प्रजाकवि कालोजी नारायण राव की आज 105वीं जयंती है। कालोजी आम आदमी के लिए आम आदमी की भाषा में लिखने वाले महान तेलुगू कवि थे। कालोजी एक मानवतावादी थे। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में उन्हें बहुत आनंद मिलता था। दरअसल अन्याय के खिलाफ लड़ने वालों के लिए वे एक प्रेरणा के स्रोत थे।

एक साहित्यकार के रूप में साल 1953 में प्रकाशित 'ना गोडवा' (मेरा संघर्ष) कालोजी का प्रथम कविता संकलन था। खलील जिब्रान द्वारा प्रस्तावित सिद्धांत 'जियो और जीने दो' से कालोजी काफी प्रभावित हुए।

कालू जी ने मनुष्य को स्वतंत्र नागरिक की तरह जीवन जीने की सीख दी। कालू जी कविता संकलन 'ना गोडवा नाम' से आठ भागों में प्रकाशित किया गया है। तेलुगु के महान कवि श्री दशरथ ने इस संकलन को समकालीन इतिहास पर एक टिप्पणी कहा है।

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उनकी कविताएं असंतोष, विद्रोह के साथ-साथ समाज सुधार की भावनाओं को अभिव्यक्त करती है। उनकी अन्य रचनाएं हैं कालोजी कथलु और तेलंगाना उद्यम कथलु प्रसिद्ध है। उन्होंने खलील जिब्रान की कृति का 'जीवन गीत' का तेलुगु भाषा में अनुवाद किया। 'जीवन गीत' के लिए प्रदेश सरकार ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अनुवादक के पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें प्रजाकवि की उपाधि से नवाजा गया।

साल 1992 में काकतिया विश्वविद्यालय ने कालोजी को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। विधान परिषद के सदस्य रह चुके कालोजी को भारत सरकार ने उनके सामाजिक एवं साहित्यिक सेवाओं के लिए साल 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

प्रजाकवि कालोजी नारायण राव का जन्म 9 सितंबर 1914 को बीजापुर जिले के रट्टेहल्ली में हुआ था। वह बचपन में पिता के साथ वरंगल जिले के मदिकोंडा में आकर बस गए। कालोजी की प्राथमिक शिक्षा वर्ग जिले के मदिकोंडागांव में और उच्च शिक्षा वरंगल और हैदराबाद में हुई।

कालोजी नारायण राव भारत छोड़ो आंदोलन तथा हैदराबाद के सशस्त्र आंदोलन में भाग लेने के कारण कई बार जेल भी गए। विशालांध्रा राज्य गठन से तेलंगाना के साथ हुए अन्याय को कालोजी बर्दाश्त न कर सके और उन्होंने पृथक तेलंगाना आंदोलन में प्रमुखता से भाग लिया।

तेलंगाना सरकार ने हर साल कालोजी की जयंती को तेलुगु भाषा उत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की है। कालोजी के नाम पर वरंगल में एक विश्वविद्यालय व कालोजी फाउंडेशन की स्थापना की है। कालोजी का देहांत 13 नवंबर 2002 को हुआ। उनकी इच्छा अनुसार उनके पार्थिव शरीर को काकतिया मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया गया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कालू जी ने एक लघु कविता लिखी थी।

'पुट्टुका नीदि चावु नीदि, बतुकंता देशानीदि अर्थात जन्म तुम्हारा मरण तुम्हारा किंतु तुम्हारा जीवन पूरे देश का, यह पंक्तियां आज भी कालोजी नारायण राव के जीवन पर चरितार्थ करती है।

प्रजाकवि कालोजी नारायण राव आज हमारे बीच नहीं है। मगर उनका संघर्ष, मानतावादी संदेश हमेशा लोगों को प्रेरणा देती रहेगी।

के. राजन्ना की कलम से...