देश में जल संकट गंभीर रूप धारणा किया है। वैसे तो जल की महत्वता के बारे में सभी लोग अच्छी तरह से जानते हैं। मगर समस्या जैसी की वैसी बनी हुई है। अर्थात जल संकट से निजात नहीं मिल रही है। यह अलग बात है कि इस समय आधा भारत बाढ़ की चपेट में है। आधा भारत सूखाग्रस्त है। इसके अनेक कारण हो सकते हैं। इसका जवाब भी मिल सकता है। मगर इसके शाश्वत निवारण व उपाय की सख्त जरूरत है।

हैदराबाद शहर में लगभग एक करोड़ आबादी रहती है। मानसून के दो महीने बीत गए। मगर आशा जनक बारिश नहीं हुई है। आसमान में हर दिन आंख मिचौली देखने को मिल रही है। हर रोज आसमान पर काले घने बादल छा जाते हैं। ऐसा लगता है कि भारी बारिश होगी। मगर थोड़ी देर बाद बादल गायब हो जाते है। शहर में केवल ठंडी और तेज हवाएं इस समय चल रही है। मानसून के इस उदासीन रवैए के कारण शहर को पेयजल आपूर्ति करने वाले जलाशयों में जलस्तर दिन प्रतिदिन घटता ही जा रहा है।

पेयजल की समस्या (फाइल फोटो)
पेयजल की समस्या (फाइल फोटो)

आगामी दिनों में शहर की जनता के लिए गंभीर संकट की स्थिति पैदा कर सकता है। हालांकि शहर के लिए कृष्णा और गोदावरी परियोजना से जलापूर्ति की जा रही है। मगर इन पर योजनाओं के जलाशय में भी जल स्तर में भारी कमी आई है। हैदराबाद जलापूर्ति और मल निकास बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान हालात को देखते हुए बोर्ड अगस्त माह तक शहर की जनता को हर दिन 166 मिलियंस गैलन जलापूर्ति किया सकता है।

मानसून

मानसून में तेजी नहीं आई तथा मानसून सामान्य से भी कम रहा तो सितंबर माह से पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। वर्तमान समय में पेयजल संकट से गुजर रहे हैं। चेन्नई को रेलगाड़ी के जरिए जलापूर्ति की जा रही है। बोर्ड के अधिकारी नहीं चाहते कि हैदराबाद में वैसी स्थिति पैदा हो। जल समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक समाधान तलाश तलाशे जा रहे हैं। जल बोर्ड के तकनीकी निदेशक प्रवीण कुमार के अनुसार शहर की लगभग एक करोड़ जनता के लिए हर दिन 166 मिलियन गैलन जलापूर्ति की जा रही है। यह आपूर्ति अगस्त माह के अंत तक जारी रखी जाएगी। इसके बाद समस्या उत्पन्न गंभीर हो सकती है।

जलस्तर

कुमार के अनुसार कृष्णा नदी आधारित नागार्जुन सागर, गोदावरी नदी आधारित श्रीपदा एलमपल्ली उस्मानसागर हिमायतसागर जलाशय में पिछले वर्ष जुलाई माह की तुलना में जलस्तर में इस बार भारी गिरावट आई है। सागर का जलस्तर गत वर्ष 11 जुलाई को 511 मीटर था जो 12 जुलाई 2019 को घटकर 507 मीटर रह गया है। इसी प्रकार गत वर्ष 11 जुलाई को एलमपल्ली जलस्तर 468 मीटर था जो इस वर्ष 11 जुलाई को 459 मीटर है। उस्मानसागर हिमायतसागर और सिंगुर के जलस्तर में भी 6 से 12 फीट तक की कमी आई है। मिली जानकारी के अनुसार जुलाई माह में तीनों जलाशय के जलस्तर में 5 से 10 फीट की बुद्धि होनी चाहिए थी, मगर मानसून की कमी के कारण जलस्तर में एक फीट की भी वृद्धि नहीं हुई है।

आंकड़ों के अनुसार सिंगुर जलाशय में गत वर्ष गत 11 वर्षों में 11 जुलाई को जलस्तर 1697 फीट होता था, जो घटकर 11 जुलाई को 1669 पहुंचा गया। जलाशयो में भी बारिश की कमी के कारण जल पानी नहीं पहुंच रहा है। जिस कारण जलाशयों का घटता जलस्तर की प्यास बुझाने के लिए बोर्ड की चिंता को बढ़ा रही है।

पेयजल की समस्या (फाइल फोटो)
पेयजल की समस्या (फाइल फोटो)

दूसरी ओर तेलंगाना राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव ने बुधवार को एक व्यक्ति के ट्वीट के जवाब में बताया कि नगर में जल संकट की स्थिति उत्पन्न होने का सवाल ही नहीं है। क्योंकि कालेश्वरम परियोजना से जल के पंपिंग करने का कार्य आरंभ हो चुका है। केटीआर ने बताया कि कालेश्वरम परियोजना से जल को लिफ्टिंग किया जा रहा है। यह जल शीघ्र ही एलमपल्ली परियोजना में पहुंच जाएगा। इसके चलते हैदराबाद को 175 एमजीडी पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। इस बात को हुए हैदराबाद में पेयजल समस्या उत्पन्न होने का सवाली नहीं है। आपको बता दें कि मीडिया में कुछ दिनों से पेयजल की समस्याओं को लेकर नगरवासियों के लिए खतरे की घंटी जैसे खबरें आ रही है। केटीआर के बयान से नगर वासियों को पेयजल समस्या से बहुत बड़ी राहत मिली है।

जल अमृत

जल अमृत है। यह हमें काफी सस्ते दाम पर मिलता है। मगर जल बहुत कीमती और संग्रहणी है। इसके लिए कई सालों से काम करने वाले आयुर्वेद चिकित्सक राजेंद्र सिंह ने हाल ही में एक मीडिया को दिए साक्षात्कार में बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई। जो सभी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रखेंगे राजेंद्र राजेंद्र सिंह कहते हैं कि वर्षा अभाव क्षेत्रों में बारिश की संभावना की जा सकती है। इसके लिए केवल और जरूरी है देश का हर प्रांत हरा भरा रहे। जहां हरा भरा रहता है वहां बारिश होने की संभावना अधिक है। हरियाली नहीं रहेगी तो वहां पर बारिश होने की संभावना कम होती है। इस बात को ध्यान में रखते वे लोगों सुझाव देते हैं कि जितने पेड़ लगाओगे उतनी अधिक अधिक बारिश आपके इलाकों में हो सकती है।

मौसम के जोन

हमारे देश में हर प्रांत में अलग अलग मौसम में विभाजित है। मुख्य रूप से हमारे देश में मौसम के अनुसार 19 जोनों में विभाजित किया गया है। इन 19 जोनों में अपनी-अपनी और अलग-अलग क्षमता और पहचान है। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमें जल संरक्षण पर कार्यक्रम चलाना चाहिए। ऐसा करने पर ही हमें जल मिल पाएगा। केवल दिल्ली में बैठकर देशभर में ऐसा ही रहे सोचने और कहने से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला हैं। इन 19 जोनों के अनुसार हमें आवश्यक और प्राकृतिक जल संरक्षण के पद्धति को अपनाना चाहिए। ऐसा करने पर हमें जरूर इसका लाभ मिलेगा।

डॉ सिंह बताते है कि श्री शैलम परियोजना के आसपास यूरेनियम खुदवाई करना ठीक नहीं है। क्योंकि यूरेनियम को हम खा नहीं सकते। मगर जल पी सकते है। इस बात को हमें ध्यान में रखना चाहिए। इसी तरह किसी भी नदी के आसपास खुदवाई नहीं होनी चाहिए। ऐसा होने से भी जल संकट पैदा हो सकता है। वे मानते हैं कि विश्व को देखते हुए ऐसा लगता है कि जल्द के लिए विश्व युद्ध होगा।

जल संकट

उन्होंने बताया कि सीरिया व सूडान के साथ अनेक देश जल संकट के कारण देश छोड़कर पलायन कर रहे हैं। मगर हमारी हालत वैसी नहीं है। हम केवल कुछ किलोमीटर तक चलना पड़ रहा है। हमारे देश के हालात अनुरूप हमें जल संरक्षण के लिए आवश्यक रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। ऐसा करने पर ही हमें जल संकट से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि देश के 17 राज्यों में गंभीर जल समस्या है। मगर प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। प्रशासन को चाहिए कि कल की समस्या का आज निवारण करें। तभी हम भयंकर जल संकट से निजात पा सकते हैं। हमारे देश में लगभग 365 जिलों में जल संकट उत्पन्न हुआ है। साथ ही 200 शहरों में जल समस्या उत्पन्न हो रही है। प्रशासन को इस पर अध्ययन करके आवश्यक कदम उठानी चाहिए।

जल आपातकाल

डॉ सिंह ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि हमें पहले देश में जल आपातकाल (वाटर इमरजेंसी) स्थिति को घोषित करनी चाहिए। सरकारी योजनाओं के कुछ भी नाम हो सकते हैं। जैसे गंगा प्रक्षालन, कृषि सिंचाई योजना, जल शक्ति अभियान, जलयज्ञम जैसे अनेक योजनाएं सरकारी अमल में ला सकती है। मगर इसका लाभ तभी मिलेगा जब इस पर मन से काम हो। केवल कांट्रैक्ट देने से काम नहीं चलेगा। ठेकेदार तो केवल पैसों के लिए काम करते हैं। मगर उसका लाभ कुछ भी नहीं मिलेगा। मुख्य रूप से जल को भूमि में संरक्षण कैसे किया जाए इस पर प्रशासन, आम जनता, अधिकारी और नेताओं को गंभीरता से सोचना चाहिए।

डिजाइन फोटो
डिजाइन फोटो

जल संरक्षण

उन्होंने सुझाव दिया कि जल संरक्षण हमारी एक नीति बननी चाहिए। यह नीति ऐसी होनी चाहिए कि यही हमारा पहला कर्तव्य है। इसके सिवा हम कुछ नहीं करेंगे और नहीं करने देंगे। तभी हम जल संकट या समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए सभी स्कूलों में जल विषय पर पाठ्य प्रणाली एक विषय होना चाहिए। हर दिन एक व्यक्ति 300 से 400 लीटर जल का उपयोग करने से क्या लाभ होगा? जल तो बेकार चला जाएगा। एक व्यक्ति को 20 से 40 लीटर मात्र उपयोग करने पर ही देश का विकास संभव है। इस बात पर व्यक्ति को सोचना चाहिए और अमल में लाना चाहिए। यह परिवर्तन नेता अधिकारी कर्मचारी या सामान्य नागरिक में आनी चाहिए। तभी हम जल समस्या से बहुत बड़ी निजात पा सकते हैं। यह कोई बड़ी बात नहीं है। यह हमारे बस की बात है। हम जितना कम पानी का इस्तेमाल करेंगे वह भविष्य के लिए सुरक्षित रहेगा। यह केवल सोचने और समझने की बात है। बारिश के पानी को रोकने की यह युद्ध स्तर पर कदम उठानी चाहिए।

भूगर्भ जल बनाम डिपॉजिट रकम

डॉक्टर सिंह कहते हैं कि भूगर्भ से जल को हम हर दिन निकालते ही जा रहे हैं। इसके कारण भूगर्भ का स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा है। भूगर्भ जल एक डिपॉजिट की गई रकम के समान है। हम बैंकों में जितनी रकम डिपॉजिट करते है उतना ही वापस ले सकते हैं। मगर इससे अधिक तो बैंक से निकाल नहीं सकते है। नहीं बैंक वाले दे सकते हैं। मगर आज भूगर्भ से जल को निरंतर निकाला जा रहा है। इसके चलते जल समस्या गंभीर रूप धारण करते जा रहा है। हर नागरिक, हर अधिकारी, हर, नेता हर,हर अभियंता को इस पर गंभीरता से सोचना है।