2014 के विधानसभा चुनाव में अंबरपेट निर्वाचन क्षेत्र से अपने प्रतिद्वंद्वियों का सूफड़ा साफ करने वाले भाजपा उम्मीदवार जी. किशन रेड्डी का सामना इस बार सत्तारूढ़ पार्टी टीआरएस के कालेरु वेंकटेश और महाकूटमी के उम्मीदवार निज्जना रमेश है। मुख्य रूप से किशन रेड्डी और कालेरु वेंकटेश के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है।

किशन रेड्डी जहां चुनाव प्रचार में अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों व केंद्र सरकार की योजनाओं का हवाला देकर लोगों से वोट मांग रहे हैं, वहीं टीआरएस के उम्मीदवार कालेरु वेंकटेश केसीआर का नेतृत्व और टीआरएस सरकार की योजनाओं का प्रचार करते हुए अपना वोट मांग रहे हैं।

गौरतलब है कि इस बार तेलंगाना में भाजपा का सूफड़ा साफ करने का दावा करने वाले टीआरएस नेता केटीआर हर कीमत पर किशन रेड्डी को हराने के इरादे से इस क्षेत्र में खुद प्रचार कर रहे हैं। कई चुनावी सभाओं में केटीआर स्पष्ट कर चुके हैं कि इन चुनाव में भाजपा एक भी सीट नहीं जीतेगी और हर जगह उसका डिपॉजिट जब्त होना तय है।

पिछले चुनाव में किशन रेड्डी को सहरा पहनाने वाली अंबरपेट की जनता इस बार क्या उनके साथ रहेगी या फिर टीआरएस के उम्मीदवार को नया विधायक चुनेगी, इसका पता तो 11 दिसंबर को ही चलेगी।

किशन रेड्डी इस निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। 2009 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के फरीदुद्दीन, 2014 के चुनाव में टीआरएस के एड्ला सुधाकर रेड्डी को हराया था। हर बार की तरह वह इस बार भी चुनाव प्रचार में केवल विकास का मुद्दा उठा रहे हैं। किशन रेड्डी लोगों के बीच रहने वाले नेता बताए जाते हैं।

गौरतलब है कि इस निर्वाचन क्षेत्र में मुस्लिम वोटों की संख्या काफी अधिक होने के बावजूद किशन रेड्डी लगातार जीत रहे हैं। हालांकि किशन रेड्डी पर अंबरपेट मुख्य सड़क मार्ग पर छह नंबर रोड के पास फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण नहीं करा पाए हैं। क्षेत्र में उन्होंने स्कूल और सड़कों के विकास के लिए काफी काम किया है।

किशन रेड्डी की खूबियों में अकसर लोगों के लिए उपलब्ध रहना, क्षेत्र में हुए विकास कार्यों तथा क्षेत्र की समस्याओं पर निरंतर नजर रखते हुए उन्हें सुलझाने जैसे मुद्दे हैं, जबकि अगर हम उनकी कमजोरियों की बात करें, तो उनका स्थानीय न होना, द्वितीय श्रेणी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी तथा पार्टी के कुछ नेताओं का टीआरएस में शामिल होना है।

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उधर, कांग्रेस के उम्मीदवार कालेरु वेंकटेश ने भी अपना चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। उन्होंने किशन रेड्डी के कार्यकाल में अंबरपेट का विकास नहीं होने और भाजपा नेतृत् वाली केंद्र की मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के कारण लोगों को हो रही परेशानियां गिनाते हुए निर्वाचन क्षेत्र में लोगों से वोट मांग रहे हैं।

कालेरु वेंकटेश पेशे से एक वकील होने के साथ-साथ गोलनाका के कार्पोरेटर भी रह चुके हैं। इन सबके अलावा पार्टी के फायर ब्रांड नेता केटीआर विशेष रूप से निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार कर रहे हैं। वकील होने से वेंकटेश का अपना पूरा समय राजनीति में नहीं देना और निर्वाचन क्षेत्र के अधिकांश इलाकों की जानकारी नहीं होना उनके लिए परेशानी बन सकती है।

निर्वाचन क्षेत्र से महाकूटमी के उम्मीदवार निज्जना रमेश भी चुनाव मैदान में हैं। निज्जना रमेश ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्र नेता होने के अलावा तेलंगाना आंदोलन में भी हिस्सा लिया था।