हैदराबाद : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को आशा जताई कि अगले 10-15 साल में भारत 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। साथ ही, उन्होंने वित्तीय साक्षरता के जरिए महिलाओं को सशक्त करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

‘वित्तीय साक्षरता के जरिए महिला सशक्तिकरण' विषय पर यहां एक राष्ट्रीय सम्मेलन में नायडू ने कहा कि कृषि सहित हर क्षेत्र में महिलाओं को बराबर का हितधारक नहीं बनाए जाने तक तरक्की की रफ्तार जोर नहीं पकड़ेगी।

नायडू ने कहा, ‘‘निवेश के लिए भारत के एक शीर्ष गंतव्य के रूप में उभरने और अगले 10-15 साल में 10 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ने के साथ वित्तीय साक्षरता के जरिए महिलाओं का सशक्तिकरण काफी मायने रखता है और इसे अवश्य ही उच्चतम प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”

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उन्होंने कहा कि यह तभी होगा जब सरकार, एनजीओ और सिविक सोसाइटी इस दिशा में सामूहिक रूप से काम करेंगे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वित्तीय साक्षरता के जरिए महिला सशक्तिकरण न सिर्फ लैंगिक अंतराल को दूर करने के लिए जरूरी है, बल्कि यह महिलाओं के लिए कहीं अधिक सुरक्षित भविष्य का भी निर्माण करेगा। लैंगिक समानता न सिर्फ महिलाओं की, बल्कि हर नागरिक की चिंता होनी चाहिए।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के इस वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत और 2020 में 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है।

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हम दुनिया में छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और अगले पांच साल में पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं।"