हैदराबाद : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने दुनिया में संरक्षणवादी प्रवृत्तियों से उत्पन्न चुनौतियों से मुकाबले के लिए आवश्यक ‘सुधारों के साथ बहुपक्षीय व्यवस्था ' लागू करने का पक्ष लिया है। उन्होंने यहां शनिवार को यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं वित्तीय संस्थानों में सुधार किए जाने चाहिए ताकि वे दुनिया की नयी वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करें।

नायडू ने कहा, ‘‘हमें संरक्षणवादी प्रवृत्तियों से मुकाबले के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था को सुधार के साथ लागू करने की जरूरत है। हमें अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक, वित्तीय और व्यापारिक संस्थानों में सुधार लाने की जरुरत है ताकि वे जमीनी हकीकत का ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व कर सके। और नयी चुनौतियों से निपटने के लिए अनुकूल बन सकें।''

नायडू यहां इंडियन स्कूल आफ बिजनेस में ‘डेक्कन डायलॉग' सम्मेलन में ‘इकोनॉमिक डिप्लोमेसी इन द ऐज आफ डिसरप्शंस' विषय पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी विभाजन, व्यापार विवाद, आतंकवाद, सम्पर्क और समुद्री खतरों जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए नियम आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था का समर्थन करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन अब, जब कि हम एकतरफा कार्रवाई और संरक्षणवाद का मुकाबला कर रहे हैं, हमें इस तथ्य से अवगत रहना चाहिए कि वह भारत और अन्य विकासशील देश ही थे जिन्होंने पूर्व में बहुपक्षवाद व्यवस्था में सुधार का आह्वान किया था है ताकि वैश्चिक व्यवस्था के संचालन में विकासशील देशों की दखल बढ़ सके। इसलिए हमारी मांग यह नहीं है कि बहुपक्षीय व्यवस्था में पहले वाली यथास्थिति पर वापस जाया जाए।''

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लोकतांत्रिक बनाने पर नायडू ने कहा, ‘‘विश्व जनसंख्या का छठा हिस्सा भारत में रहता है और भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य नहीं है।'' उन्होंने कहा,‘‘इसी वजह से हम कहते हैं कि आपको संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लोकतांत्रिक बनाने की जरुरत है।''

नायडू ने कहा कि भारत ने कभी भी किसी देश पर हमला नहीं किया है, पर यदि किसी ने हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया तो हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। नायडू ने इसी संदर्भ में पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसकी ओर इशारा करते हुए कहा कि ‘हमारी इस बात को बात सभी को समझ लेनी चाहिए, जिसमें हमारा पड़ोसी भी शामिल हैं जो आतंकवाद में सहायता, प्रशिक्षण और उसका वित्तपोषण कर रहा है।''

उन्होंने वर्तमान आर्थिक एवं व्यापार प्रणाली को रूप देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत का मानना है कि विकासशील देशों के लिए चौथी औद्योगिक क्रांति युग में छलांग लगाने के लिए नयी प्रौद्योगिकि अपनाना जरूरी है।

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