गोवा/हैदराबाद : कोंकणी विभाग, गोविवि ग़ोंय विद्यापीठ, तालागांव ग़ोंय, उच्च शिक्षण संचनालय, ग़ोंय सरकार, कला, विज्ञान आणि वाणिज्य, सरकारी महाविद्यालय, साख की ग़ोंय राजभाशा संचालनालय, ग़ोंय सरकार और बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन पटना बिहार के संयुक्त तत्वाधान में ‘कोंकणी-हिंदी साहित्यांत भाव प्रभाव: एक तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद ‘कोंकणी-हिंदी भयणी भयणी’ अवधारणा के अंतर्गत गोवा विश्वविद्यालय के ए ब्लॉक परिसर में स्थित सभागार में संपन्न हुआ।

उद्घाटन

इसका शुभारंभ एवं उद्घाटन गोवा की राज्यपाल एवं वरिष्ठ लेखिका महामहिम मृदुला सिन्हा के साथ गोवा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर वरुण साहनी, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन पटना के अध्यक्ष अनिल सुलभ एवं डॉ ज़ेर्वासियो मेंडिस के साथ दीप प्रज्वलित कर किया| प्रोफेसर ममता वेर्लेकर के संचालन एवं प्रोफेसर किरण बुडकुले के स्वागत भाषण तथा राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।

पहला सत्र

19 एवं 20 अगस्त को उद्घाटन के पश्चात कुल 8 सत्रों में निर्धारित 8 विषयों में ‘कोंकणी-हिंदी कथा साहित्य में भाव प्रभाव तुलनात्मक अध्ययन’ पहले सत्र का विषय रहा। द्वितीय सत्र का विषय ‘कोंकणी-हिंदी नाटक़ों के भाव प्रभाव प्रभाव का समीक्षात्मक परिचय’ का सत्र साहित्य अकादमी पुरस्कार ग्रहिता एवं कोकनी में कई नाटक संग्रह के रचयिता श्री पुंडलीक नायक की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

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डॉक्टर अहिल्या मिश्र

इस अवसर पर हैदराबाद तेलंगाना की वरिष्ठ साहित्यकार एवं नाटककार डॉक्टर अहिल्या मिश्र के साथ डॉक्टर प्रकाश वजरीकर, डॉक्टर शंकर प्रसाद, डॉ कुमार अनुपम, श्री सुनील कुमार दुबे, प्रो कृपाली नायक और अन्य ने अपने प्रपत्र प्रस्तुत किए।

मंच पर आसिन डॉ अहिल्या मिश्र और अन्य
मंच पर आसिन डॉ अहिल्या मिश्र और अन्य

डॉ अहिल्या मिश्र ने भरत मुनि की नाट्य परिभाषा से लेकर संस्कृत के भवभूति कालिदास, जयदेव से लेकर प्रसाद, रामकुमार वर्मा, मन्नू भंडारी, मृदुला गर्ग, मृणाल पांडे आदि के नाटकों से के अलावा स्वरचित नाटक भारतीय नारी तेरी जय हो की चर्चा की। साथ ही रेलवे द्वारा आयोजित नाट्य प्रतियोगिता के निर्णायक की भूमिका एवं इसमें प्रस्तुत नाटकों में अक्सर अभिज्ञान शाकुंतलम एवं सिंहासन खाली पर प्रकाश डाला।

कोंकणी नाटक

कोंकणी नाटकों में उल्लेखित विषयों की चर्चा करते हुए ‘तियात्र’ जो इसका संगीत नाटक है और मंदिरों में तथा वसंतोत्सव आदि के समय अभिनीत किया जाता है का उल्लेख किया एवं इसके भाव प्रभावों की तुलना करते हुए बिहार के विश्वविख्यात नाटककार भिखारी ठाकुर का उदाहरण देकर तुलनात्मक स्थितियाँ स्पष्ट की। अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

अन्य सभी सत्र कविता, अनुवाद, साहित्यकारों का चिंतन, भाव, सौंदर्य आदि पर प्रपत्र प्रस्तुत किए गए। सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं कवि सम्मेलन सत्र भी रखे गए।

दूसरा सत्र

दूसरे दिन का सत्र से पूर्व कोंकणी शोध पत्रिका का विमोचन समारोह संपन्न हुआ। इसमें कंपनी के विभागाध्यक्ष के स्वागत तथा मुख्य अतिथि के रूप में गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद संवत ने शोध पत्रिका का विमोचन किया। श्री उदय भेंब्रे, श्री प्रसाद लोलयेंकर, श्री अरविंद भाटीकार और कार्यक्रम संयोजिका प्रो किरण बुडकुले आदि मंचासीन हुए।

समापन

समापन समारोह के साथ प्रमाण पत्र वितरण एवं सभी प्रपत्र पेश करने वालों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। दोन दिन रात्रि भोज का आयोजन राज भवन गोवा में रखा गया। यह एक आनंददायक अनुभव रहा। राज्यभवन में रात्रि भोज के साथ सभी के बीच परस्पर स्नेह मिलन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का हुआ।