हैदराबाद :निम्मा नायडू नामक शासक के यहां शासन करने की वजह से इस क्षेत्र का नाम निर्मल पड़ा है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या-6,16,305 है जिसमें पुरुष-2,98,983 और महिलाएं-3,17,249 हैं। एक समय में निर्मल तत्कालीन निजाम सरकार का शास्त्रागृह हुआ करता था। जिले के बासर में ज्ञान सरस्वती मंदिर है, जिसका निर्माण कर्नाटक के राजा बीरबल ने करवाया था।

निर्मल जिला क्षेत्र में रामजी गोंडा के नेतृत्व में अंग्रेजों व निजाम सेना के खिलाफ करीब 160 वर्षों तक संघर्ष किया गया। जिले में गुस्साड़ी लोकनृत्य और बंजाराओं का जगदांबा मंदिर प्रसिद्ध हैं। जिले में निर्मल पेंटिंग्स और लकड़ी से बने निर्मल खिलौने काफी मशहूर हैं। जिले में कडेम रिजर्वायर और स्वर्णवागु रिजर्वायर हैं।

इस जिले का निर्माण आदिलाबाद जिले का विभाजन करके किया गया है। इस जिले में कुल दो विधानसभाएं है। आइए डालते हैं इस पर एक नजर.....

01. निर्मल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र


1952 में गठित निर्मल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या-2,10,311 है जिसमें पुरुष-99,383 और महिलाएं-1,10,900 हैं। निर्मल आदिलाबाद जिले को विभाजित कर बनाया गया है। निर्मल नाम निम्मा नायडू शासक के नाम से आया है। निर्मल के खिलौने विश्व प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में मुन्नुरकापु और पद्मशाली समुदाय के लोग अधिक हैं।2014 विधानसभा चुनाव में यहां से अलोला इंद्रकरन रेड्डी बहुजन समाज पार्टी से जीतने के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति में शामिल हो गए और केसिआर की कैबिनेट में मंत्री बने।

अलोला इंद्रकरन रेड्डी
अलोला इंद्रकरन रेड्डी

यहां पीने का पानी का बड़ा संकट है। इंद्रकरन रेड्डी ने पिछले चुनाव के वक्त पीएफ कार्यालय और स्टेडियम के निर्माण करने का वादा किया था, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया है। स्वर्णा प्रोजेक्ट के अधुनिकीकरण का काम नहीं चल रहा है। इंद्रकरण रेड्डी और उनके परिवार पर भूमि घोटालों में शामिल होने के आरोप हैं। कांग्रेस से माहेश्वर रेड्डी और भाजपा से स्वर्णा रेड्डी और बीएलएफ की अलीवेलु मंगा चुनाव लड़ रही हैं।

02. मुधोल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र


मुधोल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या-2,13,520 है जिसमें पुरुष-1,04,521 और महिलाएं-1,08,982 हैं। इस क्षेत्र में प्रसिद्द सरस्वती मंदिर है, जिसकी अधिकारियों और सरकार द्वारा उपेक्षा की जा रही है। इस विधानसभा क्षेत्र में मुन्नुरकापु और अल्पसंख्यकों का अधिक प्रभाव है। भैंसा और तानुर में अल्पसंख्यकों का अधीक प्रभाव है।गड्डन्नावागु और पाल्सीरंगाराव प्रोजेक्ट के पूरा नहीं होने से यहां के किसानों को सिंचाई के लिए परेशानी हो रही है।

विट्टल रेड्डी
विट्टल रेड्डी

विट्टल रेड्डी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के पार्टी से जीत दर्ज कर बाद में टीआरएस में शामिल हो गए। इस बार चुनाव में वह टीआरएस पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में टीआरएस, कांग्रेस के अलावा भाजपा और एमईएम का भी अच्छा खासा कैडर है। 2018 के चुनाव में विट्ठल रेड्डी का सामना कांग्रेस के रामाराव पटेल पवार, भाजपा की रमादेवी और बीएलएफ के लक्ष्मण से है।