साहित्य और शिक्षा वाक् पीठ की बैठक आयोजित, भिखारी ठाकुर साहित्य पर डाला प्रकाश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ अहिल्या मिश्र - Sakshi Samachar

हैदराबाद : बिहार एसोसिएशन के सान्निध्य में साहित्य एवं शिक्षा वाक् पीठ की त्रैमासिक बैठक रामकोट स्थित महिला नवजीवन मंडल के सभागार में संपन्न हुई। प्रमुख साहित्यकार डॉ अहिल्या मिश्र ने ‘साक्षी समाचार’ को बताया कि पीठ के अध्यक्ष चंद्र मोहन कर्ण, बिहार एसोसिएशन के अध्यक्ष मानवेंद्र मिश्र तथा महासचिव उत्तम कुमार यादव मंचासीन थे।

उन्होंने आगे बताया कि यह कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। पहला सत्र भिखारी ठाकुर की जीवनी उनकी रचनाओं तथा उन्हें प्रदान किए गए विभिन्न सम्मानों पर आधारित था। कार्यक्रम की शुरुआत गुंजनश्री की निराला रचित सरस्वती वंदना गीत से हुई।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ता

इसके बाद चंद्र मोहन कर्ण ने स्वागत भाषण में वाक् पीठ की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि क्यों भिखारी ठाकुर को राहुल सांकृत्यान ने भोजपुरी का शेक्सपियर कहा था। नाटक को उन्होंने इस ऊंचाई तक पहुंचाया कि हर कोई उन्हें भरतमुनि की परंपरा का पहला नाटककार मानता है।

दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ अहिल्या मिश्र, मानवेंद्र मिश्र व अन्य

अवधेश कुमार सिन्हा ने कहा कि भिखारी ठाकुर दरअसल भोजपुरी के कबीर थे। उन्होंने अपने गायन, लोकगीत, रामलीला तथा नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों को हटाने के लिए आजन्म प्रयास किया। वे हमेशा अपने नाटकों में सूत्रधार बनते और अपनी बातें चुटकुले अंदाज में कहते थे। दलित और महिला विमर्श उनके रचनाओं में मुखरित हुआ है। भिखारी ठाकुर एक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे। नाटककार, गीतकार, अभिनेता लोक नृत्य और लोकगायन के महारथी होने के साथ-साथ व समाज सुधारक भी थे।

संबोधित करते हुए मानवेंद्र मिश्र

गुंजनश्री ने भिखारी ठाकुर के नाटक के पक्ष को उजागर करते हुए कहा कि भोजपुरी के महान साधक भिखारी ठाकुर को अंग्रेजी साहित्य के शेक्सपियर से तुलना करना नाइंसाफी है। भिखारी ठाकुर दरअसल भिखारी ठाकुर ही थे। वैसे भी दोनों के कालखंडों में सामाजिक विसंगतियां थी। गुंजनश्री ने कहा कि पारंपरिक नाटकों में एक ग्रीन रूम होता है। जहां समुद्र की पूजा होती है और ऐसा माना जाता है कि अभिनेता समुद्र में मानो स्नान कर अपनी पहचान मिटा कर पात्र के स्वरूप को धारण करता है। मगर कहा जाता है कि भिखारी ठाकुर ग्रीन रूम में के विरोधी थे। वे अपने बातें सीधे दर्शक तक पहुंचाना पसंद करते थे।

सभा में उपस्थित साहित्यकार व दर्शक 

गुंजनश्री ने बताया कि भिखारी ठाकुर के गीत शास्त्रीय संगीत को शास्त्रीय संगीत की कसौटी पर भी उतने ही खरे है। उनके गीतों को महज लोकगीत के संज्ञा देकर उनकी अपमान करने जैसा है। बिहार एसोसिएशन के अध्यक्ष मानवेंद्र मिश्र ने कहा कि निर्माणाधीन भवन में एक भिखारी ठाकुर के नाम पर रखे जाने की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित लोगों ने स्वागत किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ता

इस अवसर पर साहित्यकार अहिल्या मिश्र ने कहा कि भोजपुरी एक विश्वव्यापी भाषा है। विदेशों में भी भोजपुरी भाषा बड़े पैमाने पर बोली जाती है। उन्होंने भिखारी ठाकुर की रचनाओं को कालयजी रचनाकार बताया। इस कार्यक्रम में सवालिया भारती और उनके समूह ने भिखारी ठाकुर के गीतों का गायन किया। असोसिएन के महासचिव उत्तम कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ता

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