हैदराबाद : युवा साहित्यकार प्रवीण प्रणव को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के शती-वर्ष समारोह में ‘साहित्य सम्मेलन शताब्दी (युवा)’ सम्मान से सम्मानित किया गया। बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना पटना में भारत के प्रथम राष्ट्रपति देश रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद की प्रेरणा और सहयोग से 1919 में हुई थी। संस्था ने अपने स्थापना से अब तक 100 वर्षों का गौरवशाली सफर तय किया है।

शताब्दी सम्मान समारोह की अध्यक्षता बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ ने की। मुख्य अतिथि भारत सरकार में विधि एवं न्याय और सूचना एवं प्रसारण मंत्री माननीय श्री रविशंकर प्रसाद रहे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति श्रीमती मृदुला गर्ग (कुलपति, चाणक्य राष्ट्रीय विधि वि.वि.) मंचासीन रहीं। विशिष्ट अतिथि प्रो शशिशेखर तिवारी (पूर्व अध्यक्ष विश्वविद्यालय सेवा आयोग बिहार) तथा डॉ कुमार अरुणोदय (अध्यक्ष स्वागत समिति) भी मंचासीन हुए।

विधि एवं न्याय और सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद से हाथ मिलाते हुए प्रवीण प्रणव 
विधि एवं न्याय और सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद से हाथ मिलाते हुए प्रवीण प्रणव 

शती वर्ष में अब तक किए गए कार्यक्रमों का विवरण देते हुए मंच संचालक डॉ शंकर प्रसाद ने कहा कि संस्था ने शती वर्ष में भारत वर्ष से 100 विदुषियों का सम्मान मार्च में किया। जून में भारत वर्ष से चुने गए 100 मनीषी विद्वानों का सम्मान किया गया और अब देश भर से चुने गए 100 युवा साहित्यकारों को ‘शताब्दी सम्मान’ देने की बारी है।

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प्रवीण प्रणव एवं अन्य साहित्यकारों को श्री रविशंकर प्रसाद ने ‘शताब्दी सम्मान (युवा)’ से सम्मानित किया। अपने सम्बोधन में श्री रविशंकर ने कहा कि सृजनात्मक शक्ति का प्रयोग कर हमें हिन्दी को बढ़ावा देना चाहिए। हिन्दी जितनी सहज और सरल होगी उतनी ही लोकप्रिय होगी। युवा साहित्यकार हिन्दी को टेक्नोलॉजी से जोड़ने का प्रयास करें। प्रवीण प्रणव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बहुत खुशी हुई है ये जान कर कि आज के युवा जीविका के लिए सॉफ्टवेयर को चुन रहे हैं या अन्य कई विकल्पों को चुन रहे हैं लेकिन साथ ही हिन्दी में अपनी सृजनशीलता को बनाए रखा है।

उन्होंने ज़ोर दे कर कहा कि हिन्दी को किसी सहारे की जरूरत नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ शब्द जैसे लोकसभा, राज्यसभा, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय आदि प्रचलित हुए लेकिन सिनेमा की जगह चलचित्र उतना लोकप्रिय नहीं हुआ। ऐसे में हिन्दी को भी कुछ दूसरी भाषाओं से शब्द ले लेने चाहिए, इससे हिन्दी अधिक समृद्ध होगी। उन्होंने सभी सम्मानित साहित्यकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सब हिन्दी के सिपाही, सेनानी और सेनापति हैं। हिन्दी की सेवा करें।

न्यायमूर्ति मृदुला मिश्र ने कहा कि युवा साहित्यकारों के लिए यह शुभ दिन है। इस सम्मान से प्रेरणा ले कर आप सब बेहतर साहित्य का सृजन करें। साहित्य समाज का आईना होता है – जैसा साहित्य होगा वैसा ही समाज होगा। साहित्य को प्रेरित करते रहें, इससे हमारी भाषा समृद्ध होगी। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में डॉ॰ अनिल सुलभ ने कहा कि हिन्दी को राजभाषा का दर्जा मिला है लेकिन इसे अब राजकाज की भाषा बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सभी सम्मानित साहित्यकारों की जीवनी और उनकी प्रतिनिधि कविताओं को संस्था पुस्तकाकार प्रकाशित करेगी।

सम्मान समारोह के पश्चात कवि सम्मेलन में सम्मानित साहित्यकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। प्रवीण प्रणव ने इस अवसर पर अपनी कई ग़ज़ल और कविताओं का पाठ किया। इस साहित्यिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रोताओं की उपस्थिति रही।