दिन सद्दुला बतुकम्मा के साथ इस प्रकृति के त्यौहार का समापन होता है। बतुकम्मा की खासियत यह है फूलों से सजाना, मिट्टी में खेलना और पानी में मिलना होता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से प्रकृति से जुड़ी होती है। इसके अलावा बतुकम्मा को सजाये जाने वाले हर एक फूल में रोग निरोधक शक्ति होती है। इस त्यौहार के लिए बनाये जाने वाली प्रसादी में भी एक विशेषता होती है। वर्षाकाल में आने वाले आहार पदार्थों से ही बतुकम्मा की प्रसादी बनाई जाती है।

लाल बहादुर स्टेडियम में बतुकम्मा खेलती महिलाएं (फाइल फोटो)
लाल बहादुर स्टेडियम में बतुकम्मा खेलती महिलाएं (फाइल फोटो)

हैदराबाद

बतुकम्मा उत्सव को हैदराबाद में टैंकबंड, पीपुल्स प्लाजा, रवींद्र भारती, बायसनपोलो, परेड ग्राउंड्स, तेलंगना कला भारती, एलबी स्टेडियम सहित अन्य जगहों पर नौ दिन तक आयोजित किया जाता है। इसकी व्यापक तैयार भी की गई है।

बतुकम्मा को विसर्जन को ले जाती महिलाएँ
बतुकम्मा को विसर्जन को ले जाती महिलाएँ