हैदराबाद : बोंदिली राजपूत वेलफेयर एसोसिएशन, तेलंगाना, प्रदेश एवं अखिल भारतीय क्षत्रिय सेना के संयुक्त तत्वावधान में अल्लुरी सितारामा राजू की 122वीं जयन्ती विनायक सागर (हुसैन सागर) स्थित सितारामा राजू की विशाल प्रतिमा के पास मनाई गई । इस जयन्ती उत्सव में अति पिछड़ा वर्ग विकास निगम प्रबंध निदेशक के. आलोक कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

बोंदिली राजपूत वेलफेयर एसोसिएशन, तेलंगाना प्रदेश के अध्यक्ष एवं व अखिल भारतीय क्षत्रिय सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ठाकुर रामेश्वर सिंह बैस ने जयन्ती समारोह की अध्यक्षता निभाई। आलोक कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि अल्लुरी क्षत्रिय परिवार से सम्बंधित थे व भारत की आजादी के लिये अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया।

रामेश्वर सिंह बैस ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि अल्लूरी सितारामा राजू का जन्म विशाखपट्नम, (आंध्र प्रदेश) में 4 जुलाई 1897 को हुआ। सन 1920 में वे महात्मा गांधी जी के विचारों का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा और उन्होने आदिवासियों के साथ मिलकर अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने के लिये क्रांतिकारी संगठन बनाया और तीर्थयात्रा पर निकल पड़े।

हिमालय में उनका एक महान क्रांतिकारी पृथ्वी सिंह आजाद से उनका परिचय हुआ और कई क्रांतिकारी संघटनों के प्रमुखों से विचार-विमर्श किया। भारत भृमण में उन्होंने मुंबई, बड़ोदरा, बनारस, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, असम, बंगाल और नेपाल तक कि यात्रा की। इसी दौरान उन्होने घुड्सवारी करना, तीरंदाजी, योग, ज्योतिष व प्राचीन शास्त्रों का अभ्यास व अध्ययन भी किया। वे काली माता के उपासक थे । 7 मई 1924 को भारत माता की आजादी के लिये अपने प्राणों का बलिदान करने वाले वीर क्षत्रिय क्रांतिकारी शहीदों में से एक थे।

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बैस ने उनके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम किया व श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रंजीत सिंह, महामंत्री कुन्दन सिंह चौहान, संयुक्त सचिव रघुनन्दन सिंह, संगठन सचिव गोपाल सिंह, शैलेन्द्र सिंह, रूपेन्द्र सिंह भाई ठाकुर, विश्वजीत सिंह, रविन्दर सिंह, लड्डु सिंह और अन्य मान्यवर उपस्थित थे।