हैदराबाद : कादंबिनी क्लब हैदराबाद के तत्वावधान में रविवार को हिन्दी प्रचार सभा परिसर नामपल्ली में क्लब की 324वी मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए क्लब अध्यक्षा डॉ अहिल्या मिश्र एवं कार्यकारी संयोजिका मीना मुथा ने बताया कि गोष्ठी का आरंभ ज्योति नारायण द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुति से हुआ। प्रथम सत्र में डॉ मदनदेवी पोकरणा ने सत्र की अध्यक्षता की।

मुख्य अतिथि के रूप में सुरेश गुगालिया एवं विशेष अतिथि के तौर पर सुरेशचंद बोहरा, डॉ अहिल्या मिश्र (क्लब अध्यक्षा) एवं समीक्षा प्रस्तोता अवधेश कुमार सिन्हा मंचासीन हुए। डॉ मिश्र ने स्वागत भाषण में कहा कि संस्था ने 26वे वर्ष में पदार्पण किया है और यह साहित्यिक यात्रा आप सभी के निरंतर साथ-सहयोग के कारण ही संभव है। उन्होंने कहा कि 4 अगस्त को आचार्य आनंदऋषि साहित्य निधि का आयोजन होने जा रहा है, सुरेश गुगालिया और सुरेशचंद बोहरा इस कार्यक्रम में आप सभी को निमंत्रण देने हेतु पधारे हैं।

स्व तेजरज जैन (संस्थापक – कार्यकारी संयोजक) के प्रति भी कादंबिनी क्लब का कर्तव्य बनता है। सभी साहित्यसुधी इस कार्यक्रम में अवश्य पधारें। सुरेश गुगालिया एवं सुरेशचंद बोहरा ने कहा कि साहित्य में युवा पीढ़ी का झुकाव कम दिखाई देता है, राष्ट्र संत आ आनंदऋषि म सा का संस्था को आशीष प्राप्त है जिसकी वजह से 26 वर्षों से यह कार्य कर रही है।

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प्रथम सत्र में डॉ अहिल्या मिश्र की कृति ‘जिनको मैंने जाना’ पर बातचीत करते हुए अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि हमारे आसपास जो घटित होता है उससे हम उद्वेलित होते हैं और अपनी प्रतिक्रिया शब्दों का रूप ले लेती है। यात्रा करते हैं तो सहयात्री याद रह जाते हैं। डॉ अहिल्या जी को हैदराबाद आ कर लगभग 50 वर्ष हो गए हैं।

प्रस्तुत कृति को 3 खंडों में बांटा गया है। साहित्यसुधी रचनाकारों का करीब से परिचय, लेखिका ने ‘उनसे’ इस यात्रा में क्या जाना, क्या साझा किया तथा उन रचनाकारों के व्यक्तित्व का परिचय दिया गया है। जिन लोगों से भी यह मिलीं, ज्ञान की पिपासा से मिलीं, साहित्यिक खोज में व्यक्तित्वों की टकराहट हुई, प्रस्तुत कृति इन सबकी शब्दयात्रा है। लगभग 27 रचनाकारों के साथ डॉ॰ अहिल्या मिश्र के संस्मरण इस कृति में संकलित हैं। कृति पठनीय है, औरों को भी ऐसे लेखन का प्रयास करना चाहिए।

नीरज कुमार ने कहा कि पिताजी मुनीन्द्रजी का जिक्र प्रस्तुत कृति में आया है। उस समय भाषा की अशुद्धियाँ बहुत हुआ करती थी, पिताजी कक्षाएँ ले लेकर हिन्दी व्याकरण और शुद्धता के बारे में समझाते थे। स्मृतियों को पुस्तक में उतारना आसान कार्य नहीं है, डॉ अहिल्याजी सरस्वती की भक्त हैं, उन्हें बहुत बधाई।

ज्योति नारायण ने कहा कि एक दबंग व्यक्तित्व से परिचय हुआ और स्त्री सशक्तिकरण की बात को आगे बढ़ाते हुए मैं भी उनके साथ इस यात्रा में शरीक हो गई। उनकी लेखन शैली से मैं प्रभावित रही, उनका स्नेह-प्रेम मुझे हमेशा मिलता रहा है। मीना मुथा ने कहा कि वर्ष 2000 से ही डॉ अहिल्या जी के संपर्क में रहीं। एक जुझारू एवं प्रतिभाशाली व्यक्तित्व के साये में बहुत कुछ सीखा, लिखने की प्रेरणा मिली।

भावना पुरोहित, भँवरलाल उपाध्याय ने भी अपने विचार रखे। रितेन्द्र अग्रवाल ने अपनी समीक्षा में कहा कि इस साहित्यकारा ने साहित्यिक सम्बन्धों से हटकर साहित्यिक मूल्यांकन नहीं किया है। इन्होंने घटी घटनाओं को पूरी ईमानदारी के साथ लिखा है।

डॉ अहिल्या मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि अक्षरऋण मेरे ऊपर सभी का है। यह संस्मरण है। जिनको मैं जानती थी, मुलाकातों में भावधारा से जुड़ी और भावों को शब्दबद्ध करती गई। ऐसे कई सदस्य इस कृति में छूट गए हैं जिनको मैंने जाना, भविष्य में अवश्य उन्हें भी शामिल करूंगी। इस अवसर पर कल्पना पत्रिका का उल्लेख भी किया गया। डॉ मिश्र ने कहा कि जबतक उस व्यक्तित्व को मैंने पूरी तरह नहीं जाना, मैंने कलम नहीं चलाई। यथास्थिति चित्रित करने के लिए एक्सरे वाली आँखें चाहिए।

डॉ मदनदेवी पोकरणा ने कहा कि मैं और अहिल्याजी एक दूसरे से वर्षों से परिचित हैं, उनसे संपर्क में आने के बाद ही मेरी साहित्यिक रुचि का विकास हुआ। उन्हें इस कृति के लिए बधाई। इस सत्र में रजतोत्सव पत्रिका, मोमेंटों और प्रमाणपत्र भी दिए गए। आ आनंदऋषि साहित्य निधि की ओर से पधारे गुगालिया, बोहरा जी को संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया। ज्योति नारायण ने प्रथम सत्र का धन्यवाद दिया। मीना मुथा तथा अवधेश कुमार सिन्हा ने सत्र का संचालन किया।

दूसरे सत्र में भँवरलाल उपाध्याय के संचालन में कविगोष्ठी हुई। गजानन पाण्डेय ने सत्र की अध्यक्षता की। डॉ सुनीता सूद, डॉ गीता जांगिड, भावना पुरोहित, सुषमा वैद्य, विजयबाला स्याल, सरिता सुराणा, एल॰ रंजना, शिव कुमार तिवारी कोहिर, कुंजबिहारी गुप्ता, नीरज कुमार, आचार्य प्रताप, प्रदीप प्रताप सिंह, शिवम सिंह, अवधेश कुमार सिन्हा, मीना मुथा, दर्शन सिंह, संतोष रज़ा, डॉ अहिल्या मिश्र ने काव्य पाठ किया।

गजानन पाण्डेय ने अध्यक्षीय काव्यपाठ किया। साहित्य सेवा समिति की ओर से पधारे नीरज कुमार का इस अवसर पर सम्मान किया गया। सरिता सुराणा ने सत्र का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर के राजन्ना, भूपेन्द्र मिश्र और अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।