हैदराबाद: मुख्यमंत्री केसीआर ने बसों के अधिभोग अनुपात (आक्युपेंसी रेशियो) को 80% तक बढ़ाने के लिए आरटीसी अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि डिपो में जाकर वहां कार्यरत कर्मचारियों को संस्था पर विश्वास दिलाने का काम किया जाना जरूरी है।

राज्य परिवहन निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एमडी सुनील शर्मा के साथ शनिवार को मुख्यमंत्री ने राज्य परिवहन कंपनी की प्रगति और कर्मचारियों के कल्याण की समीक्षा की।मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों को नियमों पर ध्यान देना चाहिए और जहां यात्री कहें वहां बस रोकने व बस स्टॉप न हो वहां यात्रियों को छोड़कर नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।

बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए जहां इलेक्ट्रिक बसें बढ़ रही हैं और लोग अपने स्वयं के वाहनों में यात्रा न करके सार्वजनिक परिवहन वाहनों में यात्रा करे इसके लिए दुनिया भर में उपाय किया जा रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए हर जगह सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को मजबूत किया जा रहा है।

हालाँकि, हैदराबाद में स्थिति इससे उलट ही देखने को मिलती है। लगभग एक अरब की आबादी के साथ सिटी बसें किसी भी अन्य शहर की तुलना में यहां बेहद कम हैं। सिटी बसें केवल प्रमुख सड़कों पर चलती हैं। इसकी वजह से लोगों को या तो घर से बस के लिये ज्यादा चलना पड़ता है या फिर वे अपना खुद का वाहन लेकर निकल पड़ते हैं।

कई लोग सुझाव दे रहे हैं कि जितनी संभव हो उतनी बसें उपलब्ध कराकर लोगों को सुविधाएं दी जानी चाहिए ताकि वे अपने वाहन में सफर न करके बस में सफर करे। वहीं कहा जा रहा है कि अधिकारी अब 1 जनवरी तक हैदराबाद में एक हजार पुरानी बसों को निकालने की योजना बना रहे हैं।इसके बाद केवल 2,700 बसें ही बचेंगी।

दस साल पहले बसों की इतनी ही संख्या थी, जो अब होने वाली है तो यहां सवाल यह उठता है समय के साथ संख्या को बढ़ाया जाना चाहिए या कम किया जाना चाहिए। लेकिन लग रहा है कि हैदराबाद में आरटीसी की सोच बिलकुल अलग है।

आरटीसी को चालू वित्त वर्ष में लगभग 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कहा जा रहा है कि हैदराबाद से ही 550 करोड़ का नुकसान हुआ है। सूत्र कह रहे हैं कि बसों की संख्या के बढ़ने से नुकसान भी बढ़ रहा है इसीलिए बसों की संख्या को कम करने की बात सोची जा रही है।

हाल ही में, सीएम केसीआर द्वारा आयोजित दो बैठकों में सिटी बसों से हुए नुकसान पर ही चर्चा की गई। इस चर्चा में सीएम केसीआर ने कहा कि दोपहर के समय बसें ज्यादा होती है और यात्री कम, तो ऐसे समय में बसें कम भी चलाई जा सकती है।

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आरटीसी को जब नुकसान हो रहा है तो इतने कम यात्रियों के साथ बस चलाना कहां तक सही है। तब अधिकारियों ने कहा कि बसों की संख्या को कम करना ही नुकसान कम करने का एकमात्र उपाय बचा है।

तो हैदराबाद में जनवरी से कम हो जाएगी बसों की संख्या। देखने वाली बात यह होगी कि सरकार मात्र ऐसा करके नुकसान को कैसे कम करेगी।